OPS बंद नहीं होगी, हमने ऐसा ना सोचा, ना बोला, ना ऐसा करने की जरूरत: जयराम ठाकुर
हिमाचल में ओल्ड पेंशन स्कीम बंद होगी या नहीं? रश्मि राज भारद्वाज की नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से खास बातचीत. रश्मिराज भारद्वाज की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 25, 2026 at 5:37 PM IST
शिमला: हिमाचल भाजपा के कई नेता इन दिनों विजिलेंस जांच का सामना कर रहे हैं. इस पर नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. ईटीवी भारत से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि जब प्रदेश सरकार का चार साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है और अब हम चुनावी वर्ष में जाने वाले हैं, ये लोग काम तो कर नहीं पाए और प्रदेश में सारी योजनाओं पर ताला लगा है. इसलिए चुनाव में ये लोग ऐसा दिखना चाहते हैं कि भाजपा ने भ्रष्टाचार किया है. मात्र बदले की भावना से प्रदेश सरकार ने भाजपा के लगभग 13 विधायकों और पूर्व विधायकों पर केस दर्ज किए हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.
अधिकारियों को जयराम की चेतावनी
जयराम ने कहा कि चाहे मामला बनता है या नहीं, लेकिन मुख्यमंत्री की तरफ से अधिकारियों को एक ही निर्देश है कि भाजपा वालों पर केस दर्ज किए जाएं. क्योंकि चुनाव में हमारी छवि को नुकसान पहुंचे, इसलिए बदले की भावना से ये कार्रवाई की जा रही है. जबकि कांग्रेस के पास चुनाव के लिए कोई मुद्दा नहीं बचा है, क्योंकि उन्होंने न तो काम किया और न ही वादे पूरे किए. उन्होंने कहा कि ऐसा हिमाचल के इतिहास में पहली बार हो रहा है. उन्होंने जांच अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कहीं भी कोई गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ है तो जरूर कार्रवाई करें, लेकिन अगर सरकार के दबाव में अधिकारी काम कर रहे हैं, तो याद रखें कि एक साल बाद सरकार बदल जाएगी और फिर हम उन अधिकारियों पर विचार करेंगे. हम ऐसे अधिकारियों पर जांच बिठाएंगे, जिन्होंने सरकार के दबाव में झूठे मामले दर्ज किए हैं और फिर जांच के बाद उन अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी, जो सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं.
'OPS बंद नहीं होगी, हमने ऐसा ना सोचा, ना बोला'
ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के मुद्दे पर जयराम ठाकुर ने भाजपा का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस भले ही भाजपा के बारे में झूठी बातें फैला रही है कि अगर कल भाजपा आती है तो ओपीएस बंद हो जाएगी, लेकिन मैं साफ कह दूं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. हमने ऐसा न तो सोचा है और न ही ऐसा कोई विचार है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कर्मचारियों के बीच राजनीतिक दृष्टि से एक भय और डर का माहौल पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार आई है, क्या वहां ऐसे बदले की भावना के साथ काम हुआ है? और हम ऐसी कोई सोच नहीं रखते कि हम आने वाले समय में किसी पर बदले की भावना से कार्रवाई करें.
'पहले मुख्यमंत्री, फिर मंत्री और विधायक बोल रहे झूठ'
विधानसभा के मानसून सत्र पर जयराम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की मौजूदा सरकार में बस एक ही चीज देखने को मिली है कि किसी भी बात का सही जवाब देना नहीं और ठीक बात करनी ही नहीं. इसी वजह से सदन में स्थिति खराब हो जाती है. उन्होंने कहा कि झूठ बोलना पहले मुख्यमंत्री ने शुरू किया, फिर मंत्री झूठ बोलने लगे और अब कांग्रेस के विधायक भी झूठ बोलना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार सदन में बेवजह की बातें और भाषण ही देती है. हम यहां भाषण सुनने नहीं आते हैं. यह कोई जनसभा नहीं है, विधानसभा है. इसलिए जो सवाल पूछा जाता है, उसका सीधा जवाब देना होता है. उन्होंने कहा कि सीधी सी बात है, जब हमारे प्रश्नों के उत्तर नहीं मिलते हैं तो सदन में गुस्से, रोष और आक्रोश का माहौल बन जाता है. जिसका परिणाम यही होता है कि जब हमें सदन में बोलने का मौका नहीं मिलता है तो हम सदन से बाहर आ जाते हैं.
हिमाचल के कर्ज पर सरकार को घेरा
हिमाचल पर कर्ज के पहाड़ और कर्ज के लिए पूर्व भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराने वाले प्रदेश सरकार के बयान पर भी जयराम ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि पहली बात तो ये है कि सरकार को ये पता होना चाहिए कि पहले कर्ज कितना था और अब कर्ज कितना पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि जितना कर्ज हिमाचल प्रदेश बनने के बाद से जब तक हमारी सरकार सत्ता में रही, उससे ज्यादा कर्ज तो सुक्खू जी पांच वर्ष में लेने का रिकॉर्ड बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि 69 हजार 600 करोड़ रुपये का कर्ज हिमाचल पर था, जब हम सरकार छोड़कर गए. आज एक लाख 20 हजार करोड़ रुपये का कर्ज हिमाचल पर होने जा रहा है. यानी जितना कर्ज हमने हिमाचल बनने के बाद से जब तक हमारी सरकार थी तब तक लिया, उतना कर्ज ये सरकार जिसका पांच साल का कार्यकाल अभी पूरा भी नहीं हुआ है, वो लेने जा रही है. तो आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि किसने कर्ज ज्यादा लिया है.
'कर्ज लेने का क्या फायदा, जब विकास ही नहीं हुआ'
दूसरी बात ये है कि अगर सरकार ने कर्ज लिया भी तो उस कर्ज लेने का कोई फायदा दिख नहीं रहा है, क्योंकि प्रदेश में कोई काम भी नहीं हो रहा है. सड़कें टूटी हुई हैं. विकास के कार्य बंद पड़े हैं. उसके बावजूद भी ये लोग कर्ज लिए जा रहे हैं, तो सरकार हमें इसके लिए जिम्मेदार न ठहराए. उन्होंने कहा कि जब हम सत्ता में आए थे तो हमें भी 49 हजार करोड़ का कर्ज विरासत में मिला था, लेकिन हमने काम भी किया और विकास भी किया. माना कि कर्ज लेना सरकार की मजबूरी हो जाती है, क्योंकि जो पहले कर्ज लिया होता है, उसकी किश्तें पूरी करनी होती हैं और कई अन्य काम होते हैं. कर्ज लेना कभी-कभी मजबूरी हो जाती है, लेकिन हमारी सरकार में काम भी हुए हैं और ऐसे काम हुए हैं जो पूर्व की किसी सरकार के दौरान नहीं हुए.
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