पुल गिरने के बाद भी भोपाल से जबलपुर पहुंचने का है दूसरा रास्ता, राजस्थान का ठेकेदार ब्लैकलिस्टेड
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने ठेकेदार को किया ब्लैकलिस्टेड, एमपीआरडीसी के 2 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर के निर्देश. मरम्मत में लगेगा 1 माह का समय.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 24, 2026 at 1:58 PM IST
जबलपुर: रेलवे ओवर ब्रिज का एक हिस्सा गिरने के 2 दिन बाद मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. इस मामले में ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया गया और अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर करने के निर्देश दे दिए गए हैं. पीडब्ल्यूडी मंत्री ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए 1 माह में दोबारा सड़क शुरू करने का आश्वासन दिया है.
2 दिन पहले गिरा था रेलवे ओवर ब्रिज का हिस्सा
जबलपुर और भोपाल को सीधा जोड़ने के लिए नेशनल हाईवे 45 को तैयार किया गया था. इस पर फोरलेन रोड बनाई गई थी. यह सड़क अभी 1 साल पहले ही पूरी हुई है लेकिन इसी बीच में इसके घटिया निर्माण के संकेत मिलना शुरू हो गए थे. 3 महीने पहले शाहपुरा के पास रेलवे ओवर ब्रिज का एक हिस्सा गिर गया था. इसी रेलवे ओवर ब्रिज का एक दूसरा हिस्सा चालू था लेकिन 2 दिन पहले वह भी गिर गया अब यह सड़क पूरी तरह से बंद हो गई है.
भोपाल-जबलपुर के वैकल्पिक रास्ते
रेलवे ओवर ब्रिज का एक हिस्सा गिरने के बावजूद यदि किसी को जबलपुर से भोपाल के बीच में यात्रा करनी है तो उसके पास एक वैकल्पिक रास्ता है. इसमें भोपाल से शाहपुरा तक नेशनल हाईवे 45 से पहुंचा जा सकता है और उसके बाद शहपुरा से पाटन होते हुए जबलपुर आया जा सकता है. इस रास्ते से 10 किलोमीटर ज्यादा सफर तय करना होग. लेकिन फिलहाल अगले 2 माह तक यही विकल्प मौजूद है.

एक दूसरा रास्ता जबलपुर से नरसिंहपुर तक स्टेट हाईवे के जरिए पहुंचा जा सकता है. यहां से नेशनल हाईवे पकड़कर राजमार्ग के पास दोबारा नेशनल हाईवे 45 के जरिए भोपाल की यात्रा की जा सकती है.
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का बयान
पुल गिरने के 2 दिन बाद मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने अपना बयान सोशल मीडिया के जरिए सार्वजनिक किया है. उन्होंने पुल की रिटेनिंग वॉल के गिरने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि "अगले एक माह में यह सड़क दोबारा चलने लायक हो जाएगी. वहीं बांगड़ कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है. इसी कंपनी ने इस पुल का निर्माण किया था. ठेकेदार और एमपीआरडीसी के 2 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश भी हुए हैं."

400 करोड़ की सड़क नहीं चली 4 साल
जबलपुर से भोपाल के बीच में 320 किलोमीटर रोड 400 करोड़ की लागत से बनी. इसमें जबलपुर के बाईपास से लेकर हिरन नदी तक का हिस्सा एमपीआरडीसी की देखरेख में राजस्थान की बांगड़ इन्फ्रास्ट्रक्चर ने बनाया था. इस सड़क की लागत लगभग 400 करोड़ रुपए थी. पहले सीमेंट की यह सड़क चटक गई थी और उसमें मोटी-मोटी दरारें आ गई थी और अब यह रेलवे ओवरब्रिज का एक हिस्सा गिर गया. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार का बहुत पैसा अभी भी जमा है इसलिए यह काम उसी पैसे से होगा लेकिन इसके बावजूद अब इस निर्माण कार्य पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं.
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जानकारों का कहना है कि नई तकनीक में रेडीमेड ब्लॉक को जोड़ा जा रहा है, इससे काम तेजी से तो होता है लेकिन इसकी गुणवत्ता पर हमेशा सवाल खड़ा रहता है. जबलपुर में इसके पहले इसी तरह बारेला के पास एक पुल की दीवार गिर गई थी. कुछ इसी तरह की घटना भोपाल के पास में भी हुई थी, जहां रेडीमेड ब्लॉक को जोड़कर सड़क को बनाया गया था.

