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Weather Forecast : 3 सितंबर से राजस्थान में फिर सक्रिय होगा मानसून, पूर्वी हिस्से में बढ़ेगी बारिश, जोधपुर-बीकानेर संभाग को करना होगा इंतजार

प्रदेश में सावन खत्म होने के बाद अब भादो में भी बारिश को लेकर मौसम विभाग का पूर्वानुमान आया है.

Jaipur Weather Report
जयपुर मौसम विभाग (ETV Bharat File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 31, 2026 at 7:36 PM IST

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जयपुर: राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से कमजोर पड़ा मानसून सितंबर की शुरुआत में एक बार फिर सक्रिय होने के संकेत दे रहा है. मौसम विभाग के जयपुर केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार प्रदेश में आगामी 2 सितंबर तक मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है. इसके बाद बंगाल की खाड़ी में बने नए कम दबाव के क्षेत्र के असर से 3 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है.

हालांकि, इस नए दौर का असर मुख्य रूप से पूर्वी और उत्तरी राजस्थान में देखने को मिलेगा, जबकि पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग में मानसून की स्थिति फिलहाल कमजोर रहने का अनुमान है. मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल और ओडिशा तट के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इसके अगले 24 घंटे में और प्रभावी होकर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदलने की संभावना है. इसी सिस्टम के असर से प्रदेश में 3 सितंबर से बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है.

3 सितंबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार : मौसम विभाग ने 3 सितंबर को कोटा संभाग में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. वहीं, भरतपुर और जयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में 2-3 सितंबर से बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है. 4 से 7 सितंबर के दौरान भरतपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर और उदयपुर संभाग में मेघगर्जन के साथ बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. इस दौरान कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है.

कोटा संभाग और उसके आसपास के जिलों में कुछ स्थानों पर मध्यम से तेज बारिश के साथ भारी बारिश भी हो सकती है. ऐसे में इन क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर जलभराव और तेज बहाव जैसी परिस्थितियों को लेकर भी सतर्कता जरूरी होगी.

पश्चिमी राजस्थान में मानसून रहेगा कमजोर : राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में फिलहाल बारिश के लिए इंतजार लंबा हो सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक आगामी दिनों में जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश हिस्सों में कमजोर मानसूनी परिस्थितियां जारी रहने की संभावना है. हालांकि, 4 से 6 सितंबर के दौरान बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में कुछ स्थानों पर छुटपुट हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है.

पढ़ें : इन राज्यों में भारी बारिश और भूस्खलन को लेकर अलर्ट, जानें आज का मौसम

इसके बावजूद पश्चिमी राजस्थान में व्यापक बारिश का दौर शुरू होने के संकेत फिलहाल नहीं हैं. बारिश थमने के कारण पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में दिन का तापमान फिर बढ़ गया है. कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है और अगले कुछ दिनों में भी कई स्थानों पर तापमान 40 डिग्री या उससे ऊपर जाने की संभावना है.

तीन दिन मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान : मौसम केंद्र जयपुर ने आगामी तीन दिनों के लिए प्रदेश में मुख्यतः शुष्क मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है. इस दौरान अधिकांश हिस्सों में धूप निकलने और तापमान में मामूली बढ़ोतरी होने की संभावना है. पिछले 24 घंटों में भी राज्य का मौसम मुख्यतः शुष्क रहा. सबसे अधिक 40.0 डिग्री सेल्सियस तापमान श्रीगंगानगर में दर्ज किया गया. पिलानी, चूरू, फलोदी, बीकानेर और जैसलमेर में भी अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा. वहीं, न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस सिरोही में दर्ज किया गया.

मानसून सीजन में बारिश सामान्य से कम : राजस्थान में मानसून सीजन के तीन महीने बीत चुके हैं और अब केवल सितंबर का एक महीना बाकी है. इसके बावजूद प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे चल रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में अब तक करीब 295.11 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 359.20 मिमी है. इस तरह प्रदेश में बारिश सामान्य से 17.84 प्रतिशत कम है.

जयपुर जिले में भी स्थिति चिंताजनक है. यहां सामान्य तौर पर इस अवधि तक करीब 442.84 मिमी बारिश होती है, जबकि इस बार करीब 340.48 मिमी बारिश दर्ज हुई है. यानी जयपुर में सामान्य से 23.11 प्रतिशत कम बारिश हुई है. अगस्त के अंत तक प्रदेश में सामान्य बारिश करीब 352.22 मिमी मानी जाती है, जबकि इस बार आंकड़ा करीब 295.1 मिमी रहा. बारिश की इस कमी के चलते राज्य के कई जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं.

केवल डीग और फलोदी में सामान्य से ज्यादा बारिश : राज्य में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक केवल डीग और फलोदी ऐसे जिले बताए गए हैं, जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है. डीग में सामान्य 408.66 मिमी के मुकाबले 556.67 मिमी बारिश हो चुकी है. वहीं, फलोदी में सामान्य 155.39 मिमी के मुकाबले 198.33 मिमी बारिश दर्ज हुई है. इसके उलट कई जिलों में बारिश की भारी कमी है. पाली में सामान्य औसत बारिश करीब 413.41 मिमी है, लेकिन इस सीजन में अब तक सिर्फ 185.78 मिमी बारिश हुई है. यानी यहां करीब 55 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है.

