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नई कमेटी के गठन के बाद झारखंड कांग्रेस में घमासान, अनुभवी नेताओं की नाराजगी से बढ़ी बेचैनी

झारखंड कांग्रेस में नई कमेटी के गठन के बाद कई नेता असंतुष्ट हैं.

Jharkhand Congress
प्रदेश कांग्रेस कार्यलय (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : May 6, 2026 at 6:10 PM IST

3 Min Read
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रांची: झारखंड कांग्रेस की नई 314 सदस्यीय ‘जम्बोजेट’ प्रदेश कमेटी घोषित होने के महज कुछ दिनों बाद पार्टी में आंतरिक कलह चरम पर पहुंच गई है. राहुल गांधी के “जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उतनी भागीदारी” फॉर्मूले पर कमेटी बनाने का दावा किया गया, लेकिन इसकी घोषणा के साथ ही असंतोष और बगावत की लहर उभर आई है.

एक के बाद एक इस्तीफे, दलित चेहरा भी नाराज

पार्टी में विवाद की शुरुआत राज्य के वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर के अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलने से हुई. इसके बाद उनके बेटे प्रशांत किशोर ने प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दे दिया. अब अनुभवी नेता जगदीश साहू ने भी प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दे दिया है. चार बार प्रदेश कांग्रेस सचिव रह चुके जगदीश साहू ने ईमानदारी से पार्टी की जिम्मेदारियां निभाने का दावा करते हुए कहा कि अनुभवी और समर्पित नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है.

जगदीश साहू और सोनल शांति का बयान (ETV Bharat)

जगदीश साहू का तीखा आरोप

जगदीश साहू ने इस्तीफे की वजह बताते हुए गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा, “कांग्रेस के सैलरीड स्टाफ को सचिव और संयुक्त सचिव बना दिया गया. पार्टी और प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ बगावत करने वालों को बड़े पद सौंपे गए, जबकि जो कार्यकर्ता लगातार समर्पित रहे, उन्हें झुनझुना पकड़ा दिया गया.”

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश उपाध्यक्ष और महासचिव जैसे अहम पदों पर ऐसे लोगों को नियुक्त किया गया है जो पहले से कई पद संभाल रहे हैं या फिर बोर्ड-आयोग-निगमों में चेयरमैन, उपाध्यक्ष व सदस्य हैं. साहू ने मर्माहत होते हुए कहा कि वह एक साधारण कार्यकर्ता की हैसियत से कांग्रेस की सेवा जारी रखेंगे, लेकिन इस कमेटी से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है. उन्होंने आशंका जताई कि वर्तमान पीसीसी से कई और पदाधिकारी इस्तीफा दे सकते हैं.

पार्टी प्रवक्ता ने किया बचाव

नई कमेटी के गठन और दो प्रदेश सचिवों के इस्तीफे पर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि कमेटी बहुत सोच-समझकर और संतुलित तरीके से बनाई गई है. उन्होंने कहा, “जब लोग अपनी उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ा लेते हैं और वे पूरी नहीं होतीं, तब या तो वे आलाकमान तक शिकायत पहुंचाते हैं या इस्तीफा दे देते हैं.” शांति ने जोर देकर कहा कि पार्टी ने संतुलन बनाते हुए फैसले लिए हैं.

नई कमेटी में समावेशिता का दावा किया गया है, लेकिन अनुभवी नेताओं के इस्तीफे और लगातार बढ़ते असंतोष ने झारखंड कांग्रेस की एकजुटता पर सवालिया निशान लगा दिया है. पार्टी के अंदरूनी कलह को लेकर अब सभी की नजरें हाईकमान पर टिकी हुई हैं.

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