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रिम्स की जमीन पर अतिक्रमण का मामला, हाईकोर्ट ने खारिज की नगर निगम की हस्तक्षेप याचिका, एसीबी से स्टेट्स रिपोर्ट तलब

झारखंड हाईकोर्ट में रिम्स जमीन अतिक्रमण मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने रांची नगर निगम की हस्तक्षेप याचिका खारिज कर दी.

Encroachment on RIMS land
झारखंड हाईकोर्ट. (फोटो-ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 18, 2026 at 7:15 PM IST

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रांचीः रिम्स में जमीन अतिक्रमण मामले में चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में सुनवाई हुई. खंडपीठ ने रांची नगर निगम की हस्तक्षेप याचिका को खारिज कर दिया. इस दौरान एसीबी के द्वारा अनुसंधान की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की गई . हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि खंडपीठ ने एसीबी को जांच कर 23 अप्रैल तक स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. इस मामले में एसीबी की जांच जारी है.

दरअसल, झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने रिम्स की जमीन पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए न सिर्फ अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, बल्कि वैसे अधिकारियों के खिलाफ ACB जांच का भी आदेश दिया था, जिनकी वजह से सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण और रसीद काटने की अनुमति दी गई थी.

जानकारी देते हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार. (वीडियो-ईटीवी भारत)

खंडपीठ ने यह भी कहा था कि अतिक्रमण की वजह से जिन लोगों के घर तोड़े जा रहे हैं, उन्हें मुआवजा दिया जाए और सारा खर्च दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से वसूला जाए. तब खंडपीठ ने कहा था कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना सरकारी जमीन पर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग कैसे बन सकती है.

बता दें कि रिम्स की सात एकड़ से अधिक अधिग्रहित जमीन पर अवैध कब्जा कर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, मंदिर, दुकानें और पार्क बनाई गई थी. कई फ्लैट बेच भी दिए गये थे. जब बिल्डिंग तोड़ी जा रही थी तो खरीदारों का यही कहना था कि उनका कसूर क्या है. इसी आधार पर खंडपीठ ने एसीबी को जांच करने का आदेश दिया था.

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