खतरे में मध्य प्रदेश की लाइफलाइन, नर्मदा में दिखने लगी चट्टानें, बरगी बांध से पानी गायब
जबलपुर के बरगी बांध में कम हुआ पानी, नर्मदा की धार हुई पतली, कम बारिश से जल संकट का खतरा. विश्वजीत सिंह राजपूत की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 15, 2026 at 5:22 PM IST
जबलपुर: अभी बरसात शुरू भी नहीं हुई है, उसके पहले ही मध्य प्रदेश के बड़े बांधों में से एक बरगी बांध का पानी सूखने लगा है. फिलहाल बरगी बांध में मात्र 5 मीटर पानी शेष बचा है. जबकि बरगी बांध में कुल मिलाकर 21 मीटर पानी का भराव रहता था. कम पानी की वजह से नर्मदा नदी में भी कम पानी छोड़ा जा रहा है. नर्मदा के कई घाटों पर चट्टाने नजर आने लगी हैं, पानी गंदा हो गया है. यदि ऐसे ही हालात रहे तो शहरों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाएगा.
बरगी बांध में केवल 5 मीटर पानी शेष
नर्मदा आधे मध्य प्रदेश की जल रखा है. नर्मदा नदी से ही कई छोटे बड़े गांव से लेकर बड़े-बड़े शहरों तक पानी पहुंचाया जाता है. लेकिन इन दिनों नर्मदा सूख रही है. नर्मदा नदी पर एक बहुत बड़ा बांध है जिसे बरगी बांध के नाम से जाना जाता है. इस बांध की समुद्र तल से ऊंचाई 402 मी धरातल से शुरू होकर 422.75 मी है. कुल मिलाकर बांध में 21 मी पानी भर सकता है. लेकिन बरगी बांध परियोजना के अधिकारी आर आर रोहित ने बताया कि, ''बरगी बांध में फिलहाल वाटर लेवल 407.85 मीटर है. मतलब बरगी बांध में अब मात्र 5 मीटर पानी ही शेष बचा है. जबकि बरगी बांध में बरसात के सीजन में 422.75 मीटर पानी था.''
कई इलाकों में होता है नर्मदा का जल सप्लाई
बरगी बांध से नर्मदा नदी में पानी बिजली संयंत्र के माध्यम से छोड़ा जाता है. लेकिन बिजली संयंत्र में दो में से एक इकाई मेंटेनेंस के लिए बंद की गई है और दूसरी इकाई को भी पानी कम होने की वजह से कम समय के लिए ही चलाया जा रहा है. इसकी वजह से नर्मदा नदी में पानी की मात्रा बहुत अधिक घट गई है. नर्मदा नदी में पानी कम छोड़े जाने का असर जबलपुर शहर के जनजीवन पर भी दिखने लगा है.

दरअसल जबलपुर में बेस्ट सेंट्रल रेलवे, जबलपुर नगर निगम और दूसरी संस्थाओं के लिए भी पानी नर्मदा नदी से ही जाता है. लेकिन सभी वाटर फिल्टर प्लांट से दूर हो गए हैं. ग्वारीघाट के निवासी रामानुज तिवारी का कहना है कि, ''कई सालों से ऐसी स्थिति नहीं बनी थी. लेकिन इस साल ग्वारीघाट में पानी कुछ ज्यादा ही काम हो गया है. लोग पैदल ही नर्मदा की एक तरफ से दूसरी तरफ जाते हुए देखे जा सकते हैं.''

- छतरपुर में गहराया जल संकट, गर्मियों की छुट्टी में दिन भर पानी ढो रहे बच्चे और महिलाएं
- इंदौर में जलसंकट पर उबले कांग्रेसी, भीषण गर्मी से निजात देने मंच पर पानी की बौछार
- बरगी क्रूज हादसा में शॉकिंग खुलासा, घायलों को बचाने पहुंची एंबुलेंस में नहीं था मेडिकल स्टाफ
पानी होने की वजह से कम आ रहे पर्यटक
कुछ ऐसा ही हाल भेड़ाघाट का है. भेड़ाघाट में धुआंधार की धार पतली हो गई है और सही ढंग से धुआंधार नहीं बन पा रहा है. भेड़ाघाट में फोटोग्राफी करने वाले मुन्ना लाल यादव का कहना है कि, ''वे पर्यटकों की फोटोग्राफी करते हैं. लेकिन धुआंधार में कम पानी होने की वजह से पर्यटक नहीं आ रहे हैं और धुआंधार की सुंदरता कम हो गई है.'' पर्यटक वीर सिंह राजपूत ने बताया कि, ''वे अकसर भेड़ाघाट आते हैं लेकिन इस बार भेड़ाघाट में उन्हें बहुत कम पानी नजर आया.''

जबकि आज सोमवती अमावस्या होने की वजह से नर्मदा नदी में पानी छोड़ा गया था. लेकिन उसके बावजूद लोगों को नर्मदा नदी में पत्थर ही पत्थर नजर आ रहे थे. सामान्य तौर पर नदी के यह पत्थर पानी के भीतर डूबे रहते हैं. गर्मी और अमावस्या की वजह से आज नर्मदा के सभी घाटों पर लाखों लोगों ने स्नान किया.''

बारिश कम हुई तो खड़ा हो सकता है जलसंकट
इस साल पहले ही मौसम वैज्ञानिकों ने अल नीनो इफेक्ट के चलते कम बारिश होने की संभावना जताई है. मध्य प्रदेश के बांधों में भी पानी अपने निचले स्तरों तक पहुंच गया है. ऐसी हालत में यदि बारिश कम होती है तो आने वाला साल सभी के लिए कष्टदायक होगा. क्योंकि नर्मदा नदी से कई शहरों को पानी की सप्लाई होती है. नर्मदा नदी की नेहरों से फिलहाल जबलपुर और नरसिंहपुर जिले में सिंचाई हो रही है. आने वाले समय में कटनी और सतना तक इस पानी को पहुंचना है. लेकिन यदि पानी ही कम गिरा तो बांध में पूरा पानी नहीं भर पाएगा, जिसकी वजह से पीने के पानी तक का संकट खड़ा हो सकता है.''

