CCTV मामले में हाई कोर्ट सख्त, DGP को अवमानना नोटिस, 30 सितंबर तक सभी थानों में कैमरे लगाने का निर्देश
पुलिस थाना में सीसीटीवी लगाने के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने डीजीपी को अवमानना नोटिस जारी किया है. राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट.


Published : August 27, 2026 at 2:39 PM IST
रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने के मामले में राज्य सरकार के रवैए पर नाराजगी जताते हुए पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्र को अवमानना नोटिस जारी किया है.
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार को 30 सितंबर तक राज्य के सभी थानों में CCTV कैमरे लगाने और इसका अनुपालन रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने मामले में सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न न करें, जिससे अदालत को कोई कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़े.
महाधिवक्ता के जवाब से कोर्ट असंतुष्ट
झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता की ओर से दिए गए जवाब पर खंडपीठ ने असंतोष जाहिर किया. अदालत ने स्पष्ट किया कि थानों में CCTV कैमरों की स्थापना और उसकी निगरानी को लेकर दिए गए निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए. इसी क्रम में कोर्ट ने DGP को अवमानना नोटिस जारी करते हुए 30 सितंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है.
चीफ सेक्रेटरी और होम सेक्रेटरी देंगे को शपथ पत्र
हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को संयुक्त रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. दोनों अधिकारियों को 30 सितंबर तक यह बताना होगा कि राज्य के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं और अदालत के निर्देशों का अनुपालन हुआ है. अदालत ने इसके साथ ही अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा है.
डॉ. डी. अग्रवाल से 11 सितंबर तक जवाब तलब
मामले में अदालत ने डॉ. डी. अग्रवाल को भी 11 सितंबर तक शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है.
तरुण महतो की हिरासत में पिटाई से जुड़ा है मामला
यह मामला झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा यानी JLKM के वर्ष 2024 के ईचागढ़ विधानसभा प्रत्याशी रहे तरुण महतो की कथित पुलिस हिरासत में पिटाई से भी जुड़ा है. आरोप है कि नवंबर 2025 की रात ईचागढ़ पुलिस उन्हें पकड़कर थाने ले गई थी, जहां उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया. तब पुलिस और प्रशासन की ओर से कहा गया था कि बालू लदे ट्रकों से अवैध वसूली को लेकर उपजे विवाद के दौरान जेएलकेएम कार्यकर्ताओं ने पुलिस टीम पर भी हमला किया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे. इसी मामले में तरुण महतो को हिरासत में लिया गया था.
पत्नी के पत्र पर हाई कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान
तरुण महतो की पत्नी की ओर से इस मामले को लेकर झारखंड हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस को पत्र भेजा गया था. पत्र में पुलिस हिरासत में उनके साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाया गया था. इसी पत्र के आधार पर हाई कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की थी.
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