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संघर्ष से भरी है बिहार की पहली 'जल क्रांति दीदी' की कहानी, जल संग्रहण पर कर रहीं काम

जल क्रांति दीदी जो केन्द्रीय-जल-शक्ति मंत्रालय के मंच पर बिहार की ओर से बात रखने वाली पहली महिला बनीं और देश-प्रदेश का नाम रोशन किया-

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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 7, 2026 at 4:48 PM IST

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बेगूसराय : महिलाओं के लिए प्रेरणा श्रोत बनी 'जल क्रांति वाली दीदी' अपनी सादगी और ओजपूर्ण भाषण से हर किसी को प्रभावित कर रही हैं. यह कहानी है बिहार के बेगूसराय जिले की बछवाड़ा प्रखंड की रहने वाली कामिनी कुमारी की. जिसकी कहानी आज न सिर्फ दूसरों को प्रेरित कर रही है, बल्कि सोशल मिडिया में आज इनकी अलग पहचान बन चुकी है. आज प्यार से इन्हें लोग 'जल क्रांति वाली दीदी' के नाम से पुकारते हैं.

कामिनी कुमारी ने काम से बनाई पहचान : सामाजिक कार्यों के लिए एक NGO का संचालन करने वाली कामिनी की कहानी संघर्षपूर्ण रही है. आज कामनी कुमारी किसी परिचय का मुहताज नहीं हैं. अपनी कार्यशैली से उनकी एक अलग पहचान है. अपने संघर्ष के संबंध में कामनी कुमारी बताती हैं कि एक बार वो अपने संगठन की महिलाओं के साथ प्रशिक्षण लेने देहरादून गयीं थीं, वो प्रशिक्षण रोजगार से सबंधित था. जिसमें प्लास्टिक को कैसे रोजगार के रूप में यूज कर सकते हैं?

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''इस दौरान जब हम लोग देहरादून पहाड़ पर घूमने गयीं तो उन्होंने देखा कि जगह-जगह एक होल बना हुआ था. जानकारी लेने पर पता चला की यहां का जलस्तर नीचे गिर रहा है उसको बचाने के लिए जल छिद्र बनाया गया है. तभी मेरे मन में यह लगा कि जब पहाड़ी इलाके के लोग जल स्तर को बचाने के लिए जब इतनी मेहनत कर सकते हैं तो हम लोग तो समतल भाग में रहने वाले लोग हैं. हम क्यों नहीं कर सकते.''- कामिनी कुमारी, जल क्रांति दीदी

जल संरक्षण में कामिनी का अमूल्य योगदान : कामनी कुमारी ने बताया की बिहार सम्पदा और संसाधन में पूरी तरह परिपूर्ण है, जिसको सिर्फ सहेजने की जरुरत है. वहां से आने के बाद कामिनी कुमारी और उनकी टीम ने जल छिद्र बनाने का काम शुरू किया. कामनी कुमारी ने बताया कि उनके साथ काम करने वाली महिलाएं पढ़ी लिखी नहीं है. इसलिए वो लोग हाथ से डंटे को नाप कर एक होल बना देती हैं. जिसको बना कर महिलाएं काफी खुश होती है. जो महिलाओं के साथ उन्हें भी बहुत अच्छा लगता है. इस काम को उन्होंने देहरादून से सीखा है.

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जल संवर्धन के लिए जागरूक करतीं जल क्रांति दीदी (ETV Bharat)

सरकार ने भी माना लोहा : भारत सरकार द्वारा 2015 में जल क्रांति योजना की शुरुआत की गयीं थी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण और जल प्रबंधन को बढ़ावा देना था. जिससे प्रभावित होकर बेगूसराय की एक महिला ने अपना जीवन इस काम के लिए समर्पित कर दिया. महिला के इस समर्पण का परिणाम यह हुआ कि उस महिला ने देश भर में प्रसिद्धि पाई. इतना ही नहीं इस महिला ने अपने साथ साथ सैकड़ो महिला और पुरुष इस काम के लिए प्रेरित भी किया. संयुक्त प्रयास से जल संरक्षण का उद्देश्य पूरा होने लगा.

जल क्रांति दीदी बनकर रोशन कर रहीं बिहार : जल क्रांति वाली दीदी के साथ जुड़ने से महिलाओं को जिंदगी का एक नया मकसद भी मिला. एक ही बेहद सामान्य परिवार से आने वाली ये महिला देश के बड़े-बड़े मंचों की न सिर्फ शोभा बढ़ा रही है बल्कि बिहार और अपने गावं का नाम भी रौशन कर रही हैं. सामाजिक क्षेत्र के विभिन्न कामों में अपनी भागीदारी निभाने वाली इस महिला की असली पहचान जल संरक्षण के क्षेत्र में किये गए कामों के कारण मिली है.

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जल संवंर्धन के लिए काम करतीं कामिनी कुमारी और लोगों की टीम (ETV Bharat)

'महिलाओं के चेहरे पर खुशी लाने की कोशिश' : कामनी कुमारी ने बताया की महिलाओं के चेहरे पर खुशी लाने के लिए वो लगातार इस काम को कर रही हैं. इस काम को देखकर कई संस्था और लोगों ने उन्हें आर्थिक मदद के रूप में पुरस्कृत किया है. वहीं आरथो ऐंड स्विच होम नामक जो एक बड़ी संस्था है, ने हमारी संस्था को इम्पैक्ट लीडर के रूप में उनका चयन कर उनकी आर्थिक मदद की है. उन्हें यह नहीं पता था कि इस काम में पुरस्कार भी मिलता है. चलते-चलते उन्हें लोगों के द्वारा मदद मिल जाती है. कामनी कुमारी ने बताया की फिलहाल जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें बिहार की बातों को रखने के लिए पूरे देश से उन्हें बुलाया था.

"ये हमारे लिए गौरव की बात थी कि जल शक्ति मंत्रालय के मंच से उन्होंने अपनी बातों को मंच से रखा. हम जल बचाने के लिए छोटा-छोटा प्रयास कर रहे हैं. हमारे द्वारा पौधा लगा कर उनके बीच-बीच में वाटर रिचार्ज पिट बनाते हैं. इससे पानी संग्रहित होकर नीचे जाएगा. हम लोग लोगों को वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने का काम कर रहे हैं. जमीन जितना कम तपेगा उतना ही जल संग्रहित होगा. जलस्तर जो नीचे जा रहा है वो बचेगा."- कामिनी कुमारी, जल क्रांति दीदी

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कामिनी कुमारी, जल क्रांति दीदी (ETV Bharat)

जल संवर्धन पर फोकस : कामिनी कुमारी लोगों को चांपाकल के पास सोख्ता बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं. ताकि पानी बेकार न बहे. वह सीधे जमीन में छनते हुए जल स्रोत को कम न होने दे. उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी ज्यादा नहीं है लेकिन जितना संसाधन और हमारी जानकारी है उसके हिसाब से हम जल संग्रहण में जी-जान से जुटे हैं. उनकी इसी मेहनत और प्रेरणा के आधार पर सरकार भी उनके साथ सहयोग कर रही है. क्योंकि आज दुनिया में सबसे ज्यादा जलस्तर का दोहन हो रहा है लेकिन उसे संवंर्धित करने का काम नहीं हो रहा है.

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