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बॉडी पर 7 चोट से स्पष्ट होता है हत्या का इरादा, हाईकोर्ट ने पत्नी के हत्यारे की उम्रकैद को रखा बरकरार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की पीठ ने सुनाया फैसला.

JABALPUR HIGH COURT
जबलपुर हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 13, 2026 at 10:18 PM IST

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Updated : January 13, 2026 at 10:29 PM IST

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जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोपी पति की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है. अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतका के शरीर पर सात चोट के निशान थे. जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपी ने हत्या के इरादे से हमला किया था. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की पीठ ने दोषी की सजा बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया.

आरोपी ने पत्नी की हत्या में आजीवन कारावास की सजा को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

उमरिया निवासी शंकर बैगा ने पत्नी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. अपील में कहा गया था कि वह बैगा समुदाय से है और आदिवासी वर्ग शराब का सेवन करता है. उसने तथा उसकी पत्नी ने 14 जनवरी 2019 को साथ में शराब का सेवन किया था. इस दौरान किसी बात पर विवाद होने पर उसने पत्नी के साथ डंडे से मारपीट की थी. पत्नी की दो दिन बाद 16 जनवरी को मौत हो गई थी. पाली पुलिस ने जांच के बाद उसके खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था.

अपीलकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि घटना के समय वह नशे में था और घटना के नतीजे को समझने की स्थिति में नहीं था. उसका इरादा पत्नी की हत्या करने का नहीं था. पत्नी भी नशे में होने के कारण गिर गई थी, जिसके कारण उसके सिर में चोट आई थी. वारदात में उसने किसी घातक हथियार से हमला नहीं किया था.. सिर्फ डंडे से मारा था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख नहीं था कि मृतका नशे में थी

युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि रिकॉर्ड के अनुसार अपीलकर्ता जब अपनी पत्नी को मार रहा था, तब पड़ोस में रहने वाली उसकी मां बीच-बचाव करने आई थी. अपीलकर्ता ने भी उसे मारने की धमकी देते हुए एक थप्पड़ मारा था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख नहीं है कि मृतका नशे में थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार महिला के शरीर में चोट के सात निशान पाये गए हैं. युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ सजा से सही ठहराते हुए अपील को निरस्त कर दिया.

Last Updated : January 13, 2026 at 10:29 PM IST