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रांची विश्वविद्यालय में ILS के प्रभार को लेकर विवाद, पदाधिकारियों के बीच मतभेद की चर्चा

झारखंड हाईकोर्ट में रांची यूनिवर्सिटी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई. मामला इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज से जुड़ा है.

Ranchi University and ILS dispute
इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज. (फोटो-ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : March 3, 2026 at 6:40 PM IST

3 Min Read
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रिपोर्ट-चंदन भट्टाचार्य.

रांची:रांची विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (ILS) को लेकर इन दिनों प्रशासनिक हलकों में हलचल है. संस्थान के कुछ विद्यार्थियों द्वारा विश्वविद्यालय के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई है. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस राजेश कुमार ने सभी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना काउंटर दाखिल करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित है.

ILS के तत्कालीन निदेशक और विवि प्रशासन के बीच मतभेद

इस बीच ILS के तत्कालीन निदेशक मयंक मिश्रा और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच मतभेद की चर्चा सामने आई है. निदेशक ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए विश्वविद्यालय से अधिवक्ता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था. इस संबंध में रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से उन्हें लिखित रूप में निर्देश दिया गया कि वे इस मामले से दूरी बनाए रखें और कोई स्वतंत्र कार्रवाई न करें.

विश्वविद्यालय ने कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन अस्वीकृत किया

हालांकि, मयंक मिश्रा ने विद्यार्थियों की याचिका के संदर्भ में अपना पक्ष न्यायालय में दाखिल कर दिया है. इसके बाद उनके अनुबंध विस्तार (कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन) के प्रस्ताव को विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकृति नहीं दी गई. इस घटनाक्रम के बाद होली अवकाश के दौरान समाजशास्त्र विभाग के वर्तमान विभागाध्यक्ष को ILS का प्रभार सौंपे जाने का आदेश जारी किया गया है, इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं.

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मयंक मिश्रा ने कहा, “मैंने न्यायालय में केवल संस्थान का तथ्यात्मक पक्ष रखा है. मेरा उद्देश्य विद्यार्थियों और संस्थान के हितों की रक्षा करना था.” वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया विश्वविद्यालय में छुट्टियां होने के कारण नहीं मिल पाई हैं.

विवाद की वजह और सवाल

विवाद का एक पहलू बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के लीगल एजुकेशन रूल्स से भी जुड़ा है. BCI के शेड्यूल-3, रूल-16 के अनुसार किसी भी लॉ कॉलेज या विश्वविद्यालय के विधि विभाग का प्रमुख वही व्यक्ति हो सकता है, जो विधि विषय में आवश्यक शैक्षणिक योग्यता रखता हो और प्रोफेसर रैंक का हो. इस आधार पर कुछ शिक्षकों और विद्यार्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए हैं.

याचिकाकर्ताओं का पक्ष

याचिकाकर्ताओं में अम्बेश चौबे, तुषार दुबे, आर्यन देव, देवेश नंद तिवारी ने कहा कि हम चाहते हैं कि विश्वविद्यालय पारदर्शिता के साथ अपना पक्ष रखें, ताकि हमारे भविष्य पर कोई असर न पड़े. यह मामला गंभीर है. इसकी जांच होनी चाहिए.

अगली सुनवाई पर टिकी नजर

फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से न्यायालय में काउंटर दाखिल किए जाने का इंतजार है. पूरे मामले पर सबकी नजर 12 मार्च की अगली सुनवाई पर टिकी है. प्रशासन का कहना है कि संस्थान और विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी, जबकि विरोधी पक्ष पारदर्शिता और नियमों के पालन की मांग कर रहा है.

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