गैंगस्टर्स की काली कमाई से बनी कोठियों में खुलेंगे स्कूल-अस्पताल, यह है जयपुर रेंज आईजी का खास प्लान
शेखावाटी में संगठित माफिया पर लगाम लगाने के लिए एक्शन प्लान तैयार.

Published : January 6, 2026 at 1:19 PM IST
|Updated : January 6, 2026 at 1:51 PM IST
जयपुर : नए साल में जयपुर रेंज पुलिस ने गैंगस्टर्स पर नकेल कसने का एक खास प्लान तैयार कर लिया है, जिसमें संगठित माफिया से जुड़े बदमाशों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने की रणनीति के साथ ही काली कमाई से बनी कोठियों को जब्त करने की भी प्लानिंग है. गैंगस्टर्स की संपत्ति को जब्त कर पुलिस सरकार को सौंपेगी ताकि उसमें स्कूल-कॉलेज या अस्पताल खोले जा सकें. अपराधियों ने भय के दम पर जो जमीन इकट्ठा की है, उसे भी जब्त कर सामाजिक उपयोग के कामों में लगाया जाएगा. जयपुर रेंज आईजी एचजीआर सुहासा की देखरेख में खास तौर पर शेखावाटी के गैंगस्टर्स पर नकेल कसने के लिए यह एक्शन प्लान तैयार किया गया है.
सात जिलों में बनाई संगठित गिरोहों की सूची : जयपुर रेंज आईजी एचजीआर सुहासा का कहना है कि जयपुर रेंज के साथ ही राजस्थान के कई इलाकों में गैंग्स एक्टिव हैं. शेखावाटी के सीकर और झुंझुनू जिले में ज्यादा गैंग्स सक्रिय हैं. संगठित गिरोह और उनसे जुड़े बदमाशों पर लगाम लगाना राजस्थान पुलिस की प्राथमिकता है. इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने भी खास निर्देश जारी किए हैं. ऐसी गैंग और उनसे जुड़े अपराधियों के खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है. जिलों में सक्रिय गैंग को चिह्नित करके लिस्टिंग की गई है.
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चार गैंग्स पर कसा शिकंजा : लिस्ट की गई गैंग में से चार गैंग पर शिकंजा कसा गया है बाकि भी पुलिस के राडार पर हैं. इनमें 7 गैंग झुंझुनू में और 8-9 गैंग सीकर जिले में हैं. कुछ छोटे-बड़े गैंग जयपुर ग्रामीण इलाके में हैं. इनमें से एक-दो गैंग पर कोटपूतली में शिकंजा कसा गया है. प्रयास है कि सभी गैंग पर शिकंजा कसा जाए. झुंझुनू में हिस्ट्रीशीटर डेनिश बावरिया हत्याकांड के बाद पुलिस लगातार कड़े कदम उठा रही है.
गैंग के बदमाशों की आर्थिक नाकाबंदी : उनका कहना है कि गैंग की आर्थिक नाकाबंदी भी की जा रही है. उनके आर्थिक स्रोतों पर नकेल कसी जा रही है. जहां भी मुकदमों में इनका नाम आता है, उसकी मजबूत चार्जशीट तैयार की जा रही है. कड़ी धाराएं लगाकर गैंग से जुड़े लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जा रहा है. जो लोग बाहर घूम रहे हैं, उनके खिलाफ नए आपराधिक कानून बीएनएस की संगठित अपराध की धारा 111 और 112 के तहत मुकदमा दर्ज किए जा रहे हैं. कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है.

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संपत्तियों को किया जा रहा चिह्नित : उन्होंने कहा कि इनकी आय के साधनों पर शिकंजा कसने के साथ ही जहां-जहां उन्होंने रुपए निवेश किए हैं, उन संपत्तियों को भी चिह्नित किया जा रहा है. इन संपत्तियों को जब्त किया जा रहा है. कई जगहों पर संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की गई है, जबकि कई संपत्तियों को जब्त करने की कवायद जारी है. उन्होंने कहा कि संगठित गिरोह में शामिल हर व्यक्ति पर कठोर धाराएं लगाकर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है, जिससे उनकी संपत्ति जब्त की जा सके. सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वालों के बारे में राजस्व विभाग को जानकारी साझा की जा रही है ताकि वे भी बेदखली की कार्रवाई कर सकें.
