बच्चों की दवा लैब टेस्ट में फेल, डेढ़ साल में आई रिपोर्ट, सरकारी अस्पतालों में बंट रही थीं पेरासिटामोल
पेरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन नाम की दवा टेस्ट में फेल, जबलपुर के सरकारी अस्पतालों में बच्चों को बुखार कम करने बांटी जा रही थी दवा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : April 24, 2026 at 5:13 PM IST
जबलपुर: सरकारी अस्पतालों में बांटे जाने वाला पेरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईपी दवाई का एक बैच लैब टेस्टिंग में गुणवत्ता पर खरा नहीं उतरा है यानि अमानक निकला है. जबलपुर के सीएमएचओ नवीन कोठारी ने बताया कि 1 साल पहले यह दवा टेस्टिंग के लिए भेजी गई थी. रिपोर्ट आने के बाद अब इस दवा को मरीज को देने से रोक दिया जाएगा.
बच्चों को बुखार में दी जाने वाली दवा लैब टेस्ट में फेल
जबलपुर के सीएमएचओ डॉक्टर नवीन कोठारी ने बताया, "पेरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईपी नाम की दवा सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो गई है. बच्चों को बुखार खत्म करने के लिए यह दवा दी जाती है. इस दवा का निर्माण मेसर्स जनिथ ड्रग्स लिमिटेड इंदौर ने किया था."
2024 में भेजे सैंपल की रिपोर्ट 2026 में मिली
सीएमएचओ डॉक्टर नवीन कोठारी ने बताया, "सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाइयां दी जाती हैं. यह दवाइयां पहले ही एनएबीएल लैब के जरिए टेस्ट होकर आती हैं. लेकिन इसके बावजूद स्टोर में मौजूद दवाइयां का दूसरी बार भी परीक्षण किया जाता है. हम स्टोर में मौजूद कोई भी 5 दवाइयां के सैंपल टेस्ट के लिए भेजते हैं. 2024 के अंतिम महीने में पेरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईपी का सैंपल जांच के लिए भोपाल में ड्रग टेस्टिंग लैबोरेट्री भेजा गया था. इसकी रिपोर्ट अभी आई है. अगस्त 2026 में यह दवा एक्सपायर होने वाली है."

'बच्चों को को देने लायक नहीं है दवा'
सीएमएचओ डॉक्टर नवीन कोठारी का कहना है कि "इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि यह दवा बच्चों को देने लायक नहीं है, क्योंकि इस दवा को क्लम्स के कारण अमानक किया गया है. पेरासिटामोल चाशनी जैसा रहता है उसमें क्रिस्टल आ गए हैं. इन्हे ही क्लम्स बोलते हैं. इसी कारण इसे अमानक किया गया है.
इस रिपोर्ट में निर्देश हैं कि इस दवा को वापस मंगा लिया जाए और आगे इस्तेमाल न किया जाए. हालांकि रिपोर्ट में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि दवा देने से बच्चों को कोई नुकसान हो सकता है या नहीं.
अब यह दवा जहां-जहां भी भेजी गई है वहां से जानकारी ली जा रही है और इसे मरीज के देने पर तुरंत रोक लगा दी गई है और इसे वापस मंगाया जा रहा है."
रिपोर्ट आने में लगा डेढ़ साल से ज्यादा समय
इस दवाई का सैंपल 2024 में भोपाल में ड्रग टेस्टिंग लैबोरेट्री जांच के लिए भेजा गया था. उसकी रिपोर्ट आने में डेढ़ साल से ज्यादा का समय लग गया. ऐसे में यह दवा कई बच्चों को बीते डेढ़ साल से सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में बांटी जा रही थी और हजारों बच्चों ने इसे पीया होगा. गनीमत रही कि इसका कोई नुकसान नहीं हुआ.
- साल 2025 ने मध्य प्रदेश को दिया न भरने वाला जख्म, छिंदवाड़ा में 21 घरों के बुझे चिराग
- कोल्ड्रिफ कफ सिरप मामले में बड़ा खुलासा, विसरा रिपोर्ट से मासूमों की मौतों का सच उजागर
- जहरीली कफ सिरप कांड में बड़ा खुलासा, विदेश भागने की फिराक में था कंपनी का मालिक
छिंदवाड़ा में जा चुकी है कई बच्चों की जान
मध्य प्रदेश में इसी तरह की एक कफ सीरप की वजह से कई बच्चों की जान चली गई थी. यह मामला पिछले साल का है, जब छिंदवाड़ा में अमानक कफ सिरप पीने की वजह से 21 बच्चों की जान चली गई थी.

