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झारखंड में संगठित अपराध की जड़ पर प्रहार, अपराधी और उनके सहयोगियों का डिजिटल डेटाबेस तैयार कर रही पुलिस

झारखंड पुलिस अपराधियों की संपत्ति से लेकर उनके सहयोगियों तक का डिजिटल डेटाबेस तैयार कर रही है. प्रशांत कुमार की रिपोर्ट.

Data Centre, Ranchi
डाटा सेंटर, रांची (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : August 25, 2026 at 4:35 PM IST

6 Min Read
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रांची: झारखंड में संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस ने अब कार्रवाई को और रणनीतिक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. गैंग बनाकर अपराध करने वाले अपराधियों पर सिर्फ गिरफ्तारी और केस दर्ज करने तक सीमित रहने के बजाय उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में काम किया जा रहा है. पुलिस का लक्ष्य संगठित अपराध की जड़ तक पहुंचकर उसके आर्थिक और आपराधिक ढांचे को ध्वस्त करना है.

बड़े गैंगस्टर के खात्मे के बाद भी जारी है आतंक

पुलिस की लगातार कार्रवाई और अपराधियों के ‘हाफ एनकाउंटर’ के बावजूद झारखंड में लेवी वसूलने के लिए गैंग बेखौफ नजर आ रहे हैं. कुख्यात अमन साहू और सुजीत सिन्हा के खात्मे तथा अमन सिंह की जेल में हत्या के बाद माना जा रहा था कि रंगदारी का खेल थमेगा, लेकिन नए अपराधियों ने उनकी जगह ले ली है. फिलहाल राहुल दुबे और प्रिंस खान जैसे गैंगस्टरों का खौफ कंस्ट्रक्शन साइटों और औद्योगिक इलाकों में दिख रहा है. हाल के दिनों में जितने आपरधियों का हाफ एनकाउंटर हुआ उससे ज्यादा उन्होंने आतंक मचाया है.

अपराधी और उनके सहयोगियों का डिजिटल डेटाबेस (Etv Bharat)

केस स्टडीज (2026)

23 अगस्त 2026 को चतरा के टंडवा स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना में सुशी इंफ्रा के कार्यालय पर चार नकाबपोश अपराधियों ने दिनदहाड़े फायरिंग की. गोली लगने से गार्ड घायल हुआ. घटना में राहुल दुबे गैंग का नाम सामने आया. 21 अगस्त को पलामू के सतबरवा में नेशनल हाईवे निर्माण स्थल पर फायरिंग में दो मजदूर घायल हुए. मौके से चार खोखे और राहुल दुबे गिरोह का पर्चा मिला.

25 जुलाई को हजारीबाग के गिद्दी में राहुल दुबे गैंग के नाम पर हाइवा के उपचालक को दोनों पैरों में गोली मारी गई. इसी दिन बड़कागांव में दो हाइवा पर आठ राउंड फायरिंग हुई, जिसकी जिम्मेदारी प्रिंस खान ने ली थी. लगातार घटनाएं बताती हैं कि कार्रवाई के बावजूद रंगदारी का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

अलग-अलग विंग काम पर जुटी

झारखंड से नक्सलवाद खत्म हो चुका है लेकिन संगठित अपराध का चेहरा लगातार बड़ा होने की कोशिश कर रहा है, आए दिन रंगदारी को लेकर कंस्ट्रक्शन कंपनियों के दफ्तरों पर हमले किए जा रहे हैं गोलियां चलाई जा रही है. अपराधी इस आतंक को सिर्फ इसलिए कायम करने में लगे हैं ताकि आतंक के खौफ से वे मोटी कमाई कर सके लेकिन अब झारखंड पुलिस के द्वारा एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया है, जिनके जरिए न सिर्फ संगठित गिरोहों को न सिर्फ आर्थिक छोटी दी जाएगी बल्कि उनके सहयोगियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा.

संगठित अपराध के खिलाफ चल रही इस रणनीति में एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS), आईजी ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, क्विक रिस्पांस और विशेष टीमों के साथ-साथ सभी जिलों के एसपी को भी जोड़ा गया है. अलग-अलग स्तर पर काम कर रही पुलिस टीमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर अपराधियों के नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है.

अपराधियों की संपत्ति और बैंक खातों पर भी नजर

झारखंड पुलिस के प्रवक्ता सह आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस संगठित अपराध से जुड़े अपराधियों की मूवेबल और नॉन-मूवेबल प्रॉपर्टी का ब्योरा जुटा रही है. इसके अलावा उनके बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन और वित्तीय नेटवर्क की भी जानकारी एकत्र की जा रही है.

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अपराध से अर्जित धन कहां और किस माध्यम से खपाया जा रहा है. पुलिस ऐसे लोगों की भी पहचान कर रही है, जो सीधे तौर पर अपराध में शामिल नहीं होने के बावजूद संगठित अपराधियों को किसी न किसी रूप में सहयोग करते हैं. इनमें आर्थिक मदद, लॉजिस्टिक सपोर्ट, ठिकाना उपलब्ध कराने या अन्य माध्यमों से सहयोग करने वाले लोग शामिल हो सकते हैं.

ऑनलाइन तैयार हो रहा संगठित अपराध का डेटाबेस

आईजी अभियान के अनुसार, संगठित अपराध से जुड़े मामलों की सूचनाओं को एक जगह एकत्र करने के लिए ऑनलाइन डेटाबेस तैयार किया जा रहा है. इसमें अपराधियों, उनके सहयोगियों, संपत्ति, बैंक खातों और आपराधिक नेटवर्क से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज की जा रही है. इस डिजिटल डेटाबेस से पुलिस को अलग-अलग जिलों में सक्रिय अपराधियों और उनके नेटवर्क के बीच संबंधों को समझने में मदद मिलेगी, साथ ही किसी अपराधी या गिरोह के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उसके पूरे नेटवर्क की जानकारी पुलिस के पास उपलब्ध रहेगी.

रणनीति के तहत नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि संगठित अपराध को केवल अपराधियों की गिरफ्तारी से पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता. इसके लिए अपराधियों के आर्थिक स्रोत, सहयोगियों और पूरे नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई जरूरी है. इसी रणनीति के तहत झारखंड पुलिस अब संगठित अपराध के खिलाफ बहुस्तरीय कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रही है. पुलिस की इस कवायद का उद्देश्य आने वाले समय में संगठित अपराध के खिलाफ एक मजबूत और स्थायी सिस्टम तैयार करना है, ताकि अपराधी गिरोह दोबारा संगठित होकर अपना नेटवर्क खड़ा न कर सके.

2026 में अब तक 193 को पहुंचाया सलाखों के पीछे

झारखंड पुलिस मुख्यालय के जनवरी से जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 193 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. इनके पास से 63 हथियार और 274 गोलियां बरामद हुई. अपराधियों पर सिर्फ आपराधिक मुकदमों के जरिए कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी शिकंजा कसा गया.

इसमें 47 अपराधियों को जिला बदर किया गया, जबकि 9 अपराधियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है. हालांकि इन कार्रवाइयों के बावजूद संगठित अपराध का चेहरा लगातार बड़ा हो रहा है, शायद यही वजह है कि अब पुलिस उन्हें आर्थिक झटका देकर उनके खौफ के बिजनेस पर ब्रेक लगाने में जुटी है.

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