सरकार समान नागरिकता संहिता लाती है तो सभी पर समान रूप से लागू हो : शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती
मंदिर महंत कैलाश शर्मा ने गुरु-शिष्य परंपरा के तहत शंकराचार्य के चरण धोकर आशीर्वाद लिया और फिर चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित करते हुए प्रसाद भेंट किया.

Published : February 28, 2026 at 3:30 PM IST
|Updated : February 28, 2026 at 3:47 PM IST
जयपुर : समान नागरिकता संहिता (यूसीसी) को लेकर जारी बहस के बीच जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार समान नागरिकता संहिता लाती है तो वो सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए. शनिवार को छोटी काशी के प्रमुख आस्था केंद्र मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने ये बात कही. उन्होंने कहा कि समान नागरिकता संहिता को लेकर आपत्ति नहीं है, बशर्ते उसका स्वरूप सर्वमान्य हो.
अष्टमी से शुरू हो चुकी है होली : होली पर्व को लेकर उन्होंने बताया कि फाल्गुन अष्टमी से ही होली का उत्सव शुरू हो चुका है और विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तिथियों पर होली मनाई जाती है. अष्टमी को बरसाने की होली, नवमी को नंदगांव की होली, एकादशी को बिहारी जी की होली और इसी प्रकार जन्मस्थान की होली होती है. इसमें किसी प्रकार का विरोध नहीं होना चाहिए. होली आनंद और भक्ति का पर्व है, रोज भी मनाएं तो उत्तम है.
संप्रदाय अलग-अलग तिथि पर मानते हैं : पर्व-त्योहारों की तिथियों को लेकर अलग-अलग मान्यताओं पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में विविधता स्वाभाविक है. रामानुज संप्रदाय अपनी तिथि के अनुसार पर्व मनाता है, स्मार्त परंपरा अपनी मान्यता के अनुसार. सभी अपने मतानुसार आस्था व्यक्त करते हुए पर्व मनाते हैं. इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, यही हमारी संस्कृति की विशेषता है.

गुरु-शिष्य परंपरा के साथ सम्मान : मंदिर में प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष आराधना की गई और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की गई. इस अवसर पर मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने गुरु-शिष्य परंपरा के तहत शंकराचार्य के चरण धोकर आशीर्वाद लिया और फिर चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित करते हुए प्रसाद भेंट किया. इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा. दर्शन के बाद शंकराचार्य ने कहा कि वे जब भी जयपुर आते हैं तो मोती डूंगरी अवश्य पहुंचते हैं. भगवान गणेश की उन पर विशेष कृपा है. वे उनके आराध्य हैं.

