जांजगीर के खोखरा धान खरीदी केंद्र में टोकन नहीं कटने से किसानों का फूटा गुस्सा, न तौल हुआ न अंदर का धान परिवहन
धान खरीदी में हो रही अव्यवस्था पर किसानों का प्रदर्शन, केंद्र में खरीदी नहीं होने दी, साथ ही परिवहन पर भी रोक लगा दी.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 5, 2026 at 4:29 PM IST
जांजगीर-चाम्पा: राज्य सरकार ने धान खरीदी की तिथि दो दिन बढ़ा दी है, इसके बावजूद किसानों की समस्याएं कम नहीं हो पाई हैं. जांजगीर-चाम्पा जिले के खोखरा धान खरीदी केंद्र में बुधवार सुबह से किसानों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. किसानों ने मुख्य गेट पर बैठकर टोकन नहीं कटने को लेकर नाराज़गी जताई.
धान खरीदी और परिवहन पूरी तरह रोका
धरना प्रदर्शन के दौरान किसानों ने धान खरीदी केंद्र में धान की खरीदी नहीं होने दी, साथ ही धान के परिवहन पर भी रोक लगा दी. इससे पूरे केंद्र का कामकाज प्रभावित हो गया. किसानों के प्रदर्शन की सूचना मिलने पर तहसीलदार और पुलिस टीम मौके पर पहुंची. अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की और धान खरीदी बाधित न करने की अपील की, लेकिन किसान समस्याओं का समाधान होने तक धरना जारी रखने पर अड़े रहे.

समय बढ़ने के बाद भी नहीं कटा टोकन
धान खरीदी की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद किसान काफी निराश थे. बाद में राज्य सरकार ने दो दिन का अतिरिक्त समय दिया और एग्रीस्टेक पोर्टल में दर्ज किसानों का धान खरीदने के आदेश जारी किए. इसके बाद खोखरा गांव के किसान 4 फरवरी से पर्ची लेकर धान खरीदी केंद्र और अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, लेकिन केवल कुछ किसानों का ही टोकन कट पाया.

रात-रात भर भटके किसान
किसानों का कहना है कि टोकन कटवाने के लिए वे देर रात तक अधिकारियों के पास जाते रहे, लेकिन इसके बावजूद उनका टोकन नहीं कटा. इससे नाराज़ होकर किसानों ने आज धान खरीदी केंद्र के सामने धरना शुरू कर दिया.
50 से अधिक किसान अभी भी बचे
खोखरा और धाराशिव गांव के किसानों ने बताया कि अब भी करीब 50 किसान ऐसे हैं, जिनका टोकन नहीं कटा है. किसानों ने कहा कि खेती के लिए उन्होंने कर्ज लिया है, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की फीस भी भरनी है. अगर धान नहीं बिका तो उनके पास कोई रास्ता नहीं बचेगा. कुछ किसानों ने भावुक होकर कहा कि ऐसी हालत में जान देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.

शुरुआत से ही विवादों में रही धान खरीदी
इस वर्ष धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू से ही विवादों में रही. 1 नवंबर से खरीदी शुरू करने का आदेश जारी हुआ लेकिन सहकारी समितियों के आंदोलन से व्यवस्था बिगड़ी. फिर कभी कम आवक के कारण टोकन नहीं कटा कभी सत्यापन के नाम पर टोकन रोक दिया गया. इसका असर यह हुआ कि राज्य के कई जिलों में किसान समय पर धान नहीं बेच पाए. अब समय बढ़ने के बावजूद नाम मात्र किसानों का ही टोकन कट पाया है, जिससे किसान एक बार फिर परेशान हैं.

