समुद्र नहीं नर्मदा की रेत पर बनाए राम, वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में ओडिशा के सैंड आर्टिस्ट की कलाकारी
जबलपुर में वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में सैंड आर्टिस्ट ने नर्मदा की रेत पर बनाई भगवान राम की प्रतिकृति. ओडिशा से पहुंचे हैं कलाकार.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 2, 2026 at 8:37 PM IST
जबलपुर: वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में देश के अलग-अलग हिस्सों से कलाकार पहुंचे हैं. इस कॉन्फ्रेंस में सैंड आर्ट से जुड़े उड़ीसा के कलाकार ने नर्मदा की रेत पर भगवान राम और अयोध्या मंदिर की प्रतिकृति तैयार की है. इस कॉन्फ्रेंस में रामायण और भगवान राम के जीवन से जुड़े हुए चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है. इस प्रदर्शनी में कई देशों की कला शैलियों में बने भगवान राम के जीवन से जुड़े चित्रों को प्रदर्शित किया गया. ऐसे ही यहां डाक टिकटों के जरिए रामायण का प्रदर्शन किया गया.
सैंड आर्टिस्ट ने बनाई भगवान राम की प्रतिकृति
वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के आयोजन में दुनिया के कई देशों के साथ ही है भारत के भी कई जाने-माने कलाकार जबलपुर पहुंचे हैं. ओडिशा के भद्रक से आए गोपाल चरण श्यामल रेत के ऊपर आकृतियां बनाते हैं. वह एक सैंड आर्टिस्ट हैं. गोपाल चरण ने यहां भगवान राम और राम मंदिर के ऊपर रेत पर एक आकृति उकेरी है.
सैंड आर्टिस्ट गोपाल चरण ने बताया कि "अभी तक समुद्र की रेत पर काम करते रहे हैं. समुद्र की रेत बहुत बारीक होती है इसलिए उस पर काम करने में उन्हें आसानी होती है लेकिन उन्होंने पहली बार नर्मदा की रेत पर कोई आकृति बनाई है. इसके लिए उन्हें काफी प्रयास करने पड़े और रेत को कई बार बारीक चलनी से छनवाया गया तब आकृति बनाने लायक रेत तैयार हुई."

5 घंटे में तैयार की रामजी की प्रतिकृति
गोपाल चरण को यह आकृति बनाने में 5 घंटे से ज्यादा का वक्त लगा लेकिन उन्होंने रामजी की एक बेहद मनमोहक प्रतिकृति तैयार की. जिसमें भगवान राम का मुस्कुराता हुआ चेहरा और अयोध्या में रामलला के मंदिर की प्रतिकृति बनाई. गोपाल चरण के साथ कुछ स्थानीय कलाकारों ने भी उनकी मदद की और खुद कलाकारी सीखी.
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'रेत पर कलाकारी कठिन काम'
कार्यक्रम के आयोजन समिति की सदस्य अलका विश्नोई ने बताया कि "रेत पर कलाकारी करना बहुत कठिन काम है. रेत बहुत अधिक फिसलती है, इसलिए इसमें तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाता है. इसलिए इस कला में सभी लोग पारंगत नहीं हो पाते. इस आयोजन में अनोखी कला जानने वाले कई कलाकारों को देश के अलग-अलग स्थान से बुलाया गया है."
उन्होंने बताया कि "रेत को मंडला के नर्मदा किनारे से मंगवाया गया. रेत को सजाने के लिए गोपाल चरण ने कई रंगों का भी इस्तेमाल किया. इसमें रंगोली के रंगों का प्रयोग किया गया. वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में कई पेंटिंग्स और कई मूर्तियां रखी हुई हैं लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सैंड आर्ट की हो रही है."

