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'असंवैधानिक कानून बनाकर हाईकोर्ट में बार-बार फजीहत करवा रही सुक्खू सरकार', कुलपति नियुक्ति से जुड़े मामले पर जयराम का कटाक्ष

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को कानून का बड़ा जानकार बताते हैं, लेकिन वह खुद बार-बार गलत फैसले ले रहे हैं.

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर (FILE@ETVBHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 28, 2026 at 10:15 PM IST

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शिमला: पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति से जुड़े मामले में अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए सुक्खू सरकार पर कटाक्ष किया है. कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति में सरकार के हस्तक्षेप से जुड़े कानून को उच्च न्यायालय ने रद्द करने के फैसला सुनाया था. अब जयराम ठाकुर ने इसी को लेकर सुक्खू सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लिए जा रहे कई फैसले और बनाए जा रहे कानून न्यायालय की कसौटी पर खरे नहीं उतर रहे हैं.

जयराम ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को कानूनविद और कानून का जानकार बताते हैं, लेकिन इसके बावजूद बार-बार ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनकी न्यायालय में फजीहत हो रही है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय से ही अपनी राजनीति की शुरुआत की थी और शायद इसी कारण वह विश्वविद्यालय से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों को विभाग की तरह संचालित करने की सरकार की कोशिश को उच्च न्यायालय के फैसले से एक बार फिर झटका लगा है.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद को पढ़ा-लिखा और कानून का जानकार बताते हैं, लेकिन विधानसभा में उनकी सरकार की ओर से बनाए जा रहे कानून ‘लॉ ऑफ द लैंड’ की कसौटी पर एक मिनट भी नहीं टिक रहे हैं और उन्हें असंवैधानिक करार दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष विधानसभा के भीतर लगातार सरकार से आगाह करता रहा है कि ऐसे कानून नहीं बनाए जाने चाहिए, जो न्यायिक समीक्षा में टिकने की स्थिति में ही न हों. इससे केवल सरकार की छवि प्रभावित नहीं होती, बल्कि विधानसभा की गरिमा पर भी असर पड़ता है.

जयराम ने कहा कि इससे पहले पूर्व विधायकों की पेंशन समाप्त करने के लिए कानून बनाया गया था, जिसे हाई कोर्ट ने अवैध करार दिया था. इसी तरह कर्मचारियों के प्रमोशन के अधिकार को छीनने के प्रयास को भी न्यायालय ने रद्द कर दिया था. उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों के मामले में भी सरकार को न्यायालय से लगातार झटके लगे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निर्णय लेते समय संवैधानिक सीमाओं और नैतिक मर्यादाओं का ध्यान नहीं रख रही है. मुख्यमंत्री को अपने पद की मर्यादा के साथ-साथ विधानसभा की गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि बहुमत के आधार पर विधानसभा में कानून पारित किया जा सकता है, लेकिन संविधान से ऊपर कोई नहीं है.

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