'कोसा नगरी' जांजगीर-चांपा में सालभर रेत माफिया का बोलबाला, 2025 में सड़क हादसों ने भी डराया
जांजगीर-चांपा जिले में बदहाल सड़कों, हादसों और रेत माफिया की सक्रियता ने चिंता बढ़ाई. मेडिकल कॉलेज खुलने, पर्यटन, कोसा उत्पादन से अच्छी खबरें भी आईं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 27, 2025 at 4:09 PM IST
जांजगीर-चांपा: जिले में वर्ष 2025 में कई घटनाक्रम हुए, इनमें सबसे ज्यादा सड़क हादसों ने चिंता बढ़ाई. वहीं पर्यटन, स्वास्थ्य और कोसा उत्पादन जैसे क्षेत्र से अच्छी खबर भी सामने आई. ऐसी साल भर की सभी घटनाओं की जानकारी और जिले का अपडेट आपको दे रहा है ETV भारत. एक नजर जिले के उन घटना क्रम पर जो वर्ष 2025 में अहम रहे.
पहली बड़ी स्टोरी
सड़क हादसों में साल भर में 197 मौतें: जांजगीर-चांपा जिला वर्ष 2025 में सड़क हादसों के कारण लगातार चर्चा में रहा. पूरे साल में जिले में 427 सड़क दुर्घटनाएं हुईं. इन हादसों में 197 लोगों की मौत हुई, जबकि 230 लोग घायल हुए. पुलिस विभाग ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई अभियान चलाए. स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी गई. बाइक चालकों को मुफ्त हेलमेट भी बांटे गए. इसके बावजूद हादसों में बड़ी कमी नहीं आ सकी.

इन वजहों से बढ़े हादसे: पुलिस ने 19,500 से ज्यादा वाहन चालकों पर ट्रैफिक नियम तोड़ने पर कार्रवाई की. पुलिस के अनुसार सड़क हादसों के पीछे कई कारण सामने आए तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहन, सड़कों की खराब हालत, हाईवे पर कम रोशनी, शराब पीकर वाहन चलाना, शादी-ब्याह के मौसम में दुर्घटनाएं ज्यादा देखने को मिलीं
नवंबर में पांच लोगों की मौत से दहला जिला: 24 नवंबर की रात नेशनल हाइवे-49 पर बिलासपुर से रायगढ़ जाने वाले मार्ग पर ट्रक और स्कॉर्पियो की जोरदार टक्कर हुई. बारात से लौट रहे 8 लोगों में से 5 की मौके पर मौत हो गई. मृतकों में दो सेना के जवान भी शामिल थे. इस हादसे के बाद प्रशासन ने जिले में 5 ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुरक्षा उपाय शुरू किए.
दूसरी बड़ी स्टोरी
मेडिकल कॉलेज की शुरुआत की प्रक्रिया: जांजगीर-चांपा में मेडिकल कॉलेज खोलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया. जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर कुटरा गांव में शासकीय जमीन चिन्हित की गई है. कॉलेज भवन निर्माण के लिए 357.25 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है. वहीं, 2026 सत्र से 50 सीटों के साथ मेडिकल की पढ़ाई शुरू करने के लिए लाइवलीहुड कॉलेज जिला अस्पताल, जांजगीर को अस्थायी रूप से चुना गया है.

तीसरी बड़ी खबर
पर्यटन को बढ़ावा देने की नई पहल: जिले में पर्यटन की संभावनाओं को लेकर भी इस साल काम हुआ. एशिया का सबसे बड़ा ओपन क्रोकोडाइल पार्क कोटमी सोनार में स्थित है. यहां सैकड़ों मगरमच्छ तालाब में तैरते और किनारे दिखाई देते हैं. तालाब के बीच बने टापू पर प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाल लिया है, जिससे यह जगह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है.
वहीं शिवरीनारायण को माता शबरी का जन्म स्थल माना जाता है. यहां भगवान नर-नारायण का प्राचीन मंदिर और महानदी, जोक और शिवनाथ नदी का त्रिवेणी संगम (गुप्त प्रयाग) स्थित है. जिला प्रशासन ने घाटों के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास की योजना बनाई है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सके.

चौथी बड़ी खबर
सड़कों की जर्जर हालत से परेशान: जांजगीर-चांपा जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस विधायक हैं. विधायकों ने सड़क मरम्मत की मांग को लेकर कई धरना प्रदर्शन किए, लेकिन अब तक ठोस सुधार नहीं हुआ. खराब सड़कों में जांजगीर से पीथमपुर मार्ग, पामगढ़–ससहा रोड, लोहर्सी मोड़ से भुईगांव मार्ग शामिल हैं.

पांचवीं बड़ी खबर
2025 में रेत माफिया का बोलबाला: वर्ष 2025 में जिले में रेत माफिया पूरी तरह हावी रहे. महानदी और हसदेव नदी के रेत घाटों की नीलामी नहीं होने से अवैध उत्खनन और परिवहन चलता रहा. जिले में कुल 24 रेत घाट हैं, जिनमें से अधिकांश में अवैध कारोबार हुआ. रेत माफिया को संरक्षण देने से जुड़े ऑडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया. इसके बाद टास्क फोर्स का गठन, रेत माफियाओं पर कार्रवाई, रेत घाटों की नीलामी शुरू, नीलामी से एक घाट से 1.51 करोड़ रुपये का राजस्व शासन को मिला. इस तरह के कई प्रयास हुए.

छठवीं बड़ी स्टोरी
कोसा उत्पादन से महिलाओं को नया रोजगार: जांजगीर-चांपा जिला को कोसा नगरी के रूप में पहचान मिली है. अब कोसा के साथ-साथ खादी और सूती कपड़ों का निर्माण भी किया जा रहा है. सिवनी गांव की महिलाओं ने घर बैठे रोजगार का रास्ता अपनाया. पहले मजदूरी पर निर्भर महिलाएं अब कोसा, खादी और सूती साड़ियां, जैकेट और दुपट्टे बनाकर व्यापारियों को दे रही हैं.

लगभग 350 से अधिक महिलाएं इस समूह से जुड़ी हैं. हर महिला 8 से 10 हजार रुपये महीने की कमाई कर रही है. महिलाओं द्वारा बनाए गए कपड़े 3,000 से 8,000 रुपये तक में बिकते हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शित किए जाते हैं.
इस तरह जांजगीर-चांपा जिले के लिए कुछ अच्छी कुछ बुरी खबरें सालभर में सामने आईं.

