'कौन-सी शराब अच्छी है?' बिहार में शराबबंदी पर फिर बोलने लगे जीतनराम मांझी
बिहार में शराबबंदी को लेकर जीतन राम मांझी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि हम सरकार के मित्र हैं सच्चाई बताते हैं.

Published : December 9, 2025 at 1:06 PM IST
गया: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने शराबबंदी को लेकर फिर से बड़ा बयान दिया है, उनके इस बयान से एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है, कि शराबबंदी अच्छी चीज है. इससे समाज का भला होता है. शराबबंदी के क्रियान्वयन में कुछ विसंगतियां हैं और यही वजह है कि मेरे कहने पर तीसरी बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी पर समीक्षा की.
शराबबंदी को लेकर मांझी का बड़ा बयान: हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि आज कंटेनर के कंटेनर लाखों लीटर शराब की तस्करी की जा रही है, लेकिन स्मगलर नहीं पकड़े जा रहे हैं. वहीं, मजदूर व्यक्ति जब 50 ग्राम, 100 ग्राम थकान होने पर शराब पी लेते हैं, तो उन्हें ब्रेथ एनेलाइजर लगा दिया जाता है. उन्हें जेल भेज दिया जाता है. यह ठीक नहीं है.
'पत्नी के लिए कोई शराब ले जा रहा तो..': शराबबंदी को लेकर गरीब मजदूरों को जेल भेजा जाना ठीक नहीं है. कोई अपनी पत्नी के लिए दवा के रूप में शराब ले जा रहा हो, तो उसे नहीं पकड़ना चाहिए. साथ ही मांझी ने कौन-सी शराब अच्छी है बताते हुए कहा कि पहले महुआ शराब फायदेमंद होती थी. उसमें कई तरह की चीज मिलाई जाती थी.
"कई तरह की जड़ी समेत अन्य चीजों को मिलाकर उसे (महुआ शराब) तैयार किया जाता था. पहले शराब महुआ शराब 8 दिनों में तैयार होती थी. लेकिन अब 2 घंटे में तैयार हो जाती है. चोरी छुपे आज नौसादर, यूरिया आदि घातक चीजों को मिलाकर शराब बेची जा रही है और गरीब इसका सेवन कर रहे हैं, जिससे उनका हेल्थ चौपट होता जा रहा है."- जीतन राम मांझी, केंद्रीय मंत्री
'MLA, डॉक्टर, इंजीनियर रात को पीते हैं': जीतन राम मांझी ने शराबबंदी पर फिर से बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि डॉक्टर, एमएलए, इंजीनियर, अधिकारी सब महंगे शराब पीते हैं. यह 50 हजार, 20 हजार वाले बोतल की शराब मंगाते हैं और आराम से 10 बजे रात के बाद पीते हैं.
होम डिलीवरी लगातार जारी-मांझी: इस तरह की शराबबंदी के क्रियान्वयन में पारदर्शिता नहीं है. बड़े तस्करों को पकड़ा जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. स्वाभाविक तौर पर होम डिलीवरी लगातार जारी है. साथ ही मांझी का आरोप है कि शराब तस्कर चुनाव लड़ रहे हैं और जीत रहे हैं.
'थाने के पास मिला शराब': केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि दूसरों की बात दूसरे स्थान की बात क्या करें, हमारे गांव में थाना है, थाने के बगल में शराब की बड़ी खेप मिली है. आश्चर्य की बात है, कि थाने के बगल में शराब मिल रही है.
'हम सरकार को सच्चाई बताते हैं': इसपर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्या नीतीश जी इसे रोकने आएंगे? केंद्रीय मंत्री मांझी ने कहा कि हमारी सरकार है और यह स्थिति है, लेकिन हम सरकार के मित्र हैं और सच्चाई बताते हैं.
'सरकार को आईना दिखाने का काम करता हूं': केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि हमारी सरकार बिहार में जरूर है,लेकिन आईना दिखाने का काम जरूर करता हूं. मित्र गलत संदेश नहीं देता है और वही मित्र मैं हूं. सरकार को गलत सलाह नहीं दे सकते हैं और आईना के रूप में जो सच्चाई होती है, वह बताता हूं.
ट्रक के ट्रक झारखंड से आती है शराब: झारखंड की ओर से ट्रक के ट्रक शराब आती है, लेकिन कोई एक्शन नहीं होता है. ऐसा नहीं कि नीतीश कुमार ने पकड़ने को मना किया है. यह सिस्टम में खराबी है, जिनपर कार्रवाई होनी चाहिए. उनपर कार्रवाई नहीं हो रही है.
"तस्करों पर नकेल नहीं कसा जा रहा है. बल्कि गरीब मजदूरों को जो थोड़ी शराब पीते हैं. उन्हें पकड़ा जा रहा है. यह गरीब मजदूर अपनी थकावट दूर करने के लिए शराब पीते हैं. फिर भी इन्हें पकड़ा जा रहा है. पकड़ाए 6 लाख में से चार लाख लोग ऐसे हैं जो गरीब मजदूर की परिधि के हैं."- जीतन राम मांझी, केंद्रीय मंत्री
'मेरे माता-पिता भी बनाते थे शराब': केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि मेरे माता-पिता भी शराब बनाते थे. तब शराब फायदेमंद होती थी, लेकिन आज जो शराब बन रही है, वह शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो रही है. यही वजह है कि वह शराब जो गरीब मजदूर पी रहे हैं, उनका पूरा हेल्थ सिस्टम चौपट हो जा रहा है. पहले के शराब में कई तरह के चीज मिलाई जाती थी, जो फायदेमंद साबित होती थी.
पहले भी शराबबंदी पर दे चुके हैं बयान: बता दें कि मांझी अपनी बेबाक टिप्पणियों से अक्सर विवाद खड़ा करते हैं. इससे पहले भी उन्होंने बिहार में गरीबों को सलाह दी थी कि शराब पीने की कला अमीरों से सीखें, जो नशे के बाद हंगामा नहीं करते हैं और चुपचाप सो जाते हैं.
बिहार में 9 साल से शराबबंदी: बिहार में शराबबंदी लागू हुए 9 साल पूरे हो चुके है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अप्रैल 2016 में शराबबंदी लागू की थी, जिसके बाद शराब के निर्माण और व्यापार पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद बिहार में जहरीली शराब से मौतें और शराब तस्करी का खेल बदस्तूर जारी है.
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