ETV Bharat / state

10 साल बाद जगी नौकरी की उम्मीद, हाईकोर्ट ने दुर्गावती यूनिवर्सिटी के भर्ती निरस्ती आदेश को पलटा

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के भर्ती निरस्त करने के आदेश को हाईकोर्ट ने किया खारिज, 3 महीने में नियुक्ति पत्र जारी करने के आदेश. सिद्धार्थ शंकर की रिपोर्ट.

MP hc Order appointment letter
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को लगा झटका (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 31, 2026 at 3:13 PM IST

2 Min Read
Choose ETV Bharat

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को झटका लगा है. यूनिवर्सिटी द्वारा एक दशक पूर्व तृतीय और चतुर्थ श्रेणी भर्ती प्रक्रिया को रद्द किये जाने के आदेश को हाईकोर्ट ने मनमाना करार देते हुए उसे निरस्त कर दिया है. जस्टिस दीपक खोत की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि, कोई अन्य विधिक अड़चन नहीं है तो विश्वविद्यालय प्रशासन मेरिट सूची के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को तीन माह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करे. इस फैसले के बाद चयनित युवा जो भर्ती का इंतजार कर रहे थे उनमें एक उम्मीद जगी है.

परीक्षी के बाद चयनित हुए अभ्यर्थी, भर्ती प्रक्रिया निरस्त की

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2014 में तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के लिए विज्ञापन 27 जून और 18 सितंबर 2014 को जारी किया था. अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा दी और परिणाम घोषित होने पर चयन सूची भी जारी की गयी. विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्य परिषद ने 24 अगस्त 2016 को पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया. जिसके खिलाफ चयनित उम्मीदवार योगेश चौहान सहित अन्य की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी.

हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

हाईकोर्ट जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि, केवल शिकायतों या ईओडब्ल्यू द्वारा जानकारी मांगने मात्र से यह साबित नहीं होता कि पूरी चयन प्रक्रिया गलत थी. विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत या कारण नहीं है कि जिससे सामूहिक रूप से भर्ती रद्द करने का फैसला सही ठहराया जा सके.

3 महीने में अपॉइंटमेंट लेटर जारी करने के आदेश

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि, चयन सूची में नाम आने मात्र से नियुक्ति का अंतिम अधिकार नहीं मिलता, फिर भी सरकार या यूनिवर्सिटी बिना किसी स्पष्ट एवं ठोस कारण के मनमाने ढंग से पूरी प्रक्रिया निरस्त नहीं कर सकती. एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता के पक्ष में उक्त आदेश जारी किये. विश्वविद्यालय को मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को 3 महीने में अपाइंटमेंट लेटर जारी करने के आदेश दिए हैं. इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों को राहत मिली है.