कोर्ट की खबरें: न्यू सांगानेर रोड से वंदेमातरम सर्किल तक जेडीए 80 फीट चौड़ी रोड बनाए, अस्पतालों के लिए बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
अदालत ने दोनों ओर तीन-तीन मीटर की जगह छोड़ते हुए याचिका के निस्तारण तक इसका उपयोग किसी को नहीं करने को कहा है.


Published : July 3, 2026 at 8:58 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सेंट एंसलम स्कूल, न्यू सांगानेर रोड से वंदेमातरम सर्किल तक जाने वाली 1850 मीटर लंबी प्रस्तावित 100 फीट चौड़ी रोड के मामले में जेडीए को निर्देश दिया है कि वह दोनों ओर से 40-40 फीट दूरी नापकर 80 फीट चौडी रोड बनाए. वहीं इस रोड के निर्माण में कोई रुकावट आए, तो जेडीए अफसर उसे हटाने के लिए स्वतंत्र हैं. अदालत ने दोनों ओर तीन-तीन मीटर की जगह छोड़ते हुए याचिका के निस्तारण तक इसका उपयोग किसी को नहीं करने को कहा है. अदालत ने जेडीए से 15 दिन में पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है. जस्टिस आनंद शर्मा ने यह अंतरिम आदेश बजरंग पंवार व अन्य की याचिकाओं पर दिया.
याचिकाओं में जेडीए अपीलेट ट्रिब्यूनल के 27 मई, 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें ट्रिब्यूनल ने 15 जुलाई, 2025 की बीपीसी एलपी की मीटिंग में लिए निर्णय को चुनौती देने वाला प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था. प्रार्थियों ने कहा कि यहां 100 फीट चौड़ी रोड का निर्माण होना है और केवल मुद्दा अलाइमेंट का ही है. पिछले 20 साल में रोड की चौड़ाई और अलाइमेंट कई बार बदला है.
पढ़ें: अतिक्रमण हटाकर न्यू सांगानेर रोड से वंदेमातरम सर्किल तक बनाएं सौ फीट चौड़ी रोड- हाईकोर्ट
इसके जवाब में जेडीए के अधिवक्ता अमित कुडी ने कहा कि पूर्व में यहां रोड 200 फीट चौड़ी थी. सहकारी समितियों की अनधिकृत स्कीमों के चलते यहां बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हुए. ऐसे में जनहित को देखते हुए जेडीए ने रोड की चौड़ाई को 200 फीट से घटाकर 100 फीट कर दी. इसे बीपीसी एलपी की मीटिंग में भी अनुमोदित कर दिया और जेडीए अपीलेट ट्रिब्यूनल ने भी बरकरार रखा है. जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने मौके पर अस्सी फीट चौड़ी रोड बनाने को कहा है.
पढ़ें: Rajasthan High Court: मानसरोवर से मान्यावास जाने वाली सौ फीट चौड़ी रोड का तीन माह में करें निर्माण
अस्पतालों की बुनियादी सुविधाओं को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?: राजस्थान हाईकोर्ट ने चिकित्सा सचिव को शपथ पत्र पेश कर बताने को कहा है कि अस्पतालों के लिए बुनियादी सुविधाओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं. इसके साथ ही अदालत ने याचिका की कॉपी अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह को सौंपते हुए 19 अगस्त कर जवाब तलब किया है. एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश असीम सिमलोट की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए.
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि अस्पतालों में बुनियादी सुविधा और मानकों की पालना नहीं की जा रही है. इसके तहत भारतीय स्वास्थ्य मानक बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स और फायर सुरक्षा मापदंड शामिल हैं. याचिका में कहा गया कि सीएजी की साल 2024 की रिपोर्ट में भी इस संबंध में स्पष्ट कमियां बताई गई हैं, लेकिन फिर भी राज्य सरकार की ओर से मामले में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा. इसके चलते सरकारी दवाओं के सेवन से मौत और अस्पताल में आग लगने की घटनाएं हुई.
इसके अलावा अस्पतालों में चिकित्सीय लापरवाही के पीड़ितों के लिए एक समान मुआवजा नीति नहीं होने से प्रभावितों के साथ असमान व्यवहार होता है. याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने स्वयं एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर का दौरा किया था. जिसमें टूटी छत सहित अन्य मूलभूत कमियां मिली. जिससे साबित है कि अस्पताल में सुरक्षा मानकों सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को पूरा नहीं किया जा रहा है. जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने चिकित्सा सचिव से इस संबंध में उठाए कदमों की जानकारी मांगते हुए राज्य सरकार से जवाब पेश करने को कहा है.

