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'विधवा-अनाथ के नाम पर पैसा इकठ्ठा करके सरकार चलाने का हो रहा इंतजाम', ऑर्फन एंड विडो सेस पर भड़के जयराम

CM सुक्खू की घोषणाओं पर किसी को नहीं यकीन, पूरे प्रदेश में धरने पर बैठे कर्मचारी. नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का सीएम पर हमला.

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर (@Jairam Thakur FB page)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 15, 2026 at 8:51 PM IST

4 Min Read
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शिमला: हिमाचल सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर ऑर्फन एंड विडो सेस लगाए जाने का नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने खुलकर विरोध जताया है. साथ ही प्रदेशभर में कर्मचारियों के हो रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर सीएम सुखविंदर सिंह को जमकर घेरा है. उन्होंने कहा आज से पहले प्रदेश की ऐसी स्थिति कभी नहीं थी. अब सीएम की घोषणाओं पर किसी को यकीन नहीं है.

पेट्रोल-डीजल पर सेस लगाने को लेकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा, "प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब है कि इसको हम समझते हैं. लेकिन अनाथ और विधवा के नाम पैसे इक्कठा करके आप सरकार चलाने का इंतजाम कर रहे हैं. ये आज से पहले किसी सरकार ने नहीं किया. ये बेहद ही दूर्भाग्यपूर्ण है".

पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने आगे कहा, ऑर्फन एंड विडो सेस के नाम पर सीएम द्वारा अन्य प्रदेश के साथ तुलना करना कोई तर्क संगत नहीं है. उनकी आर्थिक स्थिति हमसे बेहतर है. वहां के लोगों की पेइंग कैपेसिटी हमसे बेहतर हो सकती है. वो पैरामीटर दूसरे प्रदेशों के हिमाचल के संदर्भ में लागू नहीं किए जा सकते. लेकिन जब ये बिल हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अंदर लाया था तो हमने इसका विरोध किया था. खास तौर पर ऑर्फन और विडो के नाम पर. यानी की आप अनाथ और विधवा के नाम पर सेस लगा रहे हैं और सेस लगाने का प्रावधान, जो उसमें जोड़ रहे हैं. क्या ये पैसा सिर्फ अनाथ और विधवाओं पर खर्च होगा या ये पैसा सरकार चलाने के लिए खर्च करेगी.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने पर जोड़ दे रही है. जबकि उसका क्या फर्क लोगों पर पड़ता है, सरकार को समझना चाहिए. हम इस मुद्दे को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाएंगे. खासकर डीजल की कीमत को ये सरकार लगातर तीन बार तक बढ़ाया है. इसका बोझ सीधा और सीधा गरीब लोगों के ऊपर पड़ता है. क्योंकि हिमाचल में सिवाय रोड के ट्रांसपोर्टेशन का कोई और जरिया नहीं है. जब पेट्रोल-डीजल महंगा होगा तो सारी चीजों की कीमतें बढ़ती है. जिसका अंदाजा शायद सीएम को नहीं है.

मुख्यमंत्री जी के इन घोषणाओं पर अब किसी को भरोसा नहीं है. बजट में दी उनकी घोषणाएं पूरी नहीं है. चुनाव से पहले जो उन्होंने गारंटी दी थी वो पूरी नहीं हुई और उसके बाद जो उन्होंने जनसभाओं में घोषणाएं की वो पूरी नहीं हुई. इसलिए भरोसे की तो बात खत्म है. अगर भाजपा कर्मचारी हितैषी नहीं है तो, मैं उनसे पूछता हूं कि ये कर्मचारी हर जगह धरने पर क्यों बैठे हैं? HRTC की हालत, उनके कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों की हालत देख लीजिए. हिमाचल में पूर्व कर्मचारी धर्मशाला में हजारों की संख्या में विधानसभा का घेराव करने पहुंचे, जो आज से पहले इस तरह की स्थिति कभी नहीं हुई.

शिमला शहर, रिज और सचिवालय से लेकर पूरे प्रदेश भर में कर्मचारी धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. आपकी घोषणाओं पर किसी को कोई भरोसा नहीं है. पंचायत और शहरी निकाय चुनाव में बुरी तरह से हुई हार से आपके ऊपर बहुत दवाब है, कांग्रेस पार्टी ने संज्ञान लिया और आपको बहुत फटकार पड़ी है, जिसकी वजह से आनन-फानन में घोषणाएं हो रही है, जिस पर किसी को भरोसा नहीं है.

मुख्यमंत्री सुखविंदर जी हमेशा कहते हैं कि वह कानून के विद्यार्थी हैं. बाकी कानून के जानकर नहीं हैं. वह स्वयं को कानून के ऊपर मानते हैं. शामियाना लग जाने के बाद सरकार स्कूल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम की परमिशन लेने हाई कोर्ट गई. हाईकोर्ट में जी फजीहत हुई वह दुनिया के सामने हैं.

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