छोटा कद, बड़ी पहचान, A2 मिल्क वाली महाकौशल की बौनी गाय बनी भारत की 57वीं देसी नस्ल
महाकौशल गाय को मिली आनुवांशिक पहचान. जबलपुर के पशु वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता. करनाल नेशनल ब्यूरो ने दी मान्यता. विश्वजीत सिंह राजपूत के साथ आलोक कुमार श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 21, 2026 at 10:43 PM IST
|Updated : August 22, 2026 at 3:51 PM IST
जबलपुर: महाकौशल गाय अब गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी नस्लों की श्रेणी में शामिल हो गई है. करनाल स्थित नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज (NBAGR) ने देसी 'महाकौशल गाय' को एक अलग स्थानीय नस्ल के तौर पर मान्यता दी है. यह भारत की 57वीं रजिस्टर्ड देसी मवेशी नस्ल बन गई है. जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस पर शोध किया है.
मध्य प्रदेश की देसी गोवंश की 5वीं नस्ल रजिस्टर्ड
मध्य प्रदेश की 5वीं रजिस्टर्ड देसी गोवंश की नस्ल महाकौशली गाय है. जिसे नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के शोध के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर देश की 57वीं पंजीकृत देसी गोवंश की मान्यता मिली है.
मध्य प्रदेश में भी गाय की 4 ऐसी प्रजातियां हैं, जिनकी विशेषता और आनुवंशिक पहचान अलग है. अब इस सूची में पांचवीं गाय महाकौशल गाय भी शामिल हो गई है, जिसे आईसीएआर (ICAR) ने अपनी सूची में शामिल किया है. जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस पर शोध किया है.
रिसर्चर डॉ. मोहन सिंह ने बताया, "यह छोटे कद की गाय है, जो जबलपुर, मंडला और डिंडोरी से लेकर अमरकंटक तक के इलाके में पाई जाती है और यह A2 दूध देती है. देश की दूसरी नस्लों की तरह, अब इस नस्ल को बेहतर बनाने का काम भी किया जाएगा."
मध्य प्रदेश की देसी गाय की 4 प्रजातियां पहले से हैं रजिस्टर्ड
मध्य प्रदेश की 5वीं रजिस्टर्ड देसी गोवंश की नस्ल महाकौशली गाय है. लेकिन मध्य प्रदेश के गायों की 4 देसी नस्लें पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर रजिस्टर्ड हैं.
इनमें पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की मालवी गाय की नस्ल शामिल है. यह नस्ल दूध के विशिष्ट लक्षणों के साथ अपनी मजबूती के लिए पहचानी जाती है.

निमाड़ क्षेत्र खंडवा, खरगोन, बड़वानी की निमाड़ी नस्ल भी शामिल है. यह नस्ल गिर और खिलारी नस्लों के संकरण से विकसित हुई आनुवंशिक रूप से विशिष्ट नस्ल है.
केनकथा नस्ल बुंदेलखंड क्षेत्र छतरपुर, पन्ना, सागर में पाई जाती है. यह गोवंश नस्ल अपनी सहनशीलता और विशिष्ट शारीरिक बनावट के लिए जानी जाती है.
गाओलाओ नस्ल्ल मुख्य रूप से छिंदवाड़ा, पांढुर्ना और महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों में पाई जाती है.

नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में हुई रिसर्च
जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय ने महाकौशली गाय को लेकर लगभग 5 साल रिसर्च की गई. इस रिसर्च के बाद देसी गाय की रजिस्टर्ड श्रेणी में एक नई गाय महाकौशली गाय भी शामिल हो गई है.

नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और प्रोफेसर डॉ मोहन सिंह ने बताया, "जबलपुर से लेकर अमरकंटक के इलाके में आदिवासियों और किसानों के घरों में एक विशेष किस्म की गाय की प्रजाति उन्होंने देखी थी. यह गाय लगभग हर घर में मिलती थी. इसके बाद उन्होंने आज से लगभग 5 साल पहले 2020-21 में इस गाय पर काम शुरू किया था."
'15000 गायों में लगभग एक सी प्रजाति की विशेषताएं'
प्रोफेसर डॉ मोहन सिंह ने बताया, "महाकौशली गाय एक छोटे कद की गाय है. इसके रंग रूप बनावट को लेकर हमने अध्ययन किया तो लगभग 15000 गायों में लगभग एक सी प्रजाति की विशेषताएं पाई गईं. इसके साथ ही इनके आनुवांशिक गुणों का अध्ययन भी किया गया. उनके ब्लड सैंपल लिए गए और उन्हें देश की दूसरी प्रजातियों से मिलाया गया तो महाकौशल की गाय की प्रजाति बिलकुल अलग पाई गई."
डॉ मोहन सिंह का कहना है, "यह गाय महाकौशल इलाके के प्राकृतिक वातावरण में बड़ी आसानी से पल जाती है. सदियों से किसानों के लिए यह गाय उपयोगी रही है, हालांकि इसमें दूध उत्पादन की मात्रा फिलहाल कम है लेकिन किसान इसे घरेलू उपयोग के लिए पालते हैं. किसान इस गाय से पैदा हुए बछड़ों को बैल के रूप में उपयोग में लाते हैं.
'महाकौशली गाय का दूध A2 मिल्क'
प्रोफेसर डॉ मोहन सिंह ने बताया, "रिसर्च के दौरान हमारी टीम ने इस गाय के दूध और घी पर भी अध्ययन किया है. इस गाय का दूध A2 मिल्क है और उसकी क्वालिटी बहुत ही अच्छी है. इसके साथ ही इसका घी किसी औषधि से कम नहीं है, उसकी सुगंध और स्वाद बाजार में मिलने वाले घी से कहीं बेहतर है." उन्होंने बताया कि "A2 मिल्क गाय के दूध का एक प्रकार है, जिसमें विशेष रूप से सिर्फ A2 बीटा-केसीन प्रोटीन होता है. इस A2 दूध को पीने के कई जबरदस्त फायदे हैं. भारत में कुछ खास देसी नस्ल की गायों में A2 बीटा-केसीन प्रोटीन प्राप्त होता है."

A2 Milk की खासियत
प्रोफेसर डॉ मोहन सिंह के अनुसार, "A2 मिल्क गाय के दूध का एक प्रकार है, जिसमें विशेष रूप से A2 बीटा-केसीन प्रोटीन होता है. जिस गाय के दूध में केवल A2 बीटा-केसीन होता है, उसे A2 मिल्क कहा जाता है. A2 बीटा-केसीन प्रोटीन मुख्य रूप से भारतीय देशी नस्ल की गायों से प्राप्त होता है. देशी नस्ल की गाय के इस दूध में A1 प्रोटीन नहीं होता है."
सामान्य दूध में A1 और A2 दोनों तरह के बीटा-केसीन प्रोटीन मिक्स होते हैं. लेकिन A2 मिल्क में केवल A2 बीटा-केसीन प्रोटीन पाया जाता है. A1 प्रोटीन पचने के दौरान बीसीएम-7 नामक पेप्टाइड बनाता है. जिससे पेट में भारीपन या परेशानी हो सकती है. सामान्य दूध पीने के बाद जिन लोगों को पेट में गैस या सूजन की शिकायत होती है,उन्हें A2 दूध पीना अच्छा माना गया है. A2 मिल्क में बीसीएम-7 नामक पेप्टाइड पेप्टाइड नहीं बनता है. यह दूध पेट के लिए हल्का होता है और इसे पचाना आसान होता है. यह मिल्क शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाता है.

'कई स्तर की जांच के बाद रजिस्टर्ड हुई महाकौशल गाय की नस्ल'
नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ मनदीप शर्मा ने बताया, "करनाल स्थित नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज (ICAR-NBAGR) मैं हमारा दावा कई स्तर पर जांचा गया और इसके बाद महाकौशल गाय को देश की 57वीं देशी गाय की प्रजाति में रजिस्टर्ड करवाने में सफलता मिली."

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'आने वाले समय में किसानों को मिलेगा फायदा'
कुलगुरु डॉ मनदीप शर्मा ने बताया, "महाकौशल गाय को रजिस्टर करवाने से किसानों को बहुत फायदा होगा क्योंकि अब इस गाय की प्रजाति के वर्गीकरण और बेहतर नस्ल प्रबंधन पर काम शुरू होगा. इसके साथ ही इसके दूध के अच्छे दाम मिलेंगे और दूध उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए इस पर भी शोध किया जाएगा. अभी मध्य प्रदेश की कई और ऐसी देशी प्रजातियां हैं जिन्हें वे पहचान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं."


