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सिविल जज भर्ती 2022 की प्रकिया जारी रखें, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वापस लिया अंतरिम फैसला

हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत सिविल जज भर्ती को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया था. साथ ही कहा था सिविल जज भर्ती परीक्षा के एससी/एसटी अथ्यर्थियों पर करें पुनर्विचार.

MADHYA PRADESH HIGH COURT
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 12, 2026 at 1:21 PM IST

3 Min Read
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जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सिविल जज भर्ती 2022 को लेकर पूर्व में जारी अंतरिम आदेश को वापस लेते हुए प्रकिया जारी रखने के निर्देश दिए हैं. अंतरिम आदेश के तहत सिविल जज भर्ती को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन कर दिया गया था. चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने ये फैसला सुनाया है. न्यायालय को बताया गया कि उम्मीदवारों के अंक भी सार्वजनिक कर दिए गए हैं. साथ ही एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए निशुल्क कोचिंग भी शुरू कर दी गई है.

'एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस' संस्था की ओर से दायर की गई ती जनहित याचिका

एडवोकेट यूनियन फार डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस नामक संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका में मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय जबलपुर द्वारा सिविल जज की भर्ती परीक्षा 2022 में भर्ती नियम 1994 में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई थी. जिसमें सिविल जज भर्ती परीक्षा 2022 की नियुक्तियों में हुई अनियमितताओं, शत-प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा अनारक्षित वर्ग में योग्यता के आधार पर आरक्षित वर्ग के अभ्यार्थियों को शामिल नहीं किए जाने को कटघरे में रखा गया था.

वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व पुष्पेंद्र कुमार शाह ने बताया कि याचिका में कहा गया है कि 199 पद के लिए विज्ञापन निकाले गए थे, जिनमें से अनारक्षित वर्ग के कुल 48 पद में 17 बैकलॉग, अनुसूचित जाति के कुल 18 पद में 11 बैकलॉग, अनुसूचित जनजाति के 121 पद में 109 बैकलॉग व ओबीसी के कुल 10 पद में एक बैकलॉग के लिए थे. इस तरह कुल 199 पदों में 138 बैकलॉग जिसमे छह पद दिव्यांगों के शामिल हैं, निकाले गए थे.

सिविल जज भर्ती परीक्षा के तीनों चरण के बाद मात्र 79 अभ्यर्थी योग्य पाए गए

भर्ती परीक्षा के तीनों चरण, प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के बाद मात्र 79 अभ्यर्थी योग्य पाए गए. जिनमें ओबीसी के 15 एससी वर्ग के तीन व एसटी वर्ग के एक भी नहीं है. याचिका में कहा गया था कि बैकलॉग पद सिर्फ आरक्षित वर्ग के लिए निकाले जाते हैं. इसके अलावा अनाक्षित वर्ग में एक भी आरक्षित वर्ग के मेरिटोरियस अभ्यार्थी का चयन नहीं किया गया.

पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा था सिविल जज भर्ती परीक्षा के एससी/एसटी अथ्यर्थियों पर करें पुनर्विचार

पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा था सिविल जज भर्ती परीक्षा के एससी/एसटी अथ्यर्थियों पर पुनर्विचार करें. साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिए थे परीक्षा प्रभाग न्यूनतम अर्हता अंक में शिथिलता कर नई सूची बनाए. चूंकि एससी-एसटी वर्ग के अभ्यर्थी अधिक संख्या में सफल नहीं हो रहे हैं, अत: निशुल्क कोचिंग की भी व्यवस्था की जाए.