CUET, JEE, NEET... 12वीं के बाद किस एग्जाम से कौन से टॉप कॉलेज मिलते हैं? यहां जान लीजिए
CUET, JEE और NEET की परीक्षाओं में क्या अंतर है, जान लीजिए देश के कौन-कौन से टॉप कॉलेजों में होता है चयन. पटना से कृष्णनंदन की रिपोर्ट

Published : May 28, 2026 at 8:08 AM IST
पटना : 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि आगे किस कोर्स और किस कॉलेज का चयन किया जाए. आज के दौर में देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी और प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला केवल बोर्ड के अंकों से नहीं बल्कि अलग-अलग राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के जरिए होता है.
12वीं के बाद किस परीक्षा से कौन से कॉलेज मिलते हैं: इंजीनियरिंग के लिए जेईई, मेडिकल के लिए नीट और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सामान्य स्नातक कोर्स में प्रवेश के लिए सीयूईटी अब छात्रों के करियर का सबसे अहम पड़ाव बन चुके हैं. इन परीक्षाओं के रिजल्ट और काउंसलिंग प्रक्रिया में थोड़ी सी लापरवाही भी अच्छे कॉलेज से वंचित कर सकती है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किस परीक्षा से कौन-कौन से कॉलेज मिलते हैं, अच्छी रैंक कितनी जरूरी है और समय पर सही फैसला लेना क्यों अहम माना जाता है.
जेईई-मेन के बाद अब जोसा काउंसलिंग की बारी : जेईई-मेन परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद अब लाखों छात्रों की नजर जोसा काउंसलिंग पर टिकी हुई है. देशभर के एनआईटी, आईआईआईटी, राज्य सरकार से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों और कई सरकारी तकनीकी संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया इसी काउंसलिंग के जरिए पूरी होती है.

इस बार जोसा काउंसलिंग 2 जून से शुरू होने जा रही है. ऐसे में छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही कॉलेज और सही ब्रांच का चयन करने की है. विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अच्छी रैंक हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि काउंसलिंग के दौरान समझदारी से चॉइस फिल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है.
इंजीनियरिंग में करियर बनाना चाहते हैं: इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने वाली संस्था के शिक्षक पीयूष कुमार ने बताया कि जोसा काउंसलिंग इंजीनियरिंग एडमिशन की सबसे अहम प्रक्रिया होती है. उन्होंने कहा कि चाहे एनआईटी हो, आईआईआईटी हो या राज्य सरकार से संबद्ध कोई इंजीनियरिंग कॉलेज, इन संस्थानों में प्रवेश के लिए जेईई-मेन में शामिल होना और जोसा काउंसलिंग में भाग लेना अनिवार्य होता है.
''कई छात्र अच्छे अंक लाने के बावजूद काउंसलिंग में सही रणनीति नहीं बना पाते, जिसकी वजह से उन्हें बेहतर कॉलेज या मनचाहा ब्रांच नहीं मिल पाता. मॉक राउंड पूरा होने के बाद फाइनल चॉइस फिलिंग और सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू होती है.''- पीयूष कुमार, शिक्षक
रैंक और परसेंटाइल के आधार पर कॉलेज: पीयूष कुमार ने बताया कि जोसा काउंसलिंग की शुरुआत मॉक राउंड से होती है. यह छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण चरण माना जाता है. इस दौरान छात्र अपनी पसंद के कॉलेज और ब्रांच की प्राथमिकता तय करते हैं. मॉक राउंड से छात्रों को यह समझने का मौका मिलता है कि उनकी रैंक और परसेंटाइल के आधार पर कौन-कौन से कॉलेज और ब्रांच मिलने की संभावना है. इसके साथ ही छात्र यह भी तय कर पाते हैं कि किस कॉलेज को ऊपर रखना है और किसे नीचे.
पहला विकल्प और दूसरा विकल्प: पीयूष कुमार ने उदाहरण देते हुए बताया कि अगर किसी छात्र की ऑल इंडिया रैंक करीब 5000 है और वह सामान्य श्रेणी से आता है, तो उसके सामने दो तरह के विकल्प हो सकते हैं. पहला विकल्प यह कि वह किसी टियर-1 एनआईटी में इलेक्ट्रिकल जैसे ब्रांच का चयन करे. दूसरा विकल्प यह कि वह टियर-2 संस्थान में कंप्यूटर साइंस या मैकेनिकल ब्रांच चुने.
