102 साल की अम्मा, 20 साल से लोगों को पिला रही पानी, बोलीं- हर कोई परिवार जैसा
जयपुर की रेशम देवी 20 सालों से सेवा की मिसाल पेश कर रही हैं. पढ़िए फिरोज सैफी की रिपोर्ट...

Published : June 30, 2026 at 4:04 PM IST
जयपुर : कहते हैं सेवा करने की उम्र नहीं होती केवल जज्बा होता है. राजधानी जयपुर के हसनपुरा स्थित जल भवन की प्याऊ पर बैठी 102 वर्षीय रेशम देवी इसका जीवंत उदाहरण हैं. जिस उम्र में अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन बिताते हैं उस उम्र में रेशम देवी सेवा करने में जुटी हैं. एक सदी से अधिक का जीवन जी चुकीं रेशम देवी आज भी हर सुबह घर से निकलकर जल भवन पहुंचती हैं और पूरे दिन राहगीरों, जल विभाग और रेलवे कर्मियों सहित अन्य लोगों को अपने हाथों से पानी पिलाती हैं. चेहरे पर मुस्कान, व्यवहार में अपनापन और सेवा का अद्भुत भाव लिए रेशम देवी को हर कोई 'अम्मा' कहकर पुकारते हैं.
55 साल पहले छूटा पति का साथ : साल 1924 में दौसा जिले के सिकंदरा क्षेत्र में जन्मी रेशम देवी का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी. आज भी वे पूरे उत्साह के साथ जल भवन की प्याऊ पर बैठती हैं और लोगों को मुस्कुराते हुए पानी पिलाती हैं. रेशम देवी बताती हैं कि उनके पति अहमदाबाद की कपड़ा मिल में काम करते थे. लगभग 55 वर्ष पहले हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया.
कठिन परिस्थितियों में किया बच्चों का पालन पोषण : उन्होंने बताया कि पति की मौत के बाद तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. पहले वो बच्चों को लेकर गांव लौटी, लेकिन वहां रोजगार नहीं मिला. इसके बाद में जयपुर आ गई और कठिन परिस्थितियों में बच्चों का पालन पोषण किया. उन्हें पढ़ाया लिखाया और अपने पैरों पर खड़ा किया. आज उनका बड़ा बेटा 70 वर्ष का है और पुलिस से सेवानिवृत है, दो बेटे अन्य व्यवसाय करते हैं.
जल भवन में सेवा करते हुए 20 साल : उन्होंने बताया कि उन्हें लोगों की सेवा करने में सच्चा सुख मिलता है. हसनपुरा में रहने के दौरान उन्हें 100 रुपए वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी. जल भवन की प्याऊ पर पानी पिलाने का काम शुरू किया और देखते ही देखते 20 साल बीत गए. जल भवन की कर्मचारी भी उनके इस सेवा कार्य में सहयोग करते हैं. कर्मचारी उन्हें 2000 महीना देते हैं, जिससे उनका गुजारा हो जाता है. कई बार पानी पीने वाले लोग भी कुछ देकर चले जाते हैं.

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102 साल की उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ : खास बात यह है कि 102 वर्ष की आयु में भी रेशम देवी स्वयं को पूरी तरह स्वस्थ बताती हैं. उनका कहना है कि उन्हें कोई बीमारी नहीं है, उनकी याददाश्त भी पहले जैसी ही है. वे रोज सुबह जल भवन पहुंचती हैं और पूरे दिन लोगों की सेवा करती हैं. जिस दिन जल भवन की छुट्टी होती है, केवल उसी दिन वो भी जल भवन नहीं आती हैं. इसके अलावा सर्दी, गर्मी, बरसात कैसा भी मौसम हो वे जल भवन आना नहीं भूलती हैं.

यहां आने वाले सभी मेरे परिवार के लोग : रेशम देवी मुस्कुराते हुए कहती हैं कि यहां आने वाले सभी लोग उनके परिवार जैसे हैं. सबसे बात होती है, हंसी मजाक होता है और लोगों का हाल-चाल जानकर मन को खुशी मिलती है. यही मेरी सबसे बड़ी कमाई है. सबके साथ अपनापन वाला रिश्ता है. जल भवन से सटे जयपुर जंक्शन में कार्यरत रेलवे कर्मचारी भी अक्सर पानी पीने जल भवन की प्याऊ पर आते हैं.
बातचीत किए बिना मन नहीं मानता : रेलवे कर्मचारी सुग्रीव सिंह बताते हैं कि वो पिछले 5 वर्षों से नियमित रूप से जल भवन आते हैं. वो सिर्फ पानी पीने नहीं बल्कि अम्मा से मिलने भी आते हैं. रेशम देवी हमेशा मुस्कुरा कर पानी पिलाती हैं. 102 साल की उम्र में उनका उत्साह देखकर हम भी प्रेरित होते हैं. दिन में एक बार उनसे मिलकर बातचीत किए बिना मन नहीं मानता है. नियमित रूप से जल भवन आने वाले दशरथ राम कहते हैं कि अक्सर जल भवन में पेड़ की छांव में बैठते हैं और यहीं पर रेशम देवी के हाथों से पानी पीते हैं. उनका स्नेह और आत्मीय व्यवहार हर किसी का दिल जीत लेता है.

लोगों के लिए प्रेरणा बनीं रेशम देवी : जल भवन आने वाले लोगों का कहना है कि वो पिछले दो दशकों से रेशम देवी को इसी समर्पण के साथ सेवा करते हुए देख रहे हैं. इतनी अधिक उम्र में भी उनका नियमित रूप से प्याऊ पर बैठकर लोगों को पानी पिलाना आज के समाज के लिए प्रेरणा है. आज जब भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने लिए समय नहीं निकाल पाते हैं, ऐसे दौर में 102 वर्षीय रेशम देवी अपनी निस्वार्थ सेवा से समाज को एक अनमोल सीख दे रही हैं. उनके हाथों से पिलाया गया पानी केवल प्यास नहीं बुझाता, बल्कि मानवता, अपनापन और सेवा का संदेश भी देता है. यही कारण है कि जल भवन की यह प्याऊ आज केवल पानी का स्थान नहीं बल्कि संवेदनाओं और प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है.


