जबलपुर के शातिर अपराधियों ने क्राइम करने के बाद बदले भेष, एक बना मजदूर तो दूसरा साधु
जबलपुर पुलिस ने गंभीर अपराधों में फरार दो बदमाशों को किया गिरफ्तार. एक को सूरत तो दूसरे को उज्जैन से पकड़ा. विश्वजीत सिंह की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 25, 2026 at 3:56 PM IST
जबलपुर: ये सच्ची कहानी जबलपुर के दो ऐसे शातिर अपराधियों की है, जो क्राइम करने के बाद भेष बदलकर लगातार पुलिस को चकमा देते रहे. दोनों जबलपुर से काफी दूर भेष बदलकर रह रहे थे. जबलपुर की रांझी पुलिस ने एक को सूरत और दूसरे को उज्जैन से दबोच लिया. दोनों का शहर में जुलूस निकाला गया ताकि अपराधियों में डर पैदा हो.
मकान बेचने 2 लाख लिए, फिर धमकाने लगा
जबलपुर के इंदिरा आवास कॉलोनी में रवि कोरी ने 5 लाख रुपए में एक मकान खरीदा था. इस मकान को तरुण पटेल और उसके साथियों ने बेचा था. इस मकान के रवि कोरी ने ₹2 लाख दे दिए थे. वह रजिस्ट्री करवाना चाहता था लेकिन तरुण पटेल और उसके साथी रजिस्ट्री करने को तैयार नहीं थे, बल्कि उन्होंने मकान बेचने से ही मना कर दिया और पैसे वापस देने के बजाय विवाद करने लगे. 19 मई 2026 को तरुण ने रवि के सिर पर जानलेवा हमला किया और जबलपुर से फरार हो गया.
जबलपुर के नंबर की गाड़ी देख छुप जाता था
जबलपुर के रांझी थाने के पुलिस इंस्पेक्टर उमेश गोलानी ने बताया "तरुण को गुजरात से गिरफ्तार किया गया है. उसने बताया कि शुरुआत में उसने जबलपुर के ही आसपास के जिलों में फरारी काटी लेकिन उसके बाद वह जबलपुर से गुजरात चला गया. गुजरात में भी वह छुपा हुआ था. जब भी वह जबलपुर से आने वाली गाड़ियों का नंबर देखाता था तो वह छुप जाता था. वहां उसने भेष बदला और मजदूरी करने लगा."

जबलपुर एसपी ने 5 हजार का इनाम रखा था
टीआई उमेश गोलानी ने बताया "उनकी टीम कई बार सूरत गई लेकिन उसे नहीं पकड़ पाई. इस बार उन्होंने तरीका बदला और भी गुजरात के नंबर की ही गाड़ी से वहां पहुंचे. उसके बाद जाकर तरुण पटेल को पकड़ पाए. तरुण पटेल पर हत्या के प्रयास और गुंडा वसूली का मामला दर्ज है. जबलपुर पुलिस अधीक्षक ने तरुण पटेल के ऊपर ₹5000 का इनाम भी घोषित किया था. रांझी पुलिस ने ही दूसरे बदमाश प्रवीण रजक को भी दबोचा. प्रवीण को उज्जैन से पकड़ा गया."
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उज्जैन में साधु के रूप में रहने लगा
प्रवीण रजक पर गुंडा वसूली लूटपाट और चोरी करने के लगभग 19 मामले दर्ज हैं. प्रवीण रजक भी अपराध करने के बाद भेष बदल लेता था. वह साधु बन जाता था. शुरुआत में वह जबलपुर में ही नर्मदा घाट पर साधु बनकर रहा लेकिन जब उसे लगा कि वह पकड़ा जाएगा तो वह उज्जैन चला गया और वहां पर भी वह साधु के भेष में रह रहा था. उसने बताया कि साधु-संतों को पकड़ने में पुलिस को खासी परेशानी होती है. इसीलिए उसने साधु का भेष रख लिया.

