मजदूरों के आगे किसानों को नहीं फैलाना होगा हाथ, आलू-प्याज और अदरक की ऐसे होगी खुदाई
जबलपुर की जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों का कमाल, कंद वाली फसलों की खुदाई के लिए बना दी मशीन, धान के लिए सीड प्लांटर.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : April 9, 2026 at 1:51 PM IST
|Updated : April 9, 2026 at 2:45 PM IST
जबलपुर: आजकल हर क्षेत्र में नए-नए इनोवेशन देखने को मिलते हैं. इसी तरह खेती में भी कई किसानों और युवाओं के द्वारा नए-नए एक्सपेरीमेंट भी सुनने मिलते हैं, चाहे वह फसलों को लेकर हो या नई-नई मशीनों को लेकर हो. खेती में एक समस्या मजदूरों को लेकर भी होती है, कई बार किसानों को समय पर तो उचित दाम में मजदूर नहीं मिलते, जो उनकी फसलों की खुदाई वगैरह कर दे. किसानों की इस समस्या का भी अब जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के पीएचडी स्कॉलर छात्रों ने हल ढूंढ निकाला है, जिससे उन्हें खुदाई के लिए मजदूरों की जरूरत नहीं होगी.
जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के छात्रों ने बनाई मशीन
कंद वाली फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए खेतीहर मजदूर की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है. खासतौर पर आलू, प्याज, अदरक, लहसुन, मूली और गाजर की खेती करने वाले किसानों को फसल खोदने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं. इसी समस्या का निदान जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के पीएचडी स्कॉलर छात्रों ने निकाला है. उन्होंने एक ऐसी मशीन बनाई है, जिसमें फसल खोदने के लिए मजदूरों की जरूरत नहीं पड़ती.
प्याज-आलू जमीन से निकालने में होती है परेशानी
नरसिंहपुर में प्याज की खेती करने वाले किसान रामनारायण पटेल का कहना है कि "प्याज की खेती में सबसे ज्यादा मजदूरों की जरूरत खुदाई के दौरान पड़ती है. हर प्याज को हाथ से खोदा जाता है और यह काम बहुत ही अधिक श्रम वाला होता है, इसलिए आजकल इसमें मजदूर नहीं मिलते." कुछ ऐसी ही समस्या जबलपुर के धर्म पटेल की है. सहजपुर गांव में आलू की खेती करते हैं. आलू की खेती में भी आलू को जमीन के भीतर से निकालने में मजदूरों की जरूरत पड़ती है. यह काम भी बहुत अधिक मेहनत वाला है, इसलिए इस काम में भी मजदूर नहीं मिलते.

कंद वाली फसलों के लिए बनाई मशीन
बाजार में आने वाली कंद वाली फसलें जिनमें अदरक, मूली, गाजर लहसुन जैसी कई फसले हैं. जिन्हें जमीन के भीतर उगाया जाता है, लेकिन इन्हें निकालने में बड़ी समस्या होती है. इस काम के लिए कुछ मशीनें आती है, लेकिन पर बहुत महंगी और बड़ी कंपनियों की है. इसलिए भारत में यह सफल नहीं है, क्योंकि भारत में ज्यादातर छोटे किसान हैं. नेहरू कृषि विश्वविद्यालय पीएचडी स्कॉलर ललित यादव का कहना है कि "इस समस्या को लेकर एग्रीकल्चर कॉलेज में भी लगातार चर्चा होती है. इसीलिए हमने एक ऐसी मशीन बनाई है, जो किसानों की इस समस्या का पूरी तरह से निदान कर देगी.

जमीन के अंदर वाली फसल को निकालेगी मशीन
ललित यादव का कहना है कि इस मशीन को लगभग ₹100000 की लागत में पुराने सामानों से बनाया गया है. इसमें एक इंजन है, जो इसको आगे लेकर चलेगा. सीट के ठीक नीचे पंजे लगे हुए हैं, जो जमीन में जाकर फसल को जड़ के नीचे से खोदेंगे. इसके ठीक पीछे एक चेन लगी हुई है. जिसके ऊपर खुदी हुई फसल निकल कर आएगी, जो घूमती हुई चेन फसल को मिट्टी से अलग करके पीछे खेत में निकालते जाएगी.

जिसे बाद में केवल उठाने का काम बाकी रहेगा, जो काफी सरल है, जिसे आसानी से मजदूर कर सकते हैं. छात्र ने कहा कि इसे कृषि विश्वविद्यालय में बनाया गया है. यदि कोई किसान चाहे तो इसे कृषि विश्वविद्यालय से बनवा सकता है."
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चावल के किसानों के लिए मशीन
इसी तरह एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग के छात्र शुभंकर नामदेव ने बताया कि "उनकी टीम ने एक ऐसा सीड प्लांटर बनाया है, जो मुख्य रूप से धान की खेती करने वाले किसानों के काम का है. यह एक छोटी मशीन है. जिसका उपयोग छोटे किसानों के लिए किया जा सकता है. इसमें धान के रोपे को लगाना में होता है. यह मशीन खेत में न केवल धान का रोपा लगाएगी बल्कि जड़ों में खाद डालने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. चावल की खेती में भी बहुत मेहनतकश मजदूरों की जरूरत पड़ती है, इसलिए यहां भी किसानों को मशीनों की जरूरत है."

