अंतिम दिनों में दो बूंद पानी के लिए तरस गई थीं डॉक्टर हेमलता, 50 करोड़ की संपत्ति पर नगर निगम का कब्जा
जबलपुर की डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की मौत के बाद उनकी संपत्ति सरकारी हो गई. नगर निगम की टीम ने बनाया स्वास्थ्य विभाग का ऑफिस.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 19, 2026 at 1:44 PM IST
जबलपुर: आखिरकार डॉक्टर हेमलता की संपत्ति ना पड़ोसी को मिली ना गायत्री परिवार को और ना ही उनकी बहनों को. जबलपुर नगर निगम ने आज इस पर कब्जा करके स्वास्थ्य विभाग का ऑफिस यहां बना दिया है और अब यह संपत्ति सरकारी हो गई है. नगर निगम ने जब बंद कमरों के ताले तोड़े तो सामने आई हकीकत संपत्ति के लालच में डॉक्टर हेमलता के परिजनों ने उन्हें तड़फा तड़फा कर मरने के लिए छोड़ दिया था. 50 करोड़ की संपत्ति की इस बुजुर्ग महिला के लिए उसकी दुश्मन बन गई थी.
नेपियर टाउन में 25000 वर्गफीट का बंगला
जबलपुर के नेपियर टाउन में महेश श्रीवास्तव, डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव और उनका बेटा रचित श्रीवास्तव का एक फलता-फूलता परिवार था. इस परिवार के पास जबलपुर के नेपियर टाउन जैसे इलाके में 25000 वर्ग फीट का एक बंगला था, जिसमें एक बड़ा सा गार्डन, बड़े-बड़े हॉल, सर्वेंट क्वार्टर के साथ वह सुख सुविधा थी जो एक बंगले में हो सकती है.
हेमलता श्रीवास्तव नेत्र विशेषज्ञ थीं और सरकारी नौकरी में रहते हुए उन्होंने बहुत संपत्ति इकट्ठी की थी. सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था लेकिन 2022 में उनके बेटे रचित की मौत हो गई. इसके बाद परिवार में केवल हेमलता और उनके पति महेश रह गए थे. 2025 की दिसंबर में महेश श्रीवास्तव की मृत्यु हो गई. डॉ हेमलता श्रीवास्तव की उम्र 81 वर्ष हो गई थी.
बहन ने 3 करोड़ नगद लेकर तैयार करवाया था दानपत्र
हेमलता की खराब तबीयत की सबसे पहले जानकारी उनकी बहन शांति मिश्रा को मिली. वह रायपुर से जबलपुर आईं और उन्होंने अपनी बहन की देखरेख करने की बजाय इस बंगले का 11000 वर्ग फीट के हिस्से का एक दान पत्र तैयार करवाया और लगभग 3 करोड़ रुपया नगद लेकर यह दान पत्र उन्होंने डॉक्टर सुमित जैन को दे दिया. डॉ सुमित जैन हेमलता श्रीवास्तव के पड़ोसी थे. अपना हिस्सा लेकर शांति मिश्रा रायपुर वापस लौट गई.

हेमलता की छोटी बहन ने भी तैयार करवाया दान पत्र
हेमलता की छोटी बहन कनक लता मिश्रा राजस्थान में रहती थीं और वह राजस्थान से जबलपुर आई और उन्होंने घर का बाकी हिस्सा गायत्री परिवार के नाम पर दान पत्र के जरिए लिखवा दिया. डॉ हेमलता श्रीवास्तव की देखरेख की जिम्मेदारी अब गायत्री परिवार के पास थी लेकिन इस बात की जानकारी डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के कुछ परिचित डॉक्टरों को भी थी.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आया था सामने
इसलिए वे डॉक्टर हेमलता की तबीयत जानने के लिए उनके घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि हेमलता की तबीयत बहुत अधिक खराब है. इन्हीं में से डॉक्टर रिचा शर्मा ने बताया कि उन्हें पानी तक नहीं दिया जा रहा है और हेमलता एक जिंदा लाश बन गई थीं. इसलिए जबलपुर का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सामने आया और उन्होंने इस मामले में प्रशासन से दखल करने की अपील की.
हेमलता का बयान सुनकर चौंके थे अधिकारी
आईएमए की आपत्ति के बाद प्रशासन सतर्क हुआ और डॉक्टर हेमलता को जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया. यहीं पर डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव ने बयान दिया कि उन्हें तड़फा तड़फा कर मारने की तैयारी चल रही थी. हेमलता श्रीवास्तव का इलाज तो बेहतर हो गया था और उनकी हालत भी स्थिर हो गई थी.

ऐसी स्थिति में उन्होंने राजस्व अधिकारी पंकज मिश्रा को दिए अपने बयान में बताया कि उन्होंने किसी को दान पात्र नहीं लिखा. जितने भी दान पत्र उनकी संपत्ति से जुड़े हुए आए हैं, वह सभी उनकी मर्जी के नहीं हैं बल्कि उन्होंने संपत्ति को सरकारी करने की इच्छा जताई. इन 2 दान पत्रों के अलावा भी कुछ बिल्डर भी कागज लेकर यहां पहुंचे थे.
16 फरवरी को डॉक्टर हेमलता ने छोड़ दी दुनिया
16 फरवरी के दिन डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की मृत्यु हो गई. मृत्यु के बाद जबलपुर नगर निगम ने एक सूचना जाहिर की, कि डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की संपत्ति से जुड़ा हुआ कोई भी दावा 17 फरवरी तक यदि कोई पेश करता है, तो उसे पर विचार किया जाएगा लेकिन कोई भी दावा सामने नहीं आया.

'हेमलता की संपत्ति अब नगर निगम की होगी'
जबलपुर नगर निगम के कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार ने बताया कि "जबलपुर की नेपियर टाउन की संपत्ति दरअसल नगर निगम की है और नगर निगम लोगों को रहने के लिए इसे लीज पर देता है. लोगों को लीज के दस्तावेज को रिन्यू करवाना पड़ता है लेकिन इस संपत्ति का दस्तावेज रिन्यू नहीं हुआ था. ऐसी स्थिति में इसकी कोई लिखा पड़ी नहीं हो सकती थी और यदि कोई दान पत्र लेकर आता भी तो उसका कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता."
उन्होंने बताया कि "लिहाजा 19 फरवरी की सुबह 9:00 बजे नगर निगम की पूरी टीम डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के बंगले पर पहुंची और बंगले पर नगर निगम ने अपना कब्जा ले लिया. बंगले के बाहर लगे हुए डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव और उनके परिवार के तमाम बोर्ड हटा दिए गए और नगर निगम ने स्वास्थ्य विभाग का बोर्ड लगाकर अपना अधिकार जाता दिया."
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ताले तोड़ने पर अस्त-व्यस्त मिला सामान
जब इस बंगले के ताले तोड़े गए तो अंदर जो हकीकत सामने आई वह दिल दहला देने वाली थी. यहां पर गीता सार टंगा हुआ था जिसमें लिखा था क्या लेकर आए हो और क्या लेकर जाना है. पूरे कमरे में जगह-जगह दवाइयां पड़ी हुई थीं. अंतिम दिनों में हेमलता के गंदे कपड़े साफ तक नहीं हुए थे, पूरे घर में जगह-जगह पुराने गंदे कपड़े बिखरे पड़े थे. हर कमरे में एसी लगा हुआ था लेकिन कहीं पर भी सफाई नहीं थी. कुल मिलाकर यह सुविधाजनक जगह डॉक्टर हेमलता के लिए कारागार जैसी बन गई थी.

