JEE MAIN 2026: दो साल से कोटा में जमे रहे, मां-भाई के साथ हर त्यौहार यहीं मनाया...तब टॉपर बना चिरंजीब
ओडिशा के चिरंजीब 100 परसेंटाइल के साथ टॉपर रहे. 2 साल से कोटा में तैयारी कर रहे थे. इस दौरान महज चार बार गांव गए.

Published : February 17, 2026 at 2:47 PM IST
कोटा: जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम मेन (JEE MAIN 2026) के जनवरी सेशन में ओडिशा के जाजपुर रोड निवासी चिरंजीब कर 100 परसेंटाइल के साथ टॉपर रहे. वे बीते 2 साल से कोटा में रहकर कोचिंग कर रहे थे. मां बनाकेतकी कर भी बीते 2 वर्ष से अपने छोटे बेटे को लेकर कोटा ही आ गई. छोटे बेटे का एडमिशन भी कोटा में करा दिया, ताकि बड़े बेटे चिरंजीब को आईआईटी में एडमिशन दिला सकें. यहां तक कि 2 साल में केवल चार बार अपने गांव गए. इस दौरान सारे त्योहार कोटा में ही मनाए.
चिरंजीब कर ने ईटीवी भारत से विशेष बातचीत में कहा कि कोटा कोचिंग से दसवीं से ऑनलाइन ही पढ़ाई कर रहा था. मुझे यहां के असाइनमेंट, टीचर, सिस्टम व प्लानिंग काफी बेहतर लगी. 10वीं में 97 प्रतिशत अंक आए. उसके बाद मां व छोट भाई चिरस्मित के साथ कोटा आ गया. चिरस्मित भी कोटा में पढ़ने लगा. उन्होंने कहा कि यहां हर तरफ पढ़ाई का माहौल है. बड़ी संख्या में स्टूडेंट यहां रहते हैं. यहां फैकल्टी के पास जाने के पहले बच्चों से डाउट क्लियर किया जा सकता है. एक दूसरे की मदद से ज्यादा बेहतर समझ में आ जाता है. इससे ज्यादा इंप्रूवमेंट होता है. डिस्ट्रैक्शन के चांस कम हैं. फैकल्टी के अनुभवी मार्गदर्शन, नियमित टेस्ट सिस्टम और अनुशासित अध्ययन वातावरण ही सफलता का आधार है. उनका लक्ष्य आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना है. चिरंजीब के पिता चितरंजन कर टाटा स्टील में कार्यरत हैं, जबकि मां बनाकेतकी गृहणी हैं.
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बेटे के लिए कोटा आई मां: चिरंजीब की मां बनाकेतकी कर ने बताया कि अकेले बच्चे परेशान होते हैं. उनका अप एंड डाउन आता रहता है, लेकिन मैं और इसके पिता दोनों इसे संभालते थे. समझाते थे कि सब कुछ अच्छा होगा. किसी तरह का कोई तनाव मत लो. हमेशा रिलैक्स होकर पढ़ों. अच्छा रिजल्ट इसी का नतीजा है. चिरंजीब हमेशा शेड्यूल फॉलो करता था. डेली रूटीन में ज्यादा बदलाव नहीं रखा. सुबह 7 बजे उठता. सुबह टेस्ट होते थे. फिर दोपहर में क्लास जाता था. लौटने के बाद कैंटीन में खाना खाता. इसके बाद कुछ देर दोस्त्तो के साथ वॉक करता व फिर देर रात तक पढ़ता था. रात 12 बजे सोता था. 'उसके पिता 3 महीने में एक बार आते थे, लेकिन मैं 2 साल से यहां ही हूं. केवल चार बार ओडिशा गई. कोटा में रहकर ही त्यौहार मनाए हैं. बच्चों के लिए यह करना जरूरी था'.
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हंड्रेड परसेंटाइल लाने का टारगेट था?: इस पर चिरंजीब बोले, 'मेरा टारगेट केवल अच्छी पढ़ाई करना था. अच्छा स्कोर दिमाग में था, लेकिन यह 100 परसेंटाइल आ गया. सफलता का श्रेय कोचिंग की फैकल्टी के मार्गदर्शन, नियमित अध्ययन, डेली रूटीन और प्रैक्टिस को है. सही दिशा में मेहनत और समय प्रबंधन सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है'.
आपको भी तनाव फील हुआ?: इस पर बोले, कभी-कभी पढ़ाई के बीच हो जाता था, लेकिन वापस पढ़ाई पर ही फोकस करने से तनाव खत्म हो जाता था. फैकल्टी व पेरेंट्स का सपोर्ट मिल जाता था.
पढाई के लिए स्टूडेंट्स को सलाह: चिरंजीब बोले, तीनों सब्जेक्ट पर बराबर ध्यान दें. किसी सब्जेक्ट को कम नहीं पढ़े. तीनों सब्जेक्ट इक्वली इंर्पोटेंट हैं. जेईई मेन में सफलता के लिए नियमित अध्ययन, कॉन्सेप्ट की गहराई से समझ, निरंतर अभ्यास और समय का सही प्रबंधन जरूरी है.
प्रेशर हेंडल करने के लिए क्या सलाह देंगे?: इस पर चिरंजीब ने कहा कि स्टूडेंट को सलाह है कि मेहनत करते रहें. रिजल्ट अच्छा नहीं आ रहा है, तब भी हार नहीं मानें. सफलता जरूर मिलेगी. कठिन टॉपिक बार-बार अभ्यास और टीचर से बात कर स्ट्रेटजी को समझना जरूरी है.
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