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वृद्ध और अशक्त मां की गला रेतकर कर दी थी हत्या, कलयुगी बेटे को आजीवन कारावास की सजा

मां बिस्तर पर रहती थी और पत्नी नहीं रखती थी ख्याल इसलिए मारडाला, पत्नी की भी हत्या का प्रयास, अब मिला कठोर दंड.

Life Imprisonment to Killer Son MP HIGHCOURT
कलयुगी बेटे को आजीवन कारावास की सजा (IANS)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 1, 2026 at 10:42 AM IST

3 Min Read
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जबलपुर : वृद्ध व अशक्त मां की गला रेतकर हत्या करने वाले कलयुगी बेटे को हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास से दंडित किया है. आरोपी युवक ने पत्नी पर भी जानलेवा हमला करने के बाद खुद भी आत्महत्या करने का प्रयास किया था. अपर सत्र न्यायाधीश स्वयं कुमार दुबे ने इस गंभीर अपराध में आरोपी को हत्या व एक और हत्या के प्रयास में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है.

मां बिस्तर पर रहती थी इसलिए मारडाला

अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि ग्राम जरौंद निवासी आरोपी 45 वर्षीय राजेंद्र विश्वकर्मा की वृद्ध मां मूंगा बाई अशक्त महिला थी. वह एक स्थान पर ही बैठी रहती थी और बिस्तर पर ही निस्तार कर देती थी. वृद्ध मां की सारी देखभाल राजेन्द्र करता था और उसकी पत्नी अर्चना सहयोग नहीं करती थी, जिसको लेकर पति-पत्नी में अक्सर विवाद होता था. घटना दिनांक के दिन भी दोनों के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद आरोपी राजेन्द्र ने धारदार हथियार से अपनी ही मां की गला रेतकर हत्या कर दी.

पत्नी की हत्या और खुद आत्महत्या का प्रयास

मां की बेरहमी से हत्या करने के बाद आरोपी ने पत्नी की हत्या कर उसके गले पर भी धारदार हथियार से वार कर दिया. पत्नी खुद को बचाने के लिए घर से बाहर भागी और पड़ोसियों को सूचना दी. जब पड़ोस के लोग आरोपी को पकड़ने घर के अंदर गए तो उसने भी आत्महत्या करने का प्रयास किया.

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पुलिस ने इस मामले में लंबी विवेचना के बाद आरोपी पति के खिलाफ हत्या व हत्या के प्रयास का अपराध दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया था. न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्य व गवाहों के मद्देनजर आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा से दंडित किया है. अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक संदीप जैन ने पैरवी की.

फाइबर मसाज का मतलब समझाएं भोपाल कमिश्नर : हाईकोर्ट

वहीं, हाईकोर्ट में एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग के द्वारा पेश किए गए हलफनामे पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं. हलफनामे में उल्लेख किए गए 'फाइबर मसाज' शब्द और पुलिस द्वारा बरती गई लापरवाही को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने पुलिस आयुक्त भोपाल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर 'फाइबर मसाज' का मतलब समझाने और हलफनामे में हुई लापरवाही पर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं. मामला हत्या के आरोप और वॉरंट की तामील नहीं करने से जुड़ा हुआ है.