'आर्थिक संकट के लिए सुक्खू सरकार जिम्मेदार, 3 साल में लिया ₹40 हजार करोड़ कर्ज, फिर भी विकास कार्य ठप'
जयराम ठाकुर ने कहा कि, हिमाचल में पिछले 3 सालों में जब RDG मिल रही थी, तब भी प्रदेश में विकास कार्य बंद थे.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 11, 2026 at 6:20 PM IST
|Updated : February 11, 2026 at 6:41 PM IST
कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट को लेकर सियासत चरम पर पहुंच गई है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वार पलटवार का दौर जारी है. इसी बीचकुल्लू जिले के भुंतर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर समर्पण दिवस कार्यक्रम में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर जमकर हमला बोला है. जयराम ठाकुर ने प्रदेश में आर्थिक संकट को लेकर प्रदेश अब तक रहे कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया.
'हिमाचल में आर्थिक संकट के लिए सुक्खू सरकार जिम्मेदार'
नेता प्रतिपक्ष देना ठाकुर ने कहा कि, रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को लेकर फाइनेंस कमीशन लगातार 11वें और 12 वित्त आयोग कह रहा कि यह अधिकार के रूप में नहीं है और केंद्र सरकार रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट उन राज्यों को दे रही है. जहां पर रेवेन्यू और खर्चे में काफी अंतर है. उसके लिए केंद्र सरकार राज्यों की मदद करता आ रहा है. लेकिन, यह मदद हमेशा के लिए होगी इसको लेकर वित्त आयोग की तरफ से स्पष्ट निर्देश नहीं थे. साल 2017 से लेकर साल 2022 तक प्रदेश में भाजपा की सरकार थी. उस वक्त भी फाइनेंस कमीशन ने 15वें वित्त आयोग के समय रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को बंद करने की बात कही गई थी. उसके बाद कोरोना काल में जब देश प्रदेश की आर्थिक की पूरी तरह से ध्वस्त थी. उस दौरान देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री ने फाइनेंस कमीशन के अपना पक्ष रूप से रखा था. उसके बाद फाइनेंस कमीशन ने यह कहा था कि कंडीशन को पेपर डाउन कर अगले 5 सालों में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रंथ थोड़ा-थोड़ा बंद होगी.
जयराम ठाकुर ने कहा कि, "प्रदेश में पिछले साढ़े 3 सालों से कांग्रेस की सरकार सत्ता पर काबिज है. ऐसे में कांग्रेस सरकार को इस बात को पहले ही समझना चाहिए था कि अब राज्य को रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट नहीं मिलेगी. देश में 17 राज्यों में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद हुई है और देश भर में तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है. कर्नाटक में जब फाइनेंस कमीशन ने सरकार के समक्ष यह बात रखी तो उसमें कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने भी रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने पर सरकार ने समर्थन किया है."
सरकार की गारंटियों के कारण प्रदेश में आर्थिक संकट
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, हिमाचल प्रदेश में पिछले 3 सालों में जब रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट मिल रही थी, तब भी प्रदेश में विकास कार्य बंद थे और ऐसे में अब रेवेन्यू डेफिसिट गार्ड नहीं मिलेगी. उसके बाद फाइनेंस सेक्रेटरी ने जो प्रेजेंटेशन दी है, उसमें प्रदेश में सरकारी सब्सिडी बंद करनी पड़ेगी. सरकार कर्मचारियों के एरियर और डीए भी नहीं दे पाएंगे और प्रदेश में विकास कार्य पूर्ण रूप से बंद करने पड़ेंगे. उसके अलावा प्रदेश में युवाओं को सरकार रोजगार अगले 2 सालों तक नहीं दे पाएगी. ऐसे में बुरे हालात प्रदेश में आर्थिक संकट प्रदेश सरकार की गारंटियों के कारण हुए हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने सूबे की सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा बुजुर्गों को जो पेंशन मिलती है. उसको भी बंद करने की बात कही जा रही है. इसके अलावा प्रदेश में गरीब जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं जैसे हिम केयर, सहारा योजना और बिजली, पानी पर मिलने वाली सब्सिडी भी बंद की जाएगी. लेकिन, प्रदेश सरकार इस आर्थिक संकट में भी प्रदेश में गारंटी को पूरा करने की हर मंच पर घोषणाएं कर रहे हैं.
'सुक्खू सरकार से प्रदेश का जनता परेशान'
जयराम ठाकुर ने कहा कि, मुख्यमंत्री ने 10 दिन पहले कांगड़ा के सुलह में महिलाओं को 31 मार्च से 1500-1500 देने की घोषणा की है. ऐसे में प्रदेश के लोग मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू परेशान हो गए हैं. उन्होंने कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार ने 5 वर्ष में 19500 करोड़ रुपए का ऋण लिया था और पिछले 5 सालों में 2000 से अधिक सरकारी संस्थाओं को खोलकर जनता को घर द्वार पर सुविधाएं प्रदान की थी, जबकि मौजूदा कांग्रेस सरकार ने 3 साल में ही 40000 करोड़ से अधिक रुपए का ऋण लेकर प्रदेश को कर्ज के नीचे डुबो दिया है.
'40 हजार करोड़ कर्ज लेने के बावजूद विकास कार्य ठप'
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, 40000 करोड़ रुपए ऋण लेने के बावजूद भी प्रदेश में पिछले 3 सालों में विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं और सरकार मित्रों और ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग कर रही है. आज प्रदेश में कर्मचारियों को समय पर सैलरी और पेंशनरों को समय पर पेंशन नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने अपने भाषण में कई बार कहा था कि 2027 तक हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भर राज्य बनेगा और 2032 में हिमाचल प्रदेश देश का सबसे अमीर राज्य बनेगा. आखिर मुख्यमंत्री के पास जो फॉर्मूला उन्होंने छुपा के रखा है. उसे इस वक्त प्रदेशवासियों को जाहिर करना चाहिए, क्योंकि इस वक्त प्रदेश को सख्त जरूरत है.
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