जबलपुर के टीचर से 70 लाख का फंड ऐंठने का डर्टी फंडा, पत्नी के दोस्त ने बचाया 70 लाख
जबलपुर में सेवानिवृत्त टीचर और उनके पति का साइबर ठगों द्वारा डिजिटल अरेस्ट, पुलवामा हमले में शामिल होने की बात कहकर मांगा 70 लाख.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 10, 2025 at 5:07 PM IST
|Updated : December 10, 2025 at 5:34 PM IST
जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में बीते कुछ दिनों में डिजिटल अरेस्ट कर 2 करोड़ से ज्यादा की ठगी हुई है. ताजा मामला शहर के भाई का बगीचा इलाके में सामने आया है. यहां रिटायर्ड टीचर अमिता ग्रेब्रियल और उनके पति को साइबर ठगों ने पूरे दिन डिजिटल अरेस्ट कर रखा. साइबर ठगों ने लगातार बुजुर्ग दंपत्ति को धमकाया कि उनके बैंक खाते में आतंकवादी गतिविधि के लिए 70 लाख रुपए भेजे गए हैं. गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें तुरंत 70 लाख रुपए वापस करना होगा.
रिटायर्ड शिक्षिका को साइबर ठगों ने बनाया निशाना
रिटायर्ड शिक्षिका अमिता गेब्रियल और उनके पति शहर के भाई का बगीचा क्षेत्र में रहते हैं, उनके साथ में कोई भी युवा सदस्य नहीं रहता है. बीते 6 दिसंबर को उनके पास एक वीडियो कॉल आया, जिसमें फोन करने वाले ने बताया कि वह दिल्ली से एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड एटीएस से बोल रहा है. आरोपियों ने बुजुर्ग महिला को बताया कि पुलवामा अटैक के मामले में एक जांच चल रही है. जांच में पाया गया है कि पुलवामा अटैक के लिए 7 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है. इसमें से 70 लाख रुपया आपके बैंक अकाउंट में आया था, इसलिए आपके सभी बैंक खाते सीज किए जा रहे हैं.
70 लाख रुपए ट्रांसफर करने का दबाव
आरोपियों ने बुजुर्ग दंपती को धमकाते हुए कहा कि वे किसी से बात ना करे और घर के दरवाजों को बंद रखे. इसके अलावा घर से बाहर ना निकले और खिड़कियों पर भी परदे डाल दें. आरोपियों ने पीड़ित अमिता के नंबर पर एक ग्रुप का इनफार्मेशन भेजा और इसमें उन्हें ज्वाइन कर दिया. अमिता और उनके पति बहुत ज्यादा डर गए. हालांकि इस पूरी वारदात के दौरान पैसे का ट्रांजैक्शन नहीं हुआ था. लेकिन अब आरोपी फर्जी एटीएस अधिकारी बनकर पीड़िता अमिता पर दबाव बना रहा था. साइबर ठगों ने महिला से कहा कि मैं आपको रिजर्व बैंक से जुड़ा एक खाता दे रहा हूं, इसमें आप पूरा पैसा ट्रांसफर कर दें, यहां सारा पैसा सुरक्षित रहेगा.
एडवोकेट संग थाने पहुंची महिला
पीड़ित अमिता अपने घर से बैंक जाने के लिए निकली ताकि पैसे को ट्रांसफर किया जा सके. लेकिन इस दौरान रास्ते में उनकी मुलाकात उनके मित्र एडवोकेट अनिल मिश्रा से हो गई. उन्होंने अनिल मिश्रा को अपनी परेशानी बताई. अनिल मिश्रा ने बताया कि "वह नगर निगम के एडवोकेट रहे हैं और फिलहाल रिटायर हो चुके हैं. लेकिन अभी भी प्रैक्टिस करते हैं. उन्हें जैसे ही यह बात पता लगी तो वह तुरंत अमिता को पुलिस के पास लेकर पहुंचे. जहां बुजुर्ग ने अपनी पूरी कहानी पुलिस को सुनाई."
पुलिस के पहुंचते ही आरोपियों ने किया फोन कट
एडिशनल एसपी जितेंद्र सिंह ने बताया कि "जब अमिता गेब्रियल मेरे पास पहुंची थी तो बेहद डरी हुई थी और कांप रही थीं. उनकी आवाज तक नहीं निकल पा रही थी. मैं तुरंत अमिता संग उनके घर पहुंचा. डिजिटल अरेस्ट करने वाले लोगों से बातचीत की. बदमाश इतने सेट थे कि उन्होंने मुझ से भी बात की, लेकिन मैं घबराया नहीं. लेकिन बाद में जब आरोपियों को इस बात का एहसास हुआ कि पुलिस मौके पर पहुंच गई है. तब जाकर उन्होंने फोन डिस्कनेक्ट किया."
ह्यूमन ट्रैफिकिंग का डर दिखाकर 76 लाख की ठगी
जितेन सिंह ने आगे बताया कि "इस घटना की समय पर पुलिस को जानकारी मिल गई. इसलिए ठगी का शिकार होने से महिला बच गई. लेकिन कई मामले ऐसे भी होते हैं कि जिनमें डिजिटल अरेस्ट हुए लोगों ने पैसा ट्रांसफर कर दिया. अब तक उन्हें पैसा वापस नहीं मिला है. ठीक इसी तरह के मामले में एसबीआई के एक रिटायर्ड अधिकारी से 5 दिन पहले ही 31 लाख रुपए की ठगी की गई है. ऐसे ही ह्यूमन ट्रैफिकिंग का डर दिखाकर एक बुजुर्ग से लगभग 76 लाख रुपए ठग लिए. जबलपुर में बीते कुछ दिनों में ही सीबीआई ईडी और एटीएस के अधिकारी बनकर 2 करोड़ से अधिक का फ्रॉड किया जा चुका है."
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पुलिस का कहना है कि लोगों को डिजिटल अरेस्ट से डरना नहीं चाहिए. यदि ऐसी कोई स्थिति बनती है तो सीधे पुलिस से संपर्क करना चाहिए. ऐसे में लोगों का पैसा बच सकता है. कोई भी एजेंसी फोन पर आपसे इन्वेस्टिगेशन नहीं कर सकती है. इसलिए फोन पर किसी को भी अपनी व्यक्तिगत जानकारी ना दें.

