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कैंसर की अंतिम कोशिका खोजने की तकनीक है प्रोसेटोमेट्री, मॉलेक्युलर पैथोलॉजी को लेकर मंथन

जबलपुर में जुटे देश के जाने-माने पैथोलॉजिस्ट. पैथालॉजी के क्षेत्र में हो रहे नए शोध पर चर्चा. सेल्यूलर मोरफोलॉजी से एडवांस्ड टेक्निक है मॉलेक्युलर पैथोलॉजी.

JABALPUR PATHCON 2026
जबलपुर में जुटे देश के जाने-माने पैथोलॉजिस्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 9, 2026 at 8:30 PM IST

4 Min Read
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जबलपुर: किसी भी बीमार आदमी का इलाज सबसे पहले पैथोलॉजिस्ट की जांच से शुरू होता है. पैथोलॉजी की जांच में भी लगातार नए शोध हो रहे हैं. इन्हीं नए प्रयोग पर चर्चा करने के लिए जबलपुर में 400 पैथोलॉजिस्ट एक साथ इकट्ठे हुए हैं, जो बीमारी की जड़ तक पहुंचने वाले कारकों का पता लगा रहे हैं. इन लोगों के पास कैंसर और दूसरी घातक बीमारियों के निदान के कई सटीक तरीके हैं.

जबलपुर में जुटे देश के जाने-माने पैथोलॉजिस्ट

जबलपुर में पैथोलॉजी से जुड़े हुए देश के जाने-माने 20 विशेषज्ञ जबलपुर आ रहे हैं. यह सभी लोग जबलपुर में जबलपुर मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी के छात्रों के साथ ही मध्य प्रदेश के पैथोलॉजिस्ट को पैथोलॉजी की फील्ड में होने वाले नए प्रयोग नई मशीनों और उनके शोध के बारे में जानकारी देंगे. 3 दिनों तक यह कॉन्फ्रेंस चलेगी इसमें 20 शोध पत्र पढ़े जाएंगे.

इस आयोजन में कोकिलाबेन हॉस्पिटल मुंबई, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल बॉम्बे, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल कोलकाता, एआईआईएमएस दिल्ली, एम्स रायपुर, किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ उसके अलावा कई नेशनल इंटरनेशनल लेवल के कॉलेज के इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक आ रहे हैं. डॉक्टर संजय कुमार तोतड़े का कहना है कि "इस आयोजन में हमें जो जानकारियां मिलेंगी उसके आधार पर हम सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी पैथोलॉजी विभाग का अपग्रेडेशन करेंगे."

पैथालॉजी के क्षेत्र में हो रहे नए शोध पर चर्चा (ETV Bharat)

क्या होती है प्रोसेटोमेट्री?

इस कांफ्रेंस में हिस्सा लेने आए डॉ अविनाश गुप्ता ने बताया कि "उनका पूरा शोध ब्लड कैंसर से जुड़ा हुआ है. ब्लड कैंसर तीन किस्म की कोशिकाओं से होता है और इन तीनों किस्म की कोशिकाओं से होने वाले कैंसर का इलाज भी अलग-अलग होता है. इसलिए इसकी पहचान होना बहुत जरूरी है. इस तकनीक को प्रोसेटोमेट्री कहा जाता है. भारत में कई जगह इसका प्रयोग हो रहा है लेकिन मध्य प्रदेश में अभी यह जानकारी के अभाव में और सुविधा के अभाव में इस्तेमाल नहीं हो रही है."

उन्होंने बताया कि "मध्य प्रदेश के मरीजों को उसका फायदा नहीं मिल रहा है. प्रोसेटोमेट्री के जरिए 100000 कोशिकाओं में से यदि एक कोशिका भी कैंसर की है तो उसका पता लगाया जा सकता है. क्योंकि ब्लड कैंसर में यह एकमात्र कोशिका भी दोबारा से कैंसर को बढ़ा सकती है. इसलिए जब अंतिम कोशिका का पता लग जाता है तो उसका इलाज करना सरल हो जाता है."

DISCUSSION PROCETOMETRY TECHNIQUE
प्रोसेटोमेट्री पर पैथोलॉजिस्टों का मंथन (ETV Bharat)

हेमेटोलॉजी पर चर्चा

डॉक्टर शिशिर चिंनपुरिया का कहना है कि "पैथाकोन 2026 में हेमेटोलॉजी से जुड़े हुए कई वैज्ञानिक आ रहे हैं. इसमें कुछ साइंटिस्ट लखनऊ और कोकिला बेन अस्पताल से भी आ रहे हैं. हमारी कोशिश यह है कि मध्य प्रदेश के पैथोलॉजी के डॉक्टर ऐसी तकनीक समझ लें जिससे कम पैसे में और कम खर्चे में मरीज का इलाज हो सके क्योंकि मरीज पैथोलॉजी से परेशान रहता है."

सेल्यूलर मोरफोलॉजी टू मॉलेक्युलर पैथोलॉजी

पैथोलॉजी में वैज्ञानिक माइक्रोस्कोप से कोशिकाएं देखते हैं और इन्हीं कोशिकाओं से यह तय होता है कि किस किस्म की कोशिका ज्यादा है या कम है. कोशिका के हिसाब से बीमारी तय होती है लेकिन डॉक्टर ओपी भार्गव का कहना है कि "सेल्यूलर मोरफोलॉजी से एडवांस्ड टेक्निक मॉलेक्युलर पैथोलॉजी है. मॉलेक्युलर पैथोलॉजी में यह देखा जाता है कि बीमारी के दौरान वह कौन सा मॉलिक्यूल है, जो बीमारी पैदा कर रहा है. इस कांफ्रेंस का उद्देश्य यही है की पैथोलॉजिस्ट को मॉलेक्युलर पैथोलॉजी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल सके, क्योंकि एक बार बीमारी पैदा करने वाले मॉलिक्यूल के बारे में जानकारी मिल जाए तो इलाज सरल हो जाता है."