गांधारी की तरह आंखों पर पट्टी बांधकर कर रहे काम, शहडोल कलेक्टर पर लगा दो लाख का जुर्माना
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा, ऐसा लगता है मानो निजी कंपनी के कर्मचारी बन गए हैं कलेक्टर. अपने व्यक्तिगत पैसे से 30 दिन के भीतर दो लाख का भरें जुर्माना.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 6, 2026 at 8:22 PM IST
|Updated : January 6, 2026 at 8:37 PM IST
जबलपुर: जबलपुर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के दुरुपयोग के एक मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने शहडोल कलेक्टर पर दो लाख का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने कहा है कि ऐसा लगता है कि कलेक्टर आंखों पर पट्टी बांधकर महाभारत की गांधारी की तरह काम कर रहे हैं. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा, ऐसा लगता है मानो कलेक्टर निजी कंपनी के कर्मचारी बन गए हैं.
शहडोल कलेक्टर ने एक युवक पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा लगाते हुए भेजा था जेल
दरअसल शहडोल कलेक्टर डॉक्टर केदार सिंह ने एक युवक पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम(NSA) की धारा लगाते हुए उसे जेल भेज दिया था. शहडोल जिले के व्यवहारी तहसील में बुढ़वा नाम का गांव है. यहां एक युवा सुशांत सिंह बैस खेती के साथ ही मैटेरियल सप्लाई का काम करते हैं. वह अपने ही क्षेत्र में बालू के अवैध उत्खनन से परेशान था. इसलिए उसने बालू का अवैध खनन करने वाली कंपनी के खिलाफ कई बार शिकायत की और स्थानीय स्तर पर आंदोलन किया.
यही बात बालू माफिया को पसंद नहीं आ रही थी और उन्होंने सुशांत को सबक सिखाने की सोची. बालू माफिया ने अपने स्तर पर सुशांत के खिलाफ दो साल के दौरान बालू चोरी के तीन मामले दर्ज करवाए. इसके साथ ही एक मामले में एक झगड़े का केस भी सुशांत के खिलाफ लगाया गया.
आरोपी के पिता ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर NSA के आरोप को दी थी चुनौती
एडवोकेट ब्रह्मेन्द्र पाठक ने बताया कि बालू माफिया के दबाव के चलते शहडोल एसपी ने सुशांत बैस के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई करने का प्रस्ताव शहडोल कलेक्टर डॉक्टर केदार सिंह के पास भेजा. जिस पर कलेक्टर ने साइन कर दिए और सुशांत को हिरासत में डाल दिया गया. सुशांत के गिरफ्तार होते ही उनके पिता हीरामणि बैस ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में उसकी गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका दायर कर NSA के आरोप को चुनौती दी. हालांकि कोर्ट में केस की सुनवाई होते-होते एक साल से ज्यादा का वक्त बीत गया और सुशांत को रिहा कर दिया गया.
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एडवोकेट ब्रह्मेन्द्र पाठक ने जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह से गुजारिश की कि मामले में भले ही सुशांत ने सजा पूरी कर ली हो लेकिन उसके ऊपर लगाया गया NSA का आरोप गलत है. सुशांत ने ऐसा कुछ किया ही नहीं है कि उसके खिलाफ NSA जैसी गंभीर धारा लगाई जा सके. जब इस मामले में शहडोल कलेक्टर से जवाब मांगा गया तो उन्होंने कहा कि दरअसल उनके सामने दो मामले आए थे, जिसमें एक दूसरे अपराधी के ऊपर NSA की कार्रवाई होनी थी.
शहडोल कलेक्टर ने कोर्ट को बताया दूसरे आरोपी की जगह गलती से दर्ज हो गया नाम
लेकिन कलेक्ट्रेट के बाबू राकेश तिवारी ने गलती से नीरज कांत द्विवेदी की जगह सुशांत बेस का नाम टाइप कर दिया और सुशांत को सजा भुगतनी पड़ी. एडवोकेट ब्रह्मेन्द्र पाठक ने कोर्ट में यह भी बताया कि एनएसए की कार्यवाही करने के पहले कलेक्टर को स्वतंत्र गवाहों की गवाही भी करवानी थी जो उन्होंने नहीं करवाई. बल्कि पुराने गवाहों की गवाही को फाइल में लगाया, यह कार्रवाई गलत थी.
हाईकोर्ट ने कलेक्टर ने व्यक्तिगत पैसे से 30 दिन के भीतर दो लाख का जुर्माना जमा करने को कहा
मामला हाईकोर्ट के सामने आया तो चीफ जस्टिस विवेक अग्रवाल और एके सिंह की डबल बेंच ने शहडोल कलेक्टर को फटकार लगाते हुए यह फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कलेक्टर डॉक्टर केदार सिंह अपने व्यक्तिगत पैसे से 30 दिन के भीतर दो लाख का जुर्माना जमा करें.
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 को अधिकारियों ने अपना खिलौना बना लिया है. जबकि इस कानून के तहत केवल उसी स्थिति में किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है जब वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा हो. इस मामले में यह स्पष्ट हो गया है कि कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे हुए लोग भी नियमों का दुरुपयोग कर रहे हैं.