टियर-1 संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट: ऐसे में अधिकतर छात्र ब्रांच की तुलना में कॉलेज को प्राथमिकता देते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह प्लेसमेंट और एक्सपोजर है. टियर-1 संस्थानों में बड़ी कंपनियां ज्यादा संख्या में कैंपस प्लेसमेंट के लिए पहुंचती हैं, जबकि टियर-2 कॉलेजों में अवसर अपेाकृत कम होते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कॉलेज और ब्रांच का अंतिम चयन पूरी तरह छात्र की रुचि और करियर लक्ष्य पर निर्भर करता है.
एनआईटी का बेहतर प्रदर्शन: पीयूष कुमार ने कहा कि देश के कुछ प्रमुख एनआईटी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि एनआईटी तिरुचिरापल्ली, वारंगल, कालीकट, सूरत और सिलचर जैसे संस्थानों को टॉप एनआईटी की श्रेणी में रखा जाता है. इन संस्थानों में सामान्य तौर पर प्लेसमेंट पैकेज 20 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच जाता है. वहीं पटना, भोपाल और जालंधर जैसे एनआईटी को टियर-2 श्रेणी में माना जाता है. इसके अलावा पूर्वोत्तर और कुछ नए खुले एनआईटी अभी विकास के चरण में हैं और उन्हें टियर-3 श्रेणी में रखा जाता है.
टॉप एनआईटी नहीं मिल रहा तो.. क्या करें?: पीयूष कुमार ने छात्रों को आईआईआईटी को लेकर भी महत्वपूर्ण सलाह दी. पीयूष कुमार ने कहा कि कई छात्र यह मान लेते हैं कि अगर टॉप एनआईटी नहीं मिल रहा तो आईआईआईटी को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए, जबकि ऐसा नहीं है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आईआईआईटी हैदराबाद देश के कई एनआईटी से बेहतर माना जाता है और वहां का प्लेसमेंट रिकॉर्ड भी काफी मजबूत है. ऐसे में छात्रों को केवल नाम देखकर नहीं बल्कि संस्थान के एकेडमिक माहौल, रिसर्च, फैकल्टी और प्लेसमेंट रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए.
''बिहार के छात्रों के लिए राज्य में भी अच्छे अवसर मौजूद हैं. बिहार सरकार के 38 जिलों में मौजूद सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी जोसा काउंसलिंग के माध्यम से दाखिला होता है. सबसे बड़ी बात है कि यहां एकेडमिक फीस काफी कम है और कई प्राइवेट कॉलेज से बेहतर है. ऐसे में छात्रों को अपनी रैंक के अनुसार सोच-समझकर कॉलेज और ब्रांच की प्राथमिकता तय करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आवेदन भरते समय जल्दबाजी करने के बजाय पिछले वर्षों के कटऑफ, प्लेसमेंट और कॉलेज की स्थिति का अध्ययन करना जरूरी है.''- पीयूष कुमार, शिक्षक
पीयूष कुमार ने कहा कि इस बार जोसा काउंसलिंग के जरिए करीब 62800 सीटों पर एडमिशन होगा. इसमें देशभर के सभी एनआईटी, आईआईआईटी और कई सरकारी इंजीनियरिंग संस्थान शामिल हैं. उन्होंने बताया कि काउंसलिंग प्रक्रिया के अंत में स्पॉट राउंड भी आयोजित होता है. इस दौरान पहले के राउंड में खाली बची सीटों पर एडमिशन दिया जाता है. हालांकि स्पॉट राउंड में शामिल होने पर छात्रों को पहले से मिली सीट छोड़नी पड़ती है. ऐसे में कई बार बेहतर कॉलेज या बेहतर ब्रांच मिल जाती है, लेकिन जोखिम यह भी रहता है कि पहले से कमजोर विकल्प हाथ लग जाए. इसलिए छात्रों को हर चरण में सोच-समझकर फैसला लेने की जरूरत होती है.
डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए NEET: मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे लाखों छात्रों के लिए नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित होने जा रही है. इसी परीक्षा के जरिए देशभर के मेडिकल, डेंटल और आयुष कॉलेजों में दाखिला होता है. परीक्षा को लेकर छात्रों में उत्साह के साथ-साथ दबाव भी देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अब छात्रों को पुराने तनाव और विवादों को भूलकर पूरी गंभीरता के साथ अंतिम तैयारी पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही परीक्षा उनके करियर की दिशा तय करती है.
