जबलपुर में खनन माफियाओं पर प्रशासन का बुलडोजर, 4000 घन मीटर अवैध रेत पर हुई कार्रवाई
जबलपुर में रेत सिंडिकेट के खिलाफ खनिज विभाग का बड़ा एक्शन, 40 लाख की अवैध रेत को बुल्डोजर से नदी में मिलाया.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 9, 2026 at 10:19 PM IST
जबलपुर: खनिज विभाग ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध 4000 घन मीटर रेत को नदी में मिला दिया. इसे रेत कारोबारी ने अवैध तरीके से नदी से निकाला था. जिला खनिज अधिकारी का कहना है कि ऐसी कार्रवाई से अवैध रेत निकालने वाले लोगों पर लगाम लगाई जा सकेगी. यहां रेत का ठेका किसी को नहीं दिया गया है लेकिन इसके बावजूद रोज लाखों रुपए की रेत नदियों से निकली जा रही है.
अवैध उत्खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
जबलपुर में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन होता है. यहां नर्मदा नदी और हिरन नदी से रेत निकाली जाती है. नर्मदा नदी के कुछ इलाकों में रेत का उत्खनन प्रतिबंधित है और नदी के अंदर से रेत नहीं निकाली जा सकती. लेकिन इसके बावजूद नदी के भीतर से बड़ी-बड़ी मशीन लगाकर रेत निकाली जा रही है.
आरोपियों पर संपूर्ण लगाम लगाने की तैयारी
जिला खनिज अधिकारी अशोक राय ने बताया, "सामान्य तौर पर हम रेत की जब्ती करते थे तो उसे दोबारा नीलाम किया जाता था. इसके बावजूद रेत के कारोबारी नदियों से गैरकानूनी तरीके से रेत निकालना बंद नहीं कर रहे थे. इसलिए हमने इस बार नए तरीके अपनाए."

जिला अधिकारी के आदेश से मचा हड़कंप
उन्होंने आगे बताया, "इस समय रेत का ठेका किसी को नहीं दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद नदियों से रेत निकाली जा रही है. इसलिए जिला कलेक्टर ने आदेश दिया था कि पुलिस, एसडीएम और खनिज विभाग मिलकर अवैध रेत निकालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें."
40 लाख की रेत पानी और मिट्टी में मिलाई
जिला खनिज अधिकारी ने कहा, "बीते तीन दिनों से चल रही कार्रवाई में लगभग 300 हाईवा, 4000 घन मीटर रेत को दोबारा वापस नदी में डाल दिया गया है. इसमें से कुछ रेत मिट्टी में भी मिला दी गई है. 2 दिन की कार्रवाई में लगभग 40 लाख रुपए की रेत को वापस नदी में मिलाया गया है."
एम सैंड के इस्तेमाल में भारी बढ़ोतरी
अशोक राय ने बताया, "यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी क्योंकि जबलपुर में बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन चल रहा है. अब तक इस मामले में किसी के खिलाफ कोई केस नहीं बना है और ना ही किसी की गिरफ्तारी हुई है." आर्किटेक्ट अरुण जैन ने कहा, "रेत के और भी विकल्प हैं और जिले में तो एम सैंड का इस्तेमाल रेत से ज्यादा होने लगा है. इससे निर्माण कार्य सस्ता और ज्यादा मजबूत हो रहा है. वहीं एम सैंड की वजह से नदियां भी सुरक्षित हैं."
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नदी में रेत बनने में सैकड़ों साल लगते हैं लेकिन बीते सालों में रेत का इतना ज्यादा उत्खनन हुआ है कि नदी में नई रेत बन ही नहीं पा रही है. जबलपुर में नर्मदा नदी के कई घाटों से रेत पूरी तरह गायब हो गई है. इसकी वजह से कई जगह पर पत्थर और मिट्टी निकल आए हैं. इस अवैध उत्खनन ने नदी के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है.