जालोर में सामान्य बारिश 347.83 मिमी के मुकाबले करीब 182.40 मिमी बारिश हुई है, जो लगभग 47.56 प्रतिशत की कमी है. बांसवाड़ा में भी सामान्य से करीब 44.77 प्रतिशत कम बारिश हुई है. यहां सामान्य करीब 700 मिमी के मुकाबले इस सीजन में लगभग 386 मिमी बारिश हुई है. उदयपुर में सामान्य 514.61 मिमी के मुकाबले करीब 300 मिमी बारिश दर्ज हुई है, यानी लगभग 41.69 प्रतिशत कमी. जैसलमेर में भी सामान्य 137.19 मिमी के मुकाबले करीब 75.56 मिमी बारिश हुई है, जो लगभग 44.92 प्रतिशत कम है.

ट्रफ लाइन उत्तर की ओर खिसकने से कमजोर हुआ मानसून : मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसककर हिमालय की तलहटी में पहुंच गई है. इसके अलावा बंगाल की खाड़ी से आने वाले नमी वाले सिस्टम भी फिलहाल पूर्वी भारत तक सीमित हैं. यही वजह है कि राजस्थान में मानसून कमजोर पड़ा है.

हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बने नए कम दबाव के क्षेत्र से परिस्थितियों में बदलाव की उम्मीद है. इसके प्रभाव से 3 सितंबर के बाद पूर्वी और उत्तरी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं.

पिछले साल के मुकाबले स्थिति कमजोर : इस वर्ष मानसून सीजन में बारिश का वितरण भी असमान रहा है. पिछले साल इसी अवधि तक राजस्थान के 37 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी, जबकि इस बार अभी तक केवल डीग और फलोदी में ही सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है. मानसून सीजन का अंतिम महीना सितंबर बचा है. ऐसे में यदि सितंबर में भी बारिश कमजोर रहती है तो प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का मौजूदा घाटा पूरा करना मुश्किल होगा. किसानों और जल संसाधनों के लिहाज से सितंबर की बारिश इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

पढ़ें : मानसून की सुस्ती के बीच 15 जिलों में येलो अलर्ट, बीसलपुर बांध से आया बड़ा अपडेट

बांधों में आया 48.55 प्रतिशत पानी : प्रदेश के बड़े बांधों की स्थिति पर नजर डालें तो 30 अगस्त 2026 तक राजस्थान के 23 बड़े बांधों में उनकी कुल भराव क्षमता का करीब 65.71 प्रतिशत पानी आ चुका है. इन बांधों की कुल क्षमता करीब 8196.75 एमसीयूएम है, जबकि अब तक करीब 5386.49 एमसीयूएम पानी की आवक दर्ज की गई है. इसी बीच ईसरदा बांध ने भी इस साल बड़े बांधों की सूची में महत्वपूर्ण स्थिति बनाई है. बांध की कुल भराव क्षमता करीब 91.76 एमसीयूएम है और 30 अगस्त तक इसमें करीब 44.55 एमसीयूएम पानी आ चुका है. यानी बांध में उसकी कुल क्षमता का करीब 48.55 प्रतिशत पानी उपलब्ध है. ईसरदा बांध के निर्माण के बाद पहली बार इस तरह का विस्तृत आंकड़ा तैयार किया जा रहा है.

प्रदेश के 23 बड़े बांध 14 जिलों में स्थित हैं. इनमें कोटा के तीन, बांसवाड़ा के दो, टोंक के चार, जयपुर के तीन और पाली के दो बांध शामिल हैं. इसके अलावा दौसा, डीग, धौलपुर, बूंदी, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, सलूम्बर और प्रतापगढ़ में भी एक-एक बड़ा बांध है.

बीसलपुर बांध में पानी की आवक जारी : बीसलपुर बांध में भी पानी की आवक बनी हुई है. बांध का जलस्तर बढ़कर 314.10 आरएल मीटर तक पहुंच गया है. पिछले दिन की तुलना में बांध का गेज करीब एक सेंटीमीटर बढ़ा है. वहीं, त्रिवेणी नदी का गेज फिलहाल 2.40 आरएल मीटर पर बना हुआ है. बीसलपुर में पानी की आवक राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे जयपुर समेत कई क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था जुड़ी हुई है. आने वाले दिनों में बारिश के नए दौर और त्रिवेणी नदी के बहाव पर बांध के जलस्तर की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी.

नवनेरा बांध से पानी की निकासी जारी : ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट के तहत बने नवनेरा बांध से भी लगातार पानी की निकासी की जा रही है. बांध की क्षमता करीब 217 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर करीब 211 मीटर बताया गया है. कुल मिलाकर राजस्थान में मानसून फिलहाल कमजोर दौर से गुजर रहा है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम ने सितंबर की शुरुआत में बारिश की उम्मीद जरूर बढ़ा दी है.

3 सितंबर से पूर्वी राजस्थान और उत्तरी हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना है, जबकि कोटा संभाग में कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है. दूसरी ओर जोधपुर और बीकानेर संभाग को व्यापक बारिश के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है. सितंबर में होने वाली बारिश ही यह तय करेगी कि प्रदेश इस मानसून सीजन में बारिश की कमी को कितना पूरा कर पाता है.