बीएनएस की धारा 107 में कड़े प्रावधान : उन्होंने कहा कि बीएनएस की धारा 107 में अवैध आय से अर्जित संपत्ति को फ्रीज करने का प्रावधान है. इन फ्रीज संपत्तियों को लेकर कोर्ट में वाद पेश किया जाता है. ऐसे मामलों में कुछ लोगों को नोटिस जारी किया गया है, जबकि कुछ मामलों में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है. कोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार ऐसी संपत्तियों को अपने अधीन ले लेती है.
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सरकार बनाए स्कूल-अस्पताल : उनका कहना है कि ऐसे गैंगस्टर की संपत्ति जल्द ही सरकारी संपत्ति बन जाएगी, जिनमें सरकार स्कूल-अस्पताल खोल सकती है या सार्वजनिक हित के किसी काम में ऐसी संपत्ति का उपयोग कर सकती है. इसी के तहत वर्क प्लान बनाकर काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया पुलिस ने दो तरह की गैंग्स को चिह्नित किया है. पहली कैटेगरी वह है, जिनके बदमाश राजस्थान में रहकर लोगों को डरा-धमकाकर अपना खौफ कायम करते हैं. हथियारों का इस्तेमाल लोगों को डराने के लिए करते हैं. जो लोग इनसे डरते हैं. उन्हें डराकर ये अपनी धौंस जमाते हैं.
विदेश में बैठे गैंगस्टर्स पर भी नजर : उन्होंने बताया कि कुछ गैंग्स ऐसे हैं, जो विदेश में बैठकर ऑपरेट करते हैं. ये देश के बाहर से कॉल कर लोगों को रंगदारी के लिए धमकाते हैं. रकम नहीं देने पर फायरिंग की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है. वे बोले, रंगदारी के लिए धमकाने वालों पर तो मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. ऐसे बदमाशों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर, पासपोर्ट निरस्त करने और प्रत्यर्पण की कवायद भी की जा रही है. इसके किए क्राइम ब्रांच और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स काम कर रही है.
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गैंग के खबरदारों पर भी शिकंजा : दूसरी तरफ, जिलों में ऐसी गैंग से संपर्क रखने वाले लोग होते हैं. कई लोग गैंगस्टर्स से लगातार बातचीत करते हैं और उन्हें जानकारी मुहैया करवाते हैं. कुछ लोग गैंगस्टर्स का दिया हुआ छोटा-मोटा टास्क पूरा करते हैं. उन लोगों के खिलाफ भी संगठित अपराध की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है. ऐसे भी कई लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. रंगदारी के किए धमकी-भरे कॉल आने पर कुछ लोग बिचौलिए का काम करते हैं. उन्हें भी अरेस्ट किया जा रहा है. कई व्यापारियों के बारे में गैंगस्टर्स को जानकारी देने वाले इनके आसपास के लोग हैं. उन्हें भी अरेस्ट किया जा रहा है. देश से बाहर से ऑपरेट करने वाले गैंगस्टर्स पर भी एजीटीएफ की नजर है.
सोशल मीडिया बन रहा गैंगस्टर्स का हथियार : उनका कहना है कि सोशल मीडिया को कंट्रोल करना संभव नहीं है. इसका फायदा उठाकर गैंगस्टर्स अपना वर्चस्व बनाने का प्रयास करते हैं. सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर गैंगस्टर्स अपनी धौंस कायम रखने का प्रयास करते हैं. पुलिस लगातार सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग कर रही है. इसके किए पुलिस को आधुनिक संसाधनों से लैस किया गया है. गैंगस्टर्स का महिमा मंडन करने वाले लोगों पर भी सख्ती की जा रही है.
एरिया डोमिनेशन से पुलिस की दिखी धाक : एरिया डोमिनेशन के तहत ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. ऐसे मामलों में एक हजार से ज्यादा लोगों पर शिकंजा कसा गया है. इनमें ज्यादातर कम उम्र के हैं, जो सोशल मीडिया पर अपराधियों का महिमा मंडन करते थे. कई लोग एक ही नंबर की कई गाड़ियां रखकर भी लोगों में धौंस जमाने का प्रयास करते हैं. ऐसे वाहनों को जब्त किया गया है. कई लोग अपने वाहनों की नंबर प्लेट्स फेंककर भाग चुके हैं. सक्रिय गैंगस्टर कौन हैं. इनके सपोर्टर कौन हैं. इसे चिह्नित कर लिया गया है. इनके लिए लोगों को प्रभावित करने वाले कौन हैं. इन सबकी सूची तैयार कर ली गई है.



