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2030 तक झारखंड को रेबीज-मुक्त बनाने की तैयारी, हर जिला अस्पताल बनेगा मॉडल एंटी-रेबीज क्लिनिक

2030 तक झारखंड को रेबीज-मुक्त बनाने की तैयारी की जा रही है. इसके तहत हर जिले में मॉडल एंटी-रेबीज क्लिनिक अस्पताल बनेगा.

Rabies in Jharkhand
बैठक के दौरान शशि प्रकाश झा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 17, 2026 at 8:39 PM IST

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रांची: झारखंड में रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक झारखंड को रेबीज-मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है. इसके तहत राज्य के सभी जिला अस्पतालों को मॉडल एंटी-रेबीज क्लिनिक के रूप में विकसित किया जाएगा.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश जारी करते हुए एनिमल बाइट मैनेजमेंट और पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस को सख्ती से लागू करने को कहा है. निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक एंटी-रेबीज वैक्सीन और एंटी-रेबीज सीरम की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.

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कुत्ते के काटने के बाद क्या करें (ETV Bharat)

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मॉडल एंटी-रेबीज क्लिनिक में विशेष वुंड वॉशिंग एरिया बनाया जाएगा, जहां कुत्ते या अन्य जानवर के काटने के बाद घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोने की व्यवस्था होगी. विशेषज्ञों के अनुसार यह रेबीज संक्रमण रोकने का सबसे अहम शुरुआती कदम है.

राज्य में वन हेल्थ अप्रोच के तहत मानव रेबीज को पहले ही अधिसूचित बीमारी घोषित किया जा चुका है. अब हर डॉग बाइट केस की रिपोर्टिंग आईएचआईपी-आईडीएसपी पोर्टल पर अनिवार्य कर दी गई है. नए टीकाकरण प्रोटोकॉल के अनुसार मरीजों को इंट्रा-डर्मल रूट से निर्धारित दिनों पर वैक्सीन दी जाएगी, जबकि गंभीर मामलों में डॉक्टरों की सलाह से रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन का इस्तेमाल किया जाएगा.

रेबीज के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष जागरूकता रथ भी शुरू किया है, जो अगले दो महीनों तक जिलों में भ्रमण कर लोगों को जानकारी देगा. इसके साथ ही नगर निकायों, पंचायती राज संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से स्कूलों और ग्रामीण इलाकों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे.

स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल सर्जनों को यह भी निर्देश दिया है कि अस्पतालों में कार्यरत मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ को एनिमल बाइट मैनेजमेंट का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर सही इलाज मिल सके.

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