इंदौर में दूषित पानी से मौत के बाद हिमाचल में हड़कंप, जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को सरकार का बड़ा आदेश
हिमाचल प्रदेश में जल शक्ति विभाग ने अधिकारियों को फील्ड में उतरकर ये काम करने के निर्देश दिए हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 5, 2026 at 6:58 PM IST
शिमला: मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 16 लोगों की मौत का आरोप है. इस घटना के बाद से मध्य प्रदेश समेत देश भर पीने के पानी पर राजनीति तेज हो गई है. इसी घटना के बाद हिमाचल जल शक्ति विभाग में हड़कंप मच गया है. हिमाचल में हर घर में नल से स्वच्छ जल उपलब्ध कराने को लेकर सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है. राज्य सरकार ने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के लिए बड़ा आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब कार्यालयों तक सीमित रहने के बजाय उन्हें स्वयं फील्ड में उतरना होगा.
सूबे की सरकार ने जल स्रोतों, भंडारण टैंकों और आपूर्ति व्यवस्था का नियमित निरीक्षण अनिवार्य कर दिया है, ताकि जमीनी स्तर पर समस्याओं की पहचान कर समय रहते समाधान किया जा सके. जल शक्ति विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने शिमला में आज प्रदेश में पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने सभी फील्ड अधिकारियों को हर दस दिन में पेयजल स्रोतों और जल भंडारण टैंकों का निरीक्षण कर नियमित रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए. उन्होंने ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, खंड रिसोर्स पर्सन और फील्ड स्टाफ को नालों, खड्डों, झरने और अन्य स्रोतों की जांच करने और फील्ड टेस्ट किट से पानी की गुणवत्ता जांचने को कहा.
जल शक्ति विभाग के सचिव ने सभी सफ़ाई और सुधार कार्य 15 दिन के भीतर पूरे करने और जल शोधन संयंत्रों और मल निकासी संयंत्रों की नियमित जांच करने और रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए. उन्होंने जनता से जल स्रोतों की सुरक्षा में सहयोग की अपील की. उन्होंने कहा कि, ज़रूरत पड़ने पर लोग खुद भी पानी के नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं में दे सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि स्रोत पर ही प्रदूषण रोकना सबसे सस्ता और टिकाऊ समाधान है. उन्होंने पानी की पाइप लाइनों में रिसाव पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए. उन्होंने कहा कि जल शक्ति मंत्री मुकेश अग्निहोत्री खुद विभाग की पेयजल और अन्य योजनाओं की नियमित निगरानी कर रहे हैं.
17,632 गांव में नल से पहुंच रहा जल
जल शक्ति विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने 'फिक्स इट लेटर' की धारणा को छोड़कर, समय रहते रोकथाम और ज़िम्मेदार प्रबंधन अपनाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जब समाज को पानी के महत्व को नए सिरे से समझने की आवश्यकता है. लोगों को ‘फिक्स इट लेटर’ का रवैया छोड़कर समय रहते जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन की ज़िम्मेदारी सामूहिक रूप से अपनानी होगी. इस बैठक में अवगत करवाया कि ग्रामीण क्षेत्रों के 17,632 गांवों में हर घर को नल से जल उपलब्ध करवाया जा चुका है. प्रदेश में जल गुणवत्ता की जांच के लिए 72 प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, जिनमें ज़िला, उप-मंडल और एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला शामिल है.
इस अवसर पर जल शक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता अंजू शर्मा ने कहा कि दिसंबर तक ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के कुल 2,16,382 नमूने एकत्रित किए गए हैं. जिनमें से केवल 5 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे. इसके अलावा, 1,71,250 नमूनों की जांच फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीकेएस) के माध्यम से की गई. विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में 21,392 पेयजल स्रोतों और 15,611 गांवों के पानी के नमूने जांचे और 18,784 पेयजल स्रोतों के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण किए. यह कार्य ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर्स (बीआरसी), जमीनी स्तर की फील्ड टीमों और ग्राम जल स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) के माध्यम से किया गया. (बीआरसी), जमीनी स्तर की फील्ड टीमों और ग्राम जल स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) के माध्यम से किया गया.
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