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मध्य प्रदेश में बच्चों का कैंसर हुआ 'छू मंतर', राज्य कैंसर संस्थान का सक्सेज रेट 90%

जबलपुर नेताजी सुभाष चंद्र मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक कैंसर के डॉक्टर्स का कमाल, 2 सालों में 300 से ज्यादा बच्चों के कैंसर का किया इलाज.

JABALPUR CHILDREN CANCER TREATMENT
मध्य प्रदेश के राज्य कैंसर संस्थान का कमाल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : December 22, 2025 at 8:43 PM IST

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Updated : December 22, 2025 at 8:57 PM IST

7 Min Read
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जबलपुर: राज्य कैंसर संस्थान के पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड के डॉक्टरों ने कमाल कर दिखाया है. पिछले दो सालों में उनके वार्ड में 316 बच्चों का कैंसर का इलाज किया गया. इसमें से लगभग 270 बच्चे पूरी तरह ठीक हैं. कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की टीम ने जीत हासिल की है. इस संस्थान में पूरे मध्य प्रदेश से कैंसर पीड़ित बच्चे इलाज करवाने के लिए भेजे जाते हैं.

एमपी का सबसे बड़ा संस्थान नेताजी सुभाष चंद्र मेडिकल कॉलेज

जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में राज्य कैंसर संस्थान है. मध्य प्रदेश में कैंसर पर इलाज और शोध करने वाला यह मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा संस्थान है. इस संस्थान में 8 अलग-अलग वार्ड हैं. इन्हीं में से एक वर्ड पीडियाट्रिक कैंसर का है, यह शब्द विशेष रूप से बच्चों में होने वाले कैंसर के इलाज के लिए बनाया गया है. इस वार्ड को असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर श्वेता पाठक की टीम देखती है.

राज्य कैंसर संस्थान का कमाल (ETV Bharat)

2 साल में 300 में से 270 बच्चे हुए स्वस्थ

डॉक्टर श्वेता पाठक का दावा है कि "पिछले 2 सालों में कैंसर से पीड़ित 300 से ज्यादा बच्चे उनके वार्ड में आए और इसमें से लगभग 270 बच्चे पूरी तरह ठीक होकर यहां से गए. डॉक्टर श्वेता पाठक का कहना है कि हमारा सक्सेस रेट 90% है. उन्होंने बताया बच्चों के कैंसर के मामले में आम आदमी के साथ ही डॉक्टर में भी जागरूकता की कुछ कमी है. इसलिए हमने जब इस बात की शुरुआत की थी. तब मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र के डॉक्टर को बुलाकर सेमिनार किए थे, ताकि बच्चों में होने वाले कैंसर को शुरुआती स्तर पर ही पहचान लिया जाए.

सबसे ज्यादा बोन मैरो कैंसर या ब्लड कैंसर

डॉक्टर श्वेता पाठक का कहना है कि उनके पास सबसे ज्यादा मामले बच्चों में बोन मैरो या ब्लड कैंसर के आते हैं. जिन बच्चों को लगातार कमजोरी हो रही है, वे जल्दी थक जाते हैं. खून की जांच में लाल रक्त कणिकाओं (रेड ब्लड सेल्स) की कमी हीमोग्लोबिन की कमी जैसी स्थिति बनी रहती है. ऐसे बच्चों को डॉक्टर को तुरंत यह सलाह देनी चाहिए की वे एक बार बोन मैरो कैंसर की जांच करवा लें. डॉक्टर पाठक का कहना है कि यदि बच्चों में बहुत जल्दी इस बात की जानकारी हो जाए कि किसी बच्चे को ब्लड कैंसर है, तो उसे ठीक किया जा सकता है. बड़ों की अपेक्षा बच्चों में ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है.

JABALPUR CHILDREN CANCER TREATMENT
राज्य कैंसर संस्थान (ETV Bharat)

जबलपुर में हुआ बच्चे का बोन मैरो ट्रांसप्लांट

डॉक्टर श्वेता के मुताबिक उनके पास बोन मैरो ट्रांसप्लांट हाई लेवल कीमोथेरेपी जैसे बेहद अत्याधुनिक तरीके हैं, जिनके जरिए बच्चों के कैंसर को ठीक किया जा सकता है. भोपाल से आए एक मरीज बच्चे के पिता ने बताया कि "वह अपने बच्चों का इलाज कई जगह करवा चुके हैं. यहां तक की भोपाल एम्स में भी यह सुविधा नहीं है, जो जबलपुर के राज्य कैंसर संस्थान में है. उनके बच्चे का बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ है."

