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हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को ही क्यों दी सजा, 25 फलदार वृक्ष लगाकर कोर्ट को देनी है रिपोर्ट

मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण में पेड़ कटाई की याचिका पर याचिकाकर्ता को ही मिल गई सजा, जबलपुर हाईकोर्ट ने 25 फलदार वृक्ष लगाने का दिया आदेश. विश्वजीत सिंह राजपूत की रिपोर्ट.

JABALPUR HIGH COURT
सांकेतिक तस्वीर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 24, 2026 at 4:53 PM IST

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Updated : August 24, 2026 at 5:02 PM IST

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जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता को आदेश दिया है कि वह 25 फलदार वृक्ष लगाकर इसकी रिपोर्ट कोर्ट को देंगे. दरअसल, याचिका करता ने राज्य सरकार के खिलाफ रिट पिटीशन दायर करते हुए आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश में कई बड़ी सड़क निर्माण की परियोजनाएं चल रही हैं और इन परियोजनाओं में हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन याचिकाकर्ता के पास में इसके पर्याप्त आंकड़े नहीं थे. याचिकाकर्ता का कहना है कि इन सड़क परियोजनाओं की वजह से पर्यावरण असंतुलन पैदा हो रहा है.

2019 में लगाई थी याचिका, मध्य प्रदेश में सड़क बनाने में काटे जा रहे पेड़

कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण को सुधारना सबकी जिम्मेदारी है इसलिए याचिकाकर्ता भी पेड़ लगाए. नीमच के रहने वाले आनंद मानवत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 2019 में एक रिट याचिका लगाई थी जिसमें उन्होंने यह सवाल उठाया था कि मध्य प्रदेश में लगातार सड़क बनाई जा रही हैं और इन सड़कों की वजह से लगातार पेड़ काटे जा रहे हैं और इन पेड़ों को दोबारा कहीं नहीं लगाया जा रहा है. वृक्षारोपण पर सरकार का ध्यान नहीं है इसलिए पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो रहा है.

MP PETITIONER TO PLANT 25 TREES
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को ही क्यों दी सजा (ETV Bharat)
JABALPUR HIGH COURT
जबलपुर हाईकोर्ट (ETV Bharat)

इसके साथ ही 24 सितंबर 2015 की एक अधिसूचना को भी रद्द करने की मांग की गई थी जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने जारी किया था. इसके तहत 53 प्रकार के पेड़ों की कटाई बिना परमिशन की जा सकती थी और इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान बिना ट्रांजिट परमिट के ले जाया जा सकता था. इस आदेश को भी इस याचिका में याचिका करता आनंद ने चुनौती दी थी.

MP PETITIONER TO PLANT 25 TREES
25 फलदार वृक्ष लगाकर कोर्ट को देनी है रिपोर्ट (ETV Bharat)

24 सितंबर 2015 की अधिसूचना पहले ही निरस्त हो चुकी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने इसी याचिका की सुनवाई करते हुए बताया कि 24 सितंबर 2015 कि राज्य सरकार की अधिसूचना को पहले ही 1 मार्च 2025 में तीन जजों की बेंच ने निरस्त कर दिया है और अब वह प्रभावशाली नहीं है इसलिए उस पर चर्चा करने का कोई सवाल नहीं है.

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वहीं, 2019 में लगाई याचिका के संदर्भ में हाईकोर्ट ने याचिका करता से पूछा कि अब तक कितने प्रोजेक्ट में कितने पेड़ काटे गए हैं इसकी कोई जानकारी आपने याचिका में नहीं दी है. जजों की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि क्या आपके पास ऐसी कोई जानकारी है कि 2019 के बाद कितने प्रोजेक्ट में कितने पेड़ काटे गए तो वकील कोर्ट के सामने कोई जानकारी नहीं दे पाए.

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस याचिका का निराकरण करते हुए आनंद से कहा कि "आपकी याचिका में पूरी जानकारी नहीं है आपको पूरी जानकारी के साथ कोर्ट में आने का रास्ता खुला है, लेकिन इस बीच में आपको नगर निगम द्वारा बताई जगह पर 25-25 फलदार वृक्ष लगाने हैं और इसकी जानकारी कोर्ट को देनी है."

Last Updated : August 24, 2026 at 5:02 PM IST