इंडियन आर्मी के 'अजय' को मिलेगा दम, T72 टैंक जबलपुर में होगा अपग्रेड, नया प्लांट लॉन्च
भारतीय सेना के दमदार हथियार T72 टैंक को जबलपुर में किया जाएगा अपग्रेड, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे फैक्ट्री का भूमिपूजन. विश्वजीत सिंह की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 26, 2026 at 5:23 PM IST
|Updated : August 27, 2026 at 10:37 AM IST
जबलपुर: भारत का 'अजय' टैंक अपग्रेड होने जा रहा है. जी हां जबलपुर में भारतीय सेना के भरोसेमंद T-72 टैंकों को नई ताकत देने की तैयारी शुरू हो गई है. यहां करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से मजबूत हथियार टी72 टैंक की ओवरहॉलिंग वर्कशॉप जबलपुर में बनने जा रही है. इस वर्कशॉप का भूमि पूजन करने के लिए 27 अगस्त को भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जबलपुर आ रहे हैं. टी72 टैंक भारत ने रशिया से खरीदा था. अब इस टैंक को अपग्रेड करने के लिए भारत ने नए संयंत्र बनाए हैं. जिसमें दूसरा संयंत्र जबलपुर में बन रहा है. इस संयंत्र के बन जाने के बाद भारतीय सेना के यह सभी टैंक अपग्रेड करने में बड़ी मदद मिलेगी.
टी72 टैंक की ओवरहॉलिंग के लिए बनेगी वर्कशॉप
व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर के अधिकारी हर्ष भटनागर ने बताया कि, "जबलपुर में टी72 टैंक की ओवरहॉलिंग के लिए वर्कशॉप बनाई जा रही है. जबलपुर व्हीकल फैक्ट्री के 30 से ज्यादा कर्मचारियों ने इसका तकनीकी प्रशिक्षण लिया है और बीते कुछ सालों में दो t 72 टैंक की ओवरहॉलिंग भी की है.''
भारत में फिलहाल तमिलनाडु के अवाडी में T72 टैंक के ओवरहॉलिंग की सुविधा है. लेकिन भारत सरकार का रक्षा मंत्रालय इस सुविधा को जबलपुर में भी विकसित करना चाह रहा है. इसके लिए बीते 4 सालों से प्रयास चल रहे हैं. पहले दौर में कर्मचारियों की ट्रेनिंग हुई अब इसके लिए एक बड़ी वर्कशॉप बनाई जा रही है. जिसमें लगभग 400 करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है, ताकि भारतीय सेना के एक मजबूत और भरोसेमंद हथियार को दोबारा दुरुस्त किया जा सके.

T72 टैंक की खासियत
1960 के दशक में सोवियत संघ ने इस टैंक का उत्पादन शुरू किया था. दरअसल, थल सेना को एक ऐसे हथियार की जरूरत थी जो धरती पर किसी भी परिस्थिति में बिना सड़क के तेजी से दौड़कर युद्ध लड़ सके. उसके ऊपर एक गन लगी हो जो काफी दूर तक गोली फेंक सके. इसके साथ ही इसमें बैठे सैनिक पूरी तरह सुरक्षित हूं. तब रूस ने इस तरह का एक टैंक बनाया जिसे टी72 का नाम दिया गया. इसका उत्पादन सोवियत संघ Uralvagonzavod (UVZ), निज़नी टैगिल में शुरू हुआ था.
अपेक्षाकृत कम ऊंचाई और मजबूत कवच
भारतीय सरकार ने जब इसकी विश्वसनीयता परखी तब इसे भारतीय सेना में भी शामिल किया गया. 1970 के दशक में भारत ने बड़े पैमाने पर इसे खरीदा और भारत ने 1970 के दशक में T-72 को अपनी सेना में शामिल करने का निर्णय लिया. 1980 के दशक की शुरुआत में अवाडी, तमिलनाडु स्थित हैवी व्हीकल फैक्ट्री (HVF) में T-72 का लाइसेंस उत्पादन शुरू हुआ.

भारत में हम इसे अजेय के नाम से जानते हैं. हालांकि 1970 के टी72 और आज के टी 72 में बहुत बड़ा परिवर्तन है. आज के टी72 टैंक को नई युद्ध प्रणाली के अनुसार आधुनिकीकरण किया गया है. इस टैंक में बेहतर फायर-कंट्रोल सिस्टम, नाइट-विजन, संचार प्रणाली, इंजन और सुरक्षा प्रणालियों में सुधार किए गए हैं.

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भारत का रूस के आरओई से अनुबंध
पीआईबी द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह टैंक अब पुराने हो गए हैं और इन्हें नए युद्ध के लिए तैयार करने के लिए अपडेट करना जरूरी है. इसके लिए भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने रूसी संघ की रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (आरओई) के साथ एक अनुबंध किया है. जिसके तहत टी-72 टैंकों के लिए 1000 एचपी इंजन की खरीद की जा रही है. यह डील 248 मिलियन डॉलर की है. ये इंजन पूरी तरह से निर्मित, पूरी तरह से अलग-अलग हिस्सों में और आंशिक रूप से अलग-अलग हिस्सों में उपलब्ध होंगे.

इस समझौते में मेसर्स आरओई, मेसर्स आर्मर्ड व्हीकल्स, निगम लिमिटेड (हेवी व्हीकल फैक्ट्री), अवादी, चेन्नई को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) भी शामिल है. ताकि रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देने के लिए टीओटी के तहत इंजनों का एकीकरण और बाद में लाइसेंस प्राप्त कर उत्पादन किया जा सके.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जबलपुर में करेंगे भूमि पूजन
जबलपुर में बनने वाले ओवरहॉलिंग संयंत्र के भूमि पूजन करने के लिए भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जबलपुर पहुंच रहे हैं. बी जबलपुर में बनने वाली इस वर्कशाप का भूमि पूजन करेंगे. आने वाले 2 सालों में यह वर्कशॉप बनकर तैयार हो जाएगी. T72 टैंक को अपग्रेड किया जा रहा है.
भारतीय सेना में इनकी तादाद हजारों में है. नए टैंक खरीदना एक महंगा सौदा है जबकि पुराने टैंक को मात्र एक से डेढ़ करोड़ की लागत में अपडेट किया जा सकता है. इससे भारतीय सेना की ताकत बढ़ेगी. जबलपुर इस मामले में अहम रोल अदा करेगा.