डॉक्टर ने बताए कैंसर के लक्षण

डॉक्टर पाठक ने बताया कि अभी तक सबसे ज्यादा मामले ब्लड कैंसर के आए हैं, लेकिन पेट में ट्यूमर की समस्या भी एक बड़ी समस्या है. यदि किसी बच्चे के पेट में छूने से ट्यूमर का एहसास होता है, तो ऐसे बच्चों को तुरंत कैंसर की जांच करवानी चाहिए. शुरुआती स्तर पर पाए गए ट्यूमर को इलाज द्वारा पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.

इसी के साथ मस्तिष्क में ट्यूमर या आंख का सफेद होना भी कैंसर के प्रकार हैं. यदि किसी बच्चे की आंख सफेद हो रही है और वह तिरछा देखता है, तो ऐसे बच्चों में एक ट्यूमर डेवलप होता है. यदि किसी बच्चे की आंख में ऐसी समस्या नजर आए तो उसे शुरुआती स्तर पर ही दिखा लेना चाहिए, क्योंकि बड़े होने पर इसके ठीक होने की संभावना घट जाती है. इसी तरह उन्होंने बताया कि यदि किसी बच्चे को चक्कर आते हैं. मिर्गी की समस्या है या फिर वह बेहोश हो जाता है, तो हो सकता है कि उसके मस्तिष्क में कोई ट्यूमर हो. इसकी जांच भी यदि शुरुआती स्तर पर हो जाए, तो ऐसे बच्चों को भी पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.

JABALPUR PEDIATRIC CANCER HOSPITAL
पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड (ETV Bharat)

बच्चों में कैंसर की क्या है वजह

बड़े लोगों में कैंसर की कई वजह सामने आती है. उनमें उनके खान-पान से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन बच्चों में कैंसर क्यों हो रहा है. यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है. इसमें हम अपने खान-पान में फर्टिलाइजर प्लास्टिक और दूसरी वजहों को मान सकते हैं. जिसकी वजह से गुणसूत्र के स्तर पर परिवर्तन हो रहे हैं. जो बाद में शरीर में कैंसर पैदा कर रहे हैं. अभी तो हम इनके लक्षण ही देखने के बाद इनका इलाज शुरू कर पाते हैं.

उत्तर प्रदेश से भी जबलपुर आ रहे मरीज

राज्य कैंसर संस्थान में पूरे प्रदेश से मरीज आते हैं. डॉक्टर ने बताया कि कुछ दूर दराज जिले जैसे सीधी, सिंगरौली से जो मरीज आ रहे हैं. उनकी हालत पहले से खराब रहती है, क्योंकि वे कैंसर के बिगड़ने की स्थिति में यहां पहुंचते हैं, लेकिन कटनी, सागर, दमोह जैसे जिलों में अब जागरूकता आ गई है. यहां से मरीज शुरुआती स्तर पर ही हमारे पास आ जाते हैं. जिससे हम उन्हें बेहतर इलाज दे पाते हैं. हमारे संस्थान में तो उत्तर प्रदेश से तक मरीज आ रहे हैं.

राज्य कैंसर संस्थान में इलाज फ्री

बच्चों में कैंसर का इलाज लंबा चलता है, लेकिन राज्य कैंसर संस्थान में पूरा इलाज फ्री है. यहां हमारी मुलाकात विश्वेंद्र सिंह से हुई. विश्वेंद्र एक सोशल वर्कर काउंसलर हैं. वे दिल्ली के एक एनजीओ के लिए काम करते हैं, जो कैंसर के मरीजों को जांच और दवाई में आर्थिक मदद करता है. यहां दो और काउंसलर वार्ड में ही बैठे थे, जो पीड़ित बच्चों के परिवार को 6 महीने तक खाने-पीने और रहने की सुविधा देता है. कैंसर के इलाज में जबलपुर में अभी पेट स्कैन की सुविधा नहीं है, इसलिए एनजीओ की मदद से निजी अस्पतालों से पेट स्कैन करवाने के बाद डॉक्टर मरीज को इलाज दे पाते हैं.

जबलपुर पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड में 24 बेड

जबलपुर के पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड में 24 बेड हैं. डॉक्टर श्वेता पाठक का कहना है कि पूरे साल कोई बिस्तर खाली नहीं रहता. राज्य कैंसर संस्थान में अभी भी पेट स्कैन जैसी सुविधा नहीं है, जबकि कैंसर संस्थान के पास 100 करोड़ से ज्यादा का फंड बैंक में है. जरा सोचिए एक वार्ड के डॉक्टर ने पूरी ईमानदारी से काम किया तो सैकड़ों बच्चों की जान बच गई. यदि यह संस्थान अपनी पूरी सुविधाओं का सही इस्तेमाल करे, तो कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में गरीब आदमी को मदद मिल जाए.

Last Updated : December 22, 2025 at 8:57 PM IST