चंडीगढ़ में किन्नरों का जय माता मंदिर, किन्नर समाज ने की थी स्थापना, मन्नतें होती हैं पूरी, हर वर्ग से आते हैं लोग
चंडीगढ़ सेक्टर-26 स्थित जय माता मंदिर 1978 से किन्नर समुदाय की ओर से संचालित आस्था का प्रमुख केंद्र है.

Published : February 18, 2026 at 11:59 AM IST
चंडीगढ़: चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित बापू धाम कॉलोनी में बना जय माता मंदिर आज शहर में आस्था और विश्वास का विशेष केंद्र बन चुका है. वर्ष 1978 में किन्नर समुदाय द्वारा स्थापित इस मंदिर की शुरुआत उस समय हुई, जब सेक्टर-26 की सब्ज़ी मंडी के पास रहने वाले लोगों को पुनर्वास के तहत बापू धाम कॉलोनी में बसाया गया. अलग-अलग धर्मों से जुड़े लोगों ने यहां अपने-अपने धार्मिक स्थल स्थापित किए. इसी क्रम में किन्नर समाज ने भी माता के इस मंदिर की स्थापना की और सेवा का दायित्व अपने हाथों में लिया.
किन्नर समाज की निरंतर सेवा: स्थापना के बाद से ही मंदिर की सेवा और देखरेख किन्नर समुदाय द्वारा श्रद्धा भाव से की जा रही है. वर्तमान में मंदिर का संचालन अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़ा, चंडीगढ़ यूटी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है. श्री श्री 1008 स्वामी नंदी जी की पीठासीन महामंडलेश्वर की देखरेख में मंदिर की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित होती हैं.
गुरु गद्दी पर कमली नंद गिरी माताजी: इस समय गुरु गद्दी पर कमली नंद गिरी माताजी विराजमान हैं. तमिलनाडु की मूल निवासी माताजी वर्ष 2000 में चंडीगढ़ आई थीं. वर्ष 2019 में उन्हें गुरु गद्दी सौंपी गई, जिसके बाद से वे मंदिर की सेवा और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रही हैं. उनके नेतृत्व में मंदिर की धार्मिक गतिविधियों और सामाजिक सहभागिता में निरंतर वृद्धि हुई है.

हर धर्म के लोगों की आस्था का केंद्र: कमली नंद गिरी माताजी बताती हैं, “यहां हर धर्म के लोग अपनी मनोकामना लेकर आते हैं. खासतौर पर शादी-ब्याह से पहले परिवार यहां आशीर्वाद लेने जरूर पहुंचते हैं. पिछले कुछ वर्षों में कई लोगों की मनोकामनाएं पूरी हुई हैं, जिससे मंदिर की मान्यता और भी बढ़ी है.मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, समरसता और विश्वास का प्रतीक भी है."

समाज को दे रहे खास मैसेज: कमली नंद गिरी माताजी की मानें तो आज जय माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि किन्नर समुदाय की सकारात्मक भूमिका और सेवा भावना का भी सशक्त उदाहरण बन चुका है. 1978 से लगातार जारी सेवा ने इसे शहर के प्रमुख श्रद्धास्थलों में विशेष स्थान दिलाया है. यह मंदिर सामाजिक समावेशन और सद्भाव का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है.


