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ट्रेनर के इशारे पर कैसे नाचते हैं बेहद खूंखार डॉगी? घरेलू डॉग्स भी तैयार, देखिए- ट्रेनिंग सेशन

पुलिस विभाग से रिटायरमेंट के बाद डॉग ट्रेनर्स ने घरेलू डॉग्स की ट्रेनिंग शुरू की. उनका शौक पूरा और आय का जरिया भी बना.

Jabalpur dogs training session
जबलपुर में घरेलू डॉग्स भी ले रहे ट्रेनिंग (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 1, 2026 at 3:17 PM IST

4 Min Read
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जबलपुर : डॉग्स हमेशा से मनुष्य का साथी रहा है. डॉगी से वफादार कोई जानवर नहीं होता. आजकल देसी-विदेशी नस्ल के डॉगी लोग घरों में पाल रहे हैं. वे यह भी चाहते हैं कि उनके डॉगी वेल ट्रेंड हों. पुलिस विभाग से रिटायर्ड दो जवानों ने बताया कि उन्होंने कभी यह हुनर सीखा था. आज इसी की वजह से उनकी पहचान बन गई है और रिटायर होने के बाद भी वे अपनी इस कला के जरिए रोजगार कर पा रहे हैं.

रिटायरमेंट के बाद भी डॉग्स को ट्रेनिंग

जबलपुर के रहने वाले धन्य कुमार उपाध्याय ने पुलिस के जवान की बतौर शुरू की थी. शुरुआत में उन्होंने सिपाही के रूप में काम किया लेकिन इसी बीच में उन्हें डॉग ट्रेनर बनने का मौका मिला. इसकी ट्रेनिंग भोपाल में होती थी. धन्य कुमार उपाध्याय ने डॉग ट्रेनर बनने का फैसला किया और उन्होंने कई महीने तक डॉग ट्रेंड करने की ट्रेनिंग ली. धन्य कुमार उपाध्याय 2020 में रिटायर हो गए लेकिन उनका शौक जिंदा रहा और अब उन्होंने इसी शौक को अपना प्रोफेशन भी बना लिया है.

डॉग ट्रेनर के इशारे पर कैसे नाचते हैं खूंखार डॉगी, देखिए (ETV BHARAT)

जबलपुर में घरेलू डॉग्स भी ले रहे ट्रेनिंग

डॉग ट्रेनर कुमार उपाध्याय अब शहर में एक साथ एक दर्जन से ज्यादा डॉग्स को ट्रेंड कर रहे हैं. डॉग ट्रेनर धन्य कुमार उपाध्याय ने बताया "किसी भी डॉगी को ट्रेंड किया जा सकता है. कोई डॉगी ज्यादा ट्रेंड होता है, कोई कम होता है, कोई ज्यादा सेंसिबल होता है. यह सब कुछ ट्रेनिंग पर डिपेंड है. डॉग्स की ट्रेनिंग कई प्रकार से होती है. पुलिस में जो डॉगी इस्तेमाल किए जाते हैं वे सामान्य तौर पर दो प्रकार से ट्रेंड किए जाते हैं."

Jabalpur dogs training session
पुलिस से रिटायर होने के बाद डॉग्स की ट्रेनिंग (ETV BHARAT)

विस्फोटक को सूघने की ट्रेनिंग

डॉगी का एक प्रकार नशीले पदार्थों को सूंघता है. ऐसे डॉगी की वजह से नशे का कारोबार करने वाले लोगों को पकड़ा जाता है. डॉगी की वजह से नशीले पदार्थ की जब्ती का काम सरल हो गया है. पुलिस और फौज में ही डॉग्स की ट्रेनिंग विस्फोटक सूंघने में भी की जाती है ताकि ये सूंघकर बता सकें कि कहां विस्फोटक रखा हुआ है. इससे जवानों की जान बच जाती है.

कपड़े की गंध से अपराधी पकड़ते हैं

धन्य कुमार का कहना है "कुछ दिन के अभ्यास में ही डॉगी बड़ी आसानी से बारूद को सूंघ लेते हैं. पुलिस में ही तीसरे प्रकार का डॉगी अपराधियों को पकड़ने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं. डॉग्स की सूंघने की शक्ति बहुत ज्यादा तेज होती है. वे आसानी से आदमी के शरीर की गंध को महसूस कर सकते हैं. इसलिए यदि अपराधी के शरीर से जुड़ा हुआ कोई कपड़ा डॉगी को सूंघा दिया जाए तो वह पीछा करते हुए अपराधी तक पहुंच जाता है."

Jabalpur dogs training session
रिटायरमेंट के बाद भी डॉग्स को ट्रेनिंग (ETV BHARAT)

ट्रेनिंग से पहले डॉगी का स्वाभाव परखते हैं

इन दिनों धन्य कुमार घरों में पाले जाने वाले डॉग्स को ट्रेंड कर रहे हैं. घरेलू डॉग्स भी दो तरह से तैयार किए जाते हैं. एक घरों की सुरक्षा के लिए और दूसरे घर के भीतर सहयोगी के रूप में. धन्य कुमार ने बताया "डॉगी को ट्रेंड करने से पहले उसके नेचर को जानना जरूरी है. कई डॉगी शांत होते हैं और कई एग्रेसिव. इसलिए हर डॉगी की ट्रेनिंग अलग-अलग होती है. उनके लिए यह काम एक जुनून की तरह है. वे सैकड़ों डॉग्स को ट्रेंड कर चुके हैं."

डॉगी का डाइट प्लान भी अहम हिस्सा

डी.एल.गर्ग भी सुरक्षा बल में डॉग ट्रेनर थे. अब उनकी उम्र 70 साल के लगभग है. लेकिन अभी भी ग्रेट डेन जैसे खूंखार डॉगी को ट्रेंड कर रहे हैं. डॉग ट्रेनर डीएल गर्ग का कहना है "यदि डॉगी का डायट प्लान मांसाहारी कर दिया जाए तो वह खूंखार भी हो सकता है. इसलिए डॉग्स को खाना भी बहुत सोच समझकर खिलाना होता है." शहरों में डॉग ट्रेनिंग रोजगार का एक जरिया है लेकिन एक अच्छा डॉग ट्रेनर बनने के लिए लंबे अभ्यास की जरूरत होती है.