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1 साल बाद FIR की दलील नहीं आई काम, हाईकोर्ट में महिला रेलवे अधिकारी की अग्रिम जमानत निरस्त

इटारसी रेलवे स्टेशन पर गबन का मामला, रेलवे की महिला अधिकारी को जबलपुर हाईकोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत की याचिका खारिज. सिद्धार्थ शंकर की रिपोर्ट.

HIGH COURT REJECT ANTICIPATORY BAIL
जबलपुर हाईकोर्ट से रेलवे अधिकारी को झटका (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 23, 2026 at 1:55 PM IST

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Updated : August 23, 2026 at 2:56 PM IST

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जबलपुर: गबन के आरोप में दर्ज प्रकरण में रेलवे की महिला अधिकारी को जबलपुर हाईकोर्ट से झटका लगा है. महिला अधिकारी की तरफ से तर्क दिया गया कि विभागीय जांच में किसी अन्य व्यक्ति को दोषी पाया गया है. जिस अवधि में गबन हुआ वह अवकाश पर थी और घटना के एक साल बाद एफआईआर दर्ज कराई गयी थी. हाईकोर्ट जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने आवेदन को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि अग्रिम जमानत प्रदान करने के पूर्व तथ्यों और जांच की जरूरतों को ध्यान दिया जाना आवश्यक है.

रेलवे के टिकटों को लेकर गबन
याचिकाकर्ता भावना राय रेलवे में चीफ बुकिंग सुपरवाइजर हैं. इटारसी रेलवे स्टेशन में 5 दिसम्बर 2024 से 06 दिसम्बर 2024 के बीच रेलवे टिकटों से प्राप्त 4,47,706 रुपये का गबन किया गया था. उसकी रिपोर्ट एक साल बाद 15 जनवरी 2026 को दर्ज कराई गई थी. प्रकरण में असिस्टेंट चीफ बुकिंग सुपरवाइजर कुमारी रिंकी पटेल, चीफ बुकिंग सुपरवाइजर भावना राय तथा स्टेशन मैनेजर अनिल कुमार राय को आरोपी बनाया गया था.

गिरफ्तारी से बचने के लिए भावना राय ने जबलपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया था. दायर याचिका में कहा गया था, जिस अवधि में राशि का गबन हुआ उस दौरान याचिकाकर्ता अवकाश पर थी. उनकी पेमेंट एक लाख प्रतिमाह से अधिक है और महज साढे़ चार लाख रुपये की राशि के लिए अपने करियर, पेंशन व सामाजिक प्रतिष्ठा को दाव पर कैसे लगा सकती है. विभागीय जांच में अन्य व्यक्ति को दोषी माना गया है.

हाईकोर्ट में काम नहीं आई दलील
सरकार की तरफ से अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि, रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत से पूर्व निर्धारित साजिश के तहत अपराध किया गया था. याचिकाकर्ता के अवकाश में रहने के कारण यह नहीं माना जा सकता है कि उसका अपराध से कोई संबंध नहीं था. उसकी और अन्य आरोपियों की अपराध में सटीक भूमिका की जांच अभी बाकी है. साजिश और सार्वजनिक धन के गबन के गंभीर आरोपों की जांच जारी है.

कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को किया निरस्त
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि, अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान सबूतों का विस्तार से विश्लेषण करना उचित नहीं है. रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत से पहले से रची गई साजिश साजिश में उसकी कथित भूमिका को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है. विभागीय कार्यवाही और आपराधिक जांच अलग-अलग क्षेत्रों में होती हैं.

विभागीय जांच में दर्ज निष्कर्ष एक अहम बात हो सकती है, लेकिन यह उस व्यक्ति की आपराधिक जवाबदेही तय नहीं करती जिस पर साजिश का आरोप है. आरोपी व्यक्ति तथा संबंधित रेलवे रिकॉर्ड और लेन-देन के बीच कथित संबंध में पूछताछ की जरूरत को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता. एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज कर दिया.

Last Updated : August 23, 2026 at 2:56 PM IST