मध्य प्रदेश में अल नीनो ला रहा सूखा, बारिश के लिए जनप्रतिनिधियों ने लगाई ये जुगत
जबलपुर में अल नीनो की वजह से पड़ेगा सूखा, मौसम वैज्ञानिक की चेतावनी, कम पानी की जरूरत वाली फसलें बोने की दी सलाह.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 26, 2026 at 6:34 PM IST
जबलपुर: जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक मनीष भान ने चेतावनी दी है कि यह साल सूखे का साल है. अलनीनो की वजह से बारिश कम होगी और इसके हालात जून महीने से ही नजर आने लगे हैं. वहीं, दूसरी तरफ जबलपुर के बरगी बांध परियट जलाशय और खनदारी जलाशय में पानी इतना कम हो गया है कि जबलपुर के कई इलाकों में पानी की सप्लाई को रोकना पड़ा है. इन हालातों को देखते हुए जबलपुर के जनप्रतिनिधि इंद्रदेव की पूजा करने के लिए मंदिर पहुंचने लगे हैं. वहीं, दूसरी तरफ पानी की कमी झेल रही जनता आंदोलन कर रही है.
बीते 10 सालों का बारिश का आंकड़ा
| वर्ष | जून में कुल वर्षा (मिमी) |
|---|---|
| 2024 | 104.9 |
| 2023 | 382.4 |
| 2022 | 111.0 |
| 2021 | 47.2 |
| 2020 | 66.8 |
| 2019 | 15.5 |
| 2018 | 58.2 |
| 2017 | 130.1 |
| 2016 | 93.0 |
| 2015 | 49.5 |
बीते 10 सालों में जबलपुर में केवल 2019 में ऐसा मौका आया था, जब जून के महीने में 15 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी. बाकी 10 सालों में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी कि जून के महीने में इतनी कम बारिश हुई हो. इस साल अब तक मात्र 46 मिली मीटर बारिश दर्ज हुई है.
मौसम वैज्ञानिक की चेतावनी
जबलपुर में मौसम पर अध्ययन करने वाले 2 बड़े कार्यालय हैं. एक भारतीय मौसम विज्ञान का कार्यालय है. इसके साथ ही जबलपुर के कृषि विश्वविद्यालय में मौसम विभाग का एक दूसरा बड़ा कार्यालय है, जिसमें मौसम विज्ञानी मौसम का अध्ययन करते हैं. जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक मनीष भान का कहना है कि "यह साल सूखे का साल है. इस साल बहुत अच्छी बारिश की संभावना नजर नहीं आ रही है. जुलाई और अगस्त में बहुत कम बारिश होगी, इसलिए किसानों को सोच समझकर ऐसी फैसलें बोना चाहिए जिनमें कम पानी की जरूरत हो."

जबलपुर में खत्म हुआ पानी
आसमान में भी बिल्कुल बादल नजर नहीं आ रहे हैं, ऐसी स्थिति में थोड़ी बहुत उम्मीद पानी के स्टॉक पर होती है, लेकिन इस साल जबलपुर का बरगी बांध कुछ ज्यादा ही खाली हो गया है. बरगी बांध में दाएं तरफ कैनाल है, जिससे पानी की सप्लाई होती थी. उस कैनाल से ही पानी लगभग 100 फीट दूर पहुंच गया है. इसलिए दाएं तट से निकलने वाला कैनाल जिसका मुख्य रूप से जबलपुर के आसपास के इलाकों में पानी की सप्लाई के लिए इस्तेमाल किया जाता था, वह पूरी तरह सूखा पड़ा हुई है.

ग्राम पंचायत सेहतपुरी के रहने वाले शेख मजीद एक छोटे किसान हैं और उन्हें धान की खेती करनी है, लेकिन नहर पूरी तरह सूखी पड़ी हुई है. ऐसी स्थिति में वे धान का रोपा नहीं डाल रहे हैं.
बरगी बांध हुआ खाली
बरगी बांध में सामान्य तौर पर 21 मीटर पानी रहता था, लेकिन इस साल अब तक मात्र 4 मीटर पानी ही शेष बचा है. इसका इस्तेमाल भी सिंचाई के लिए नहीं किया जा सकता. इसे नर्मदा की धार को बनाए रखने के लिए भी नहीं छोड़ा जा रहा है. इसलिए नर्मदा की धार कई जगह पर सूख गई है.
जबलपुर शहर में भी पानी की कमी का असर नजर आने लगा है. जबलपुर में पानी का मुख्य स्रोत नर्मदा नदी, परियट जलाशय और खनदारी जलाशय हैं. इन तीनों स्थानों पर पानी की कमी हो गई है.

शहर के कुछ इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित
इसकी वजह से जबलपुर के आधे शहर में पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई है. पूर्व विधानसभा और कैंट विधानसभा के बड़े क्षेत्र में केवल एक टाइम मात्र 10 मिनट के लिए ही पानी सप्लाई किया जा रहा है.
इसकी वजह से जबलपुर कांग्रेस के नेता कहीं मटका फोड़ आंदोलन कर रहे हैं, तो कहीं नगर निगम कार्यालय का घेराव कर रहे हैं. जबलपुर नगर कांग्रेस के अध्यक्ष सौरभ शर्मा का कहना है कि "पानी सप्लाई में नगर निगम पूरी तरह असफल हो गया है और लोगों को पीने तक का पानी नहीं मिल पा रहा है. इसलिए लोग सड़कों पर उतर कर आंदोलन कर रहे हैं.
भगवान की शरण में पहुंचे नेता
जबलपुर नगर निगम के महापौर जगत बहादुर सिंह अनु का कहना है कि "हम भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द ही मानसूनी बारिश हो जाए." इसके लिए नगर निगम प्रशासन ने एक पूजन कार्यक्रम का भी आयोजन किया. महापौर के साथ जबलपुर कैंट विधानसभा के विधायक अशोक रोहाणी भी इस पूजन में शामिल हुए.
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फायर ब्रिगेड का टैंकर भी कर रहा है पानी सप्लाई
जबलपुर महापौर जगत बहादुर सिंह का कहना है कि "जबलपुर में जिन-जिन जल स्रोतों से पानी की सप्लाई होती है, उन सभी में पानी की कमी आ गई है. इसलिए जबलपुर का जल संकट बड़ा है. जगत बहादुर सिंह का कहना है कि नगर निगम के 40 टैंकर, फायर ब्रिगेड की टैंकर और उद्यान विभाग की टैंकर भी प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई कर रहे हैं."