छात्रों की पहली पसंद दिल्ली एम्स: मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने वाले शिक्षक विपिन योगी ने कहा कि छात्रों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि जो समय बीत गया उसे भूलकर अब पूरी ऊर्जा के साथ परीक्षा की तैयारी करें. उन्होंने कहा कि बायोलॉजी के छात्रों के लिए नीट परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी के आधार पर मेडिकल फील्ड में आगे के अधिकांश रास्ते तय होते हैं. अच्छे अंक हासिल करने वाले छात्रों को देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट मिलती है, जबकि टॉप रैंक हासिल करने वाले छात्रों की पहली पसंद दिल्ली एम्स और अन्य प्रमुख एम्स संस्थान होते हैं.

''देशभर में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की लगभग 55 हजार सीटें उपलब्ध हैं, जबकि लगभग इतनी ही सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में भी हैं. इस तरह कुल मिलाकर एमबीबीएस की करीब 1.10 लाख सीटों पर दाखिला होता है. इसके अलावा इसी परीक्षा के आधार पर बीडीएस यानी डेंटल कोर्स में एडमिशन मिलता है. वहीं आयुष पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश नीट के जरिए ही होता है. आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसे कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्र भी आगे चलकर डॉक्टर बनते हैं.''- विपिन योगी, शिक्षक
कई संस्थानों में बीएससी नर्सिंग, फिजियोथेरेपी जैसे कोर्स: विपिन योगी ने बताया कि अब कई संस्थानों में बीएससी नर्सिंग और फिजियोथेरेपी जैसे कोर्सों में भी नीट स्कोर को महत्व दिया जा रहा है. इसके अलावा जो छात्र विदेश जाकर एमबीबीएस करना चाहते हैं, उनके लिए भी नीट परीक्षा क्वालीफाई करना अनिवार्य होता है. यानी विदेश में मेडिकल पढ़ाई का रास्ता भी नीट से होकर गुजरता है.
गुजरात के मेडिकल कॉलेज भी बेहतर: कॉलेज चयन को लेकर विपिन योगी ने कहा कि मेडिकल क्षेत्र में एम्स संस्थानों को सबसे बेहतर माना जाता है. देशभर के छात्र अलग-अलग एम्स को प्राथमिकता देते हैं और टॉप रैंक वाले छात्र पहले ही इन सीटों को सुरक्षित कर लेते हैं. इसके बाद मुंबई, दिल्ली और अन्य बड़े महानगरों के मेडिकल कॉलेज छात्रों की पसंद बनते हैं. उन्होंने कहा कि गुजरात के मेडिकल कॉलेज भी बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के कारण काफी लोकप्रिय माने जाते हैं.
कॉलेज चयन के लिए केवल रैंक न देखें: विपिन योगी ने छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि कॉलेज चयन केवल रैंक के आधार पर नहीं करना चाहिए, बल्कि राज्य और वहां की नीतियों को भी समझना जरूरी है. मेडिकल शिक्षा में जिस राज्य से छात्र एमबीबीएस करता है, वही उसका गृह राज्य माना जाता है. आगे पीजी मेडिकल प्रवेश में स्टेट कोटा और अन्य लाभ उसी राज्य के आधार पर मिलते हैं.
''ऐसे में छात्रों को यह जरूर देखना चाहिए कि जिस राज्य में वे दाखिला ले रहे हैं वहां भविष्य में अवसर कितने हैं. सरकारी बॉन्ड की शर्तें क्या हैं और सेवा संबंधी नियम उनके लिए कितने अनुकूल हैं.'' - विपिन योगी, शिक्षक
राज्यों में अनिवार्य सेवा बॉन्ड और अलग-अलग नियम लागू: शिक्षक विपिन योगी ने कहा कि कई राज्यों में मेडिकल छात्रों के लिए अनिवार्य सेवा बॉन्ड और अलग-अलग नियम लागू होते हैं. इसलिए छात्रों और अभिभावकों को केवल कॉलेज का नाम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए, बल्कि सभी टर्म्स एंड कंडीशन को ध्यान से समझकर ही अंतिम निर्णय लेना चाहिए.
CUET से देश की बड़ी यूनिवर्सिटियों में दाखिले का मौका : देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल हो चुका सीयूईटी यानी कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट अब लाखों छात्रों के लिए प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों तक पहुंच का प्रमुख माध्यम बन गया है. पहले जहां अलग-अलग विश्वविद्यालय अपनी अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते थे, वहीं अब एक ही परीक्षा के जरिए छात्र देश की 250 से अधिक केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों में दाखिले का अवसर पा रहे हैं.
इन कॉलेजों में मिलेगा एडमिशन: खास बात यह है कि दिल्ली विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान भी अब सीयूईटी स्कोर के आधार पर प्रवेश दे रहे हैं. शिक्षक प्रकाश तिवारी ने बताया कि इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने सीयूईटी परीक्षा में हिस्सा लिया है और अब रिजल्ट कुछ ही दिनों में आने वाला है. ऐसे में छात्रों को आगे की प्रक्रिया को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है.
''रिजल्ट घोषित होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण रजिस्ट्रेशन और चॉइस फिलिंग का होता है. इसी प्रक्रिया के तहत छात्रों को अपने आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होते हैं. इसमें 10वीं और 12वीं की मार्कशीट के साथ पहचान पत्र भी जमा करना जरूरी होता है.''- प्रकाश तिवारी, शिक्षक
CUET के जरिए लोकप्रिय कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं: प्रकाश तिवारी ने कहा कि विज्ञान संकाय के छात्रों के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का विज्ञान संस्थान, हैदराबाद विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज तथा मिरांडा हाउस काफी लोकप्रिय संस्थान माने जाते हैं. यहां भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, जैव प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर विज्ञान जैसे विषयों में बेहतर प्रयोगशाला, शोध और अकादमिक माहौल उपलब्ध है. यही वजह है कि विज्ञान के मेधावी छात्र इन संस्थानों को प्राथमिकता देते हैं.
''कला और मानविकी विषयों के छात्रों के बीच जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय सबसे प्रतिष्ठित विकल्पों में शामिल है. यहां विदेशी भाषाओं, राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन की पढ़ाई देशभर में प्रसिद्ध मानी जाती है. इसके अलावा मिरांडा हाउस, सेंट स्टीफंस कॉलेज, रामजस कॉलेज, इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वूमेन और दौलत राम कॉलेज भी मानविकी विषयों के छात्रों की पहली पसंद बने हुए हैं. इसके अलावा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, पांडिचेरी विश्वविद्यालय और विश्वभारती विश्वविद्यालय भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.'' - प्रकाश तिवारी, शिक्षक

दिल्ली विश्वविद्यालय सबसे अधिक लोकप्रिय: प्रकाश तिवारी ने बताया कि वाणिज्य संकाय के छात्रों के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय सबसे अधिक लोकप्रिय माना जाता है. यहां के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज और किरोड़ीमल कॉलेज देश के शीर्ष संस्थानों में गिने जाते हैं. बीकॉम और अर्थशास्त्र की पढ़ाई के लिए इन कॉलेजों की विशेष पहचान है. यहां का शैक्षणिक माहौल और प्लेसमेंट रिकॉर्ड छात्रों को आकर्षित करता है.
''सीयूईटी के माध्यम से इलाहाबाद विश्वविद्यालय, साउथ बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय और तेजपुर विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में भी दाखिला मिल रहा है. अगर किसी छात्र के अंक अपेक्षा से कम आते हैं तब भी उसके पास अच्छे विश्वविद्यालयों में दाखिले के कई विकल्प मौजूद रहते हैं.'' - प्रकाश तिवारी, शिक्षक
बिहार के छात्रों के लिए ये बेहतर विकल्प: प्रकाश तिवारी ने कहा कि बिहार के छात्रों के बीच कम फीस, बेहतर हॉस्टल सुविधा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अनुकूल माहौल वाले विश्वविद्यालय अधिक लोकप्रिय माने जाते हैं. साउथ बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, डॉक्टर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय और पांडिचेरी विश्वविद्यालय ऐसे विकल्प हैं जहां मध्यम स्कोर पर भी प्रवेश की संभावना बनी रहती है. उन्होंने कहा कि यदि छात्र बेहतर काउंसलिंग रणनीति अपनाएं तो औसत सीयूईटी स्कोर पर भी प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सीट हासिल की जा सकती है.
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