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JDU ने रखा एक करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य, 'मिशन इम्पॉसिबल' को कैसे पॉसिबल करेंगे नीतीश कुमार?

बिहार विधानसभा में ताकत बढ़ने के बाद अब जेडीयू अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाएगा. एक करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य तय किया है. पढ़ें..

Nitish Kumar
नीतीश कुमार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 28, 2025 at 6:15 PM IST

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रिपोर्ट: अविनाश कुमार

पटना: बिहार में जेडीयू ने इस बार एक करोड़ से अधिक सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है. एनडीए की प्रचंड जीत के बाद नीतीश कुमार एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने हैं और उसके बाद उन्होंने ने जेडीयू को बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे बिहार की सभी बड़ी पार्टियों का दावा है कि उसके एक करोड़ से अधिक सदस्य हैं. कांग्रेस और अन्य छोटी पार्टियों का भी दावा है कि उनके भी लाखों की संख्या में सदस्य हैं. हालांकि राजनीतिक जानकार कहते हैं कि इस टार्गेट को हासिल करना आसान नहीं होगा.

एक करोड़ मेंबर पर बीजेपी-आरजेडी का दावा: बिहार में 7 करोड़ 45 लाख वोटर हैं लेकिन राजनीतिक दलों के जो दावे हैं, उसके हिसाब से सभी दलों के सदस्यों की संख्या मिला दें तो यह कुल वोटर के करीब या अधिक भी हो जाएगा. भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है. बिहार में भी भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल एक करोड़ से अधिक सदस्य होने की बात कह रहे हैं तो वहीं राजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद का भी दावा है कि राजद के एक करोड़ 10 लाख सदस्य हैं. जन सुराज का भी ऐसा ही दावा है.

जेडीयू सदस्यता अभियान (ETV Bharat)

जेडीयू का सदस्यता अभियान: अब जेडीयू ने भी एक करोड़ से अधिक सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है और तैयारी शुरू कर दी है. यानी बिहार में करोड़पति सदस्यों की संख्या वाली पार्टियां एक से अधिक होने वाली है. कांग्रेस की तरफ से भी 30 लाख से अधिक सदस्य का दावा किया जा रहा है. लोजपा रामविलास के प्रवक्ता प्रोफेसर विनीत कुमार सिंह की तरफ से भी 30 लाख से अधिक सदस्य होने की बात कही जा रही है.

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एक करोड़ सदस्य का जेडीयू का लक्ष्य (ETV Bharat)

वहीं, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा सेकुलर के प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण की तरफ से भी दावा किया जा रहा है कि 5 लाख से अधिक सदस्य पार्टी के हैं. इसके अलावे बसपा के बिहार प्रभारी सुरेश राव की तरफ से कहा जा रहा है कि 9 लाख से अधिक सदस्य बिहार में बनाए गए हैं. वाम पंथी दलों की बात करें तो सक्रिय सदस्य इनके यहां सीमित होता है लेकिन जन संगठन के सदस्यों की संख्या काफी अधिक होती है और वामपंथी दलों के नेताओं की माने तो यह 50 लाख से अधिक है.

एक करोड़ सदस्य का जेडीयू का लक्ष्य: बिहार में नीतीश कुमार ने 2025 से 2028 तक के लिए सदस्यता अभियान की शुरुआत की है. साल 2000 में पिछली बार जब सदस्यता अभियान चलाया गया तो लक्ष्य केवल 50 लाख का रखा गया लेकिन इस बार उसे बढ़ाकर दोगुना यानी एक करोड़ से अधिक कर दिया गया है. जेडीयू प्रवक्ता अरविंद निषाद का कहना है कि बिहार में विधानसभा चुनाव में एनडीए को जबरदस्त जीत मिली है और नीतीश कुमार के नेतृत्व में फिर से सरकार बनी है. हम लोगों ने एक करोड़ से अधिक सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है, उस पर तेजी से काम हो रहा है.

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (ETV Bharat)

"बिहार में पहले भी जदयू बड़ी पार्टी रही है. 2025 विधानसभा चुनाव के बाद इस बार भी नीतीश कुमार ही सीएम हैं. इसलिए इस बार भी जदयू सदस्यों के मामले में बड़ी पार्टी बनेगी और एक करोड़ से अधिक सदस्य इस बार हम लोग बनाएंगे. आरजेडी तो केवल दावा ही करती है, इसलिए जनता ने उसे जीरो पर पहुंचा दिया है."- अरविंद निषाद, प्रवक्ता, जनता दल यूनाइटेड

क्या बोले आरजेडी प्रवक्ता?: वहीं आरजेडी का दावा है कि बिहार में बड़ी पार्टी राजद है. प्रवक्ता एजाज अहमद का कहना है कि हम लोग लोगों के बीच में जाकर उन्हें सदस्य बनाते हैं. लालू प्रसाद यादव की विचारधारा और तेजस्वी यादव के किए गए कार्यों के आधार पर हम लोग सदस्य बनाते हैं, ऑनलाइन और कागजों में नहीं. वे कहते हैं कि बीजेपी और जेडीयू ऑनलाइन और कागजों में सदस्य बनाती रही है.

