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हाई कोर्ट ने ट्रांसफर पर लगाई रोक, मध्य प्रदेश में रोजगार सहायक लेंगे सुकून की सांस

मध्य प्रदेश के रोजगार सहायकों के लिए गुड न्यूज, जबलपुर हाईकोर्ट रोजगार सहायकों के ट्रांसफर प्रक्रिया पर लगाई रोक.

MP EMPLOYMENT ASSISTANTS GOOD NEWS
मध्य प्रदेश में रोजगार सहायकों का नहीं होगा तबादल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 23, 2026 at 3:47 PM IST

3 Min Read
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जबलपुर: मध्य प्रदेश के 23000 रोजगार सहायकों के लिए एमपी हाईकोर्ट से अच्छी खबर आई है. अब उनका ट्रांसफर नहीं होगा. दरअसल, सरकार ने रोजगार सहायकों के ट्रांसफर को लेकर पॉलिसी बनाई थी. जिसे सरकार लागू करने वाली थी. इसके तहत यह तर्क दिया गया था कि रोजगार सहायक जिस पंचायत के रहने वाले हैं, उसी में काम करते हैं. इसलिए इन्हें दूसरे स्थान पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए, ताकि यह लोग पंचायत चुनाव में प्रभाव ना डाल सकें.

शिवराज सरकार में बनाया गया था रोजगार सहायक पद

देश में जब रोजगार गारंटी स्कीम लागू हुई तो रोजगार गारंटी में काम करने वाले मजदूरों का हिसाब-किताब रखने के लिए रोजगार सहायक नाम से एक पद बनाया गया. जब इन पदों पर भर्ती शुरू हुई थी, उस समय मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार थी. तब रोजगार सहायकों को ₹9000 प्रतिमाह दिया जाता था. बाद में सरकार को धीरे-धीरे इस बात का एहसास हुआ कि रोजगार सहायक की यह तनख्वाह बहुत कम है और उन्हें दो अन्य मदों के माध्यम से ₹9000 और दिया जाने लगा.

एडवोकेट ने दी जानकारी (ETV Bharat)

18 हजार रुपए हर माह सैलरी

इस तरह आज रोजगार सहायक की मासिक तनख्वाह 18000 रुपए प्रतिमाह है. ज्यादातर रोजगार सहायकों की नियुक्ति उनके पैतृक गांव में ही हुई. रोजगार सहायक को नियुक्ती के समय कंप्यूटर से जुड़ी डिग्री पीजीडीसीए और 12वीं क्लास में प्रतिशत के आधार पर सिलेक्ट किया गया था. आज भी रोजगार सहायक जिन गांवों में भर्ती हुए थे, वहीं पर काम कर रहे हैं. ग्राम पंचायत में ज्यादातर सचिवों को कंप्यूटर चलाना नहीं आता, ऐसी स्थिति में रोजगार सहायक ही सचिव का पूरा काम करता है.

सरकार ने रोजगार सहायकों के ट्रांसफर की बनाई थी पॉलिसी

मध्य प्रदेश में कुल 23000 रोजगार सहायक हैं. हर पंचायत में एक रोजगार सहायक होता है. बीते दिनों सरकार ने एक मार्गदर्शिका जारी की थी. जिसके तहत रोजगार सहायकों को ट्रांसफर करने की पॉलिसी बनाई गई थी. हालांकि इस पर अभी तक क्रियान्वयन शुरू नहीं हुआ था. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में रोजगार सहायकों ने ट्रांसफर पॉलिसी और टर्मिनेशन की शर्तों को चुनौती दी थी.

हाई कोर्ट ने ट्रांसफर पॉलिसी पर लगाई रोक

रोजगार सहायकों की ओर से पक्ष रखने वाले अधिवक्ता गोपेश्वर यश तिवारी ने बताया कि "हाईकोर्ट ने सरकार की मार्गदर्शिका के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है. अब रोजगार सहायकों को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता. यह आदेश मनरेगा कमिश्नर, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, वल्लभ भवन और हर जिले के कलेक्टर को भेजा जा रहा है, ताकि कहीं पर भी रोजगार सहायक का ट्रांसफर ना हो."

अपने ही गांव में कार्यरत होते हैं रोजगार सचिव

बहुत सारे रोजगार सहायक स्थानीय निवासी होते हैं और उस पंचायत के सदस्य होते हैं. ऐसा मानना था कि ऐसी स्थिति में यह लोग ग्राम पंचायत के चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं. सरकारी कर्मचारी होने की वजह से इन लोगों पर कार्रवाई नहीं हो पाती. रोजगार गारंटी, प्रधानमंत्री आवास और शौचालय जैसे कार्यों के पूरे नियंत्रण की वजह से यह पंचायत में एक निर्णायक भूमिका में होते हैं. इसलिए सरकार इनका ट्रांसफर करवाना चाहती थी.