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कैच द रेन कैंपेन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल, जल संचय जन भागीदारी में किया कमाल

छत्तीसगढ़ ने जल संचय जन भागीदारी के तहत बारिश की हर बूंद सहेजने में अहम स्थान हासिल किया है.

Chhattisgarh Water Conservation
छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण में किया कमाल (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : September 2, 2026 at 10:58 PM IST

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रायपुर:जल संचय जन भागीदारी और कैच द रेन कैंपेन में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुआ है. राज्य में जल संरक्षण के लिए लगभग 78,000 स्ट्रक्चर तैयार किए गए. इस तरह बारिश की हर बूंद को सहेजने में छत्तीसगढ़ शीर्ष राज्य बना है.

सीएम साय ने छत्तीसगढ़ में अभियान का किया जिक्र

नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में सीएम शामिल हुए.उन्होंने पीएम के सामने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की. सम्मेलन के कैच द रेन सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी. सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल मौजूद रहे.

छत्तीसगढ़ में कैसे सफल हुआ जल संरक्षण ?

सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है. किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है.सीएम ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं. इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है. किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है. यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है. उन्होंने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए 5 प्रतिशत मॉडल का विशेष उल्लेख किया. यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है.

इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं. इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके.

देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ जल संचय जन भागीदारी अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है. यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है- विष्णुदेव साय, सीएम, छत्तीसगढ़

JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में किया टॉप

जल संचय जन भागीदारी अभियान के प्रथम चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं. इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा. दूसरे चरण JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं. इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है. इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया. अब तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है. इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है. जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है. जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं.

यह उपलब्धि बताती है कि जब शासन की योजनाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य को भी जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है. छत्तीसगढ़ जल संरक्षण के अपने अनुभवों, नवाचारों और सफल मॉडलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है.- विष्णुदेव साय, सीएम, छत्तीसगढ़

कैच द रेन अभियान में छत्तीसगढ़ का कमाल

कैच द रेन, जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’के संदेश को छत्तीसगढ़ ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप धरातल पर उतारा है. प्रदेश की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की आवश्यकता और जल उपलब्धता के अनुसार जल संचयन तथा भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही है. बारिश का अधिकतम पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोका जाए. इससे न केवल भू-जल के स्तर को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सिंचाई, पेयजल और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए जल उपलब्धता को भी बेहतर बनाया जा सकेगा. छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है. साथ ही पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है.

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