"एक करोड़ 10 लाख से ऊपर के राजद के सदस्य बने हैं. लालू यादव जी की विचारधारा और तेजस्वी यादव जी के कार्यों के कारण सदस्यों के मामलों में हमारी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी है. मीडिया और मशीनरी मैनेजमेंट की बदौलत जदयू बड़े-बड़े दावे कर रहा है, जबकि सच्चाई है कि धरातल पर पार्टी कहीं नहीं दिखती."- एजाज अहमद, प्रवक्ता, राष्ट्रीय जनता दल

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संजय झा के साथ नीतीश कुमार (ETV Bharat)

दावों में कितना दम?: राजनीतिक विशेषज्ञ प्रिय रंजन भारती का कहना है कि बिहार में जितने वोटर हैं, यदि सभी दलों के सदस्यों की संख्या को जोड़ दें तो वह कुल वोटर के आसपास पहुंच जाएगा या उससे अधिक भी हो सकता है. ऐसे में यह तो कहीं से भी संभव नहीं दिखता है, क्योंकि जितने वोटर हैं सभी सदस्य नहीं बनते हैं. उसमें से 50% के करीब ही सभी दल के सदस्य के रूप में शामिल होंगे. इसका मतलब तो यही है कि एक से अधिक दलों का सदस्य लोग बन जा रहे हैं.

"बिहार में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है. सांगठनिक स्तर पर भी बीजेपी काफी मजबूत है. बिहार विधानसभा चुनाव में जो रिजल्ट मिला है, उसके आधार पर भी देखा जा सकता है. वहीं आरजेडी का भी बड़ा वोट बैंक है तो उसका भी संगठन ठीक है. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू 20 साल से सत्ता में है तो संगठन को बढ़ाने का पूरा मौका मिला है लेकिन अन्य दलों की बात करें तो बिहार में बहुत ज्यादा उनका जनाधार नहीं है. कई राष्ट्रीय पार्टी की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है."- प्रिय रंजन भारती, राजनीतिक विशेषज्ञ

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रैली में नीतीश कुमार (ETV Bharat)

क्या कहते हैं जानकार?: वहीं, राजनीतिक विशेषज्ञ सुनील पांडे का कहना है कि चुनाव में जीतने वाले सीटों के आधार पर सदस्यता अभियान का आकलन नहीं किया जा सकता है. गठबंधन में मिले वोटों के आधार पर भी किसी पार्टी के सदस्यता अभियान का आकलन करना संभव नहीं है. इस बार विधानसभा चुनाव में आरजेडी को सबसे अधिक वोट मिला है लेकिन सीटों के मामले में तीसरे नंबर पर है. जिस पार्टी का संगठन जितना मजबूत होगा, मेंबरशिप उसके उतने अधिक होंगे. बीजेपी इस मामले में सबसे अधिक काम करती है.

"राजद और जदयू ने भी बिहार में अपनी ताकत बढ़ाने की पूरी कोशिश की है. एक करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य अब सभी बड़े दलों के तरफ से रखा जा रहा है. पहले बीजेपी और उसके बाद फिर राजद ने इस लक्ष्य को रखा था और एक करोड़ से अधिक सदस्य बनाने का दावा भी उनके तरफ से होता है. अब नीतीश कुमार भी एक करोड़ से अधिक सदस्य बनाने का लक्ष्य रखे हैं तो मकसद एक ही है. सदस्यों की संख्या के हिसाब से बड़ी पार्टी बनाना है और उसी की लड़ाई है बिहार में."- सुनील पांडे, राजनीतिक विशेषज्ञ

नीतीश कुमार के कई सपने अधूरे: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना है जेीयू को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाना लेकिन यह सपना अब तक पूरा नहीं हुआ है. वहीं बिहार में जेडीयू को एक बार फिर से नंबर एक पार्टी बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं और उस पर काम भी शुरू हो गया है. अब देखना है कि एक करोड़ से अधिक जो लक्ष्य रखा गया है, उसे कैसे पूरा किया जाता है. ऐसे इस बार जेडीयू का लक्ष्य महिलाओं और युवाओं को अधिक से अधिक पार्टी में जोड़ने की है, क्योंकि महिलाओं का सबसे अधिक वोट मिला है. सदस्यता अभियान में पार्टी के शीर्ष नेता लगे हुए हैं.

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जेडीयू दफ्तर में नीतीश कुमार (ETV Bharat)

विधानसभा में बढ़ी जेडीयू की ताकत: हालिया विधानसभा चुनाव में जेडीयू की ताकत दोगुनी हो गई है. 2020 में 43 सीटों पर जीतने वाली पार्टी के 2025 में 85 विधायक हैं और विधानसभा में दूसरी बड़ी पार्टी है. वहीं 2024 में 12 लोकसभा सांसद जीते थे.

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