जन सुराज ने पंचायत से प्रदेश स्तर के संगठन को किया भंग, बिहार चुनाव में हार के बाद पार्टी का फैसला
जन सुराज ने पंचायत से प्रदेश स्तर के संगठन को भंग कर दिया है. चुनाव में हार के बाद पार्टी ने फैसला लिया है.

Published : November 23, 2025 at 2:45 PM IST
पटना:बिहार चुनाव में हार के बाद जन सुराज पार्टी ने बड़े संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है. शनिवार को पटना के शेखपुरा हाउस में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पार्टी ने पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक के पूरे संगठन को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया. अब अगले डेढ़ महीने के भीतर नए सिरे से प्रभावी और सक्रिय संगठनात्मक ढांचा तैयार किया जाएगा. पार्टी के प्रवक्ता सैयद मसीह उद्दीन ने इसकी औपचारिक घोषणा की.
वरिष्ठ नेताओं को प्रमंडलवार दायित्व: प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह अहम फैसला लिया गया. पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी मौजूद थे. पार्टी के अनुसार नए संगठन के गठन तक भंग की गई समिति अपना कार्य जारी रखेगी. संगठन को पुनर्गठित करने के उद्देश्य से पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेताओं को राज्य के सभी 12 प्रमंडलों की जिम्मेदारी सौंप दी है.
अनुशासनहीनता की भी होगी जांच: इन नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने अधीन जिलों में जाकर संगठन की पुनर्समीक्षा करें और नए ढांचे का निर्माण सुनिश्चित करें. यह टीम व्यापक चर्चा कर चुनावी हार के कारणों की पहचान करेगी. साथ ही जिन जिलों या क्षेत्रों में अनुशासनहीनता या भीतरघात हुआ है, उसके लिए जिम्मेदार नेताओं की सूची तैयार कर नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपी जाएगी.

हार की समीक्षा पर 21 दिसंबर को बैठक: जन सुराज पार्टी अब चुनावी नतीजों का गहराई से विश्लेषण करने की तैयारी में है. प्रवक्ता सैयद मसीह उद्दीन ने बताया कि संगठन के पुनर्गठन के साथ-साथ पार्टी नेतृत्व जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के अनुभवों और सुझावों को भी महत्वपूर्ण मानते हुए आगे की रणनीति तैयार करेगा.
"21 दिसंबर को पटना में पार्टी की सामान्य परिषद की बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जिलों के प्रमुख नेताओं से चुनाव संबंधी उनके अनुभवों को विस्तार से सुनेगा. संगठन निर्माण के दौरान सामने आई चुनौतियों और कमजोरियों पर भी खुलकर मंथन होगा. इसके आधार पर आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति का खाका तैयार किया जाएगा." -सैयद मसीह उद्दीन, प्रवक्ता, जन सुराज
पार्टी पुनर्निर्माण की ओर: पार्टी का मानना है कि संगठन को मजबूत बनाकर ही भविष्य की राजनीति में प्रभावी उपस्थिति दर्ज की जा सकती है. इसी उद्देश्य से व्यापक पुनर्गठन अभियान की शुरुआत की गई है. पार्टी भविष्य में ऐसी कार्यशैली विकसित करने पर जोर देगी, जिसमें जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका और ज्यादा मजबूत हो तथा निर्णय प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बन सके.
भीतर घात करने वालों की होगी पहचान: जन सुराज की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में यह भी साफ संकेत दिया गया कि आने वाले समय में पार्टी अनुशासन और जवाबदेही को प्राथमिकता देगी. जिन नेताओं ने संगठन के खिलाफ जाकर काम किया है या चुनाव के समय पार्टी को नुकसान पहुंचाया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की पूरी संभावना है.
नई राजनीतिक सफर की शुरुआत: पार्टी अब डेढ़ महीने के अंदर एक नई टीम और नई संरचना के साथ अगले राजनीतिक सफर की शुरुआत करने के लिए तैयार हो रही है. नए ढांचे में युवाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को ज्यादा स्थान देने की भी चर्चा है. संगठन को गांव से राजधानी तक एक मजबूत इकाई के रूप में खड़ा करने की रणनीति इस पूरे अभियान का मुख्य लक्ष्य है.
236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त: बिहार चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी ने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ी, लेकिन खाता नहीं खुल सका. 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी. कई सीटों से प्रत्याशी नामांकन वापस ले लिए थे. चुनाव आयोग के आकड़ा के अनुसार 35 सीटों पर जन सुराज को अच्छी वोट मिली. इससे एनडीए और महागठबंधन को काफी नुकसान हुआ.
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