राम नाम में संसार समाया, इंडोनेशिया में रोज रामलीला तो यूरोप में पॉप म्यूजिक के साथ भक्ति
जबलपुर में आयोजित वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस से स्पष्ट हुआ कि भगवान श्रीराम की महिमा भारत ही नहीं, दुनिया के कोने-कोने में है.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 3, 2026 at 5:03 PM IST
जबलपुर: भारत में एक जमाने में दादी-नानी बच्चों को रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाती थीं. वर्तमान में टीवी व मोबाइल के माध्यम से बच्चे रामायण और माहाभारत के अंश देखते हैं. उन्हें परिवार के बड़े लोग समझाते हैं. श्री राम व कृष्ण का चरित्र भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में लोग पढ़ते हैं और उसका अनुसरण करने की कोशिश करते हैं.
इंडोनेशिया के बाली में रामायण और महाभारत
इंडोनेशिया का एक प्रांत वाली ऐसा भी है, जहां आज भी बच्चों को रामायण और महाभारत की कहानी परिवार में ही सुनाई जाती हैं. यहां रोज रामलीला होती है. इंडोनेशिया से आए राम भक्त ने वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के दौरान इसका जिक्र किया. इंडोनेशिया दक्षिण एशिया का एक महत्वपूर्ण देश है. यहां पर बाली नाम का एक बहुत खूबसूरत द्वीप है. इस द्वीप की खास बात यह है कि यहां पर 84% आबादी हिंदू है और यहां ईसा पूर्व से ही हिंदू धर्म का पालन लोग करते चले आ रहे हैं.
जबलपुर में वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस
बाली में 2000 साल पुराने मंदिर मौजूद हैं. जबलपुर में आयोजित वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने आचार्य धर्म यश इंडोनेशिया के बाली से जबलपुर पहुंचे हैं. आचार्य धर्म यश ने बताया "बाली में भगवान राम हमारे नायक हैं. हम उनकी पूजा करते हैं और प्रेम करते हैं. बाली में रोज रामायण का पाठ किया जाता है. रामलीला का मंचन होता है. वह खुद भी रामलीला के पात्र के रूप में काम कर चुके हैं."
रामायण में सबसे अच्छा चरित्र हनुमान का
आचार्य धर्म यश बताते हैं "पूरी रामायण में सबसे अच्छा चरित्र उन्हें हनुमान जी का लगता है. वह खुद भी हनुमान भक्त हैं. बाली में एक साथ 200 कलाकार मयम करते हैं और यह पूरा राम और रामायण पर आधारित होता है. एक समय था जब हमारी दादी नानी हमें रामायण-महाभारत की कहानी सुनाती थीं. यह चलन बाली में भी था." उनका कहना है कि जिस तरह भारत में यह चलन खत्म हुआ, ऐसा ही कुछ असर बाली में भी है लेकिन फिर भी हमारे यहां का युवा आज भी राम और रामायण से जुड़ा हुआ है.

राम के जीवन को आदर्श मानते हैं
आचार्य धर्म यश की हिंदी बहुत अच्छी है. उनका कहना है "राम के जीवन से जुड़े हुए आदर्श का हम पालन करते हैं. रामायण में दुनिया की हर समस्या का समाधान है. इसलिए इस ग्रंथ को लोगों को समझना चाहिए और पढ़ना चाहिए." वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में निशि मल्होत्रा यूरोप से आई हैं वे मूल रूप से चंडीगढ़ की रहने वाली है लेकिन कई साल पहले उनका परिवार यूरोप में जाकर रहने लगा.
भक्ति संगीत को दिया पॉप स्टाइल
निशि मल्होत्रा गायिका हैं. उन्होंने हिंदू धर्म के भजनों को पॉप स्टाइल में गाना शुरू किया. यूरोप के कई देशों में इंग्लिश कल्चर के लोगों ने भी निशि मल्होत्रा को सुना. निशी मल्होत्रा का कहना है "उन्होंने स्विट्जरलैंड, स्वीडन, जर्मनी, पेरिस, इटली, लंदन के कई शहरों में लोगों को अपने गीत सुनाए हैं और लोगों ने इस भक्ति संगीत को पॉप स्टाइल में काफी पसंद किया. वह एक सप्ताह से जबलपुर में हैं. उन्होंने जबलपुर में भी एक स्कूल के बच्चों को पॉप स्टाइल में ही भक्ति संगीत सिखाया."

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दुनिया के 20 देशों में रामायण पाठ

वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में दुनिया के 20 देशों के लोग पहुंचे, जो कहीं ना कहीं रामायण से जुड़े हुए हैं. इनमें से ज्यादातर रामायण पर शोध करने वाले रिसर्चर हैं. इस कांफ्रेंस में श्रीलंका, जापान, चीन, नेपाल से भी लोग आए हैं. इनमें से कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने रामायण को अपनी भाषा में ट्रांसलेट किया है. कई लोगों ने बताया कि उनके यहां रामायण और राम को कैसे पूजा जाता है